पाकिस्तान में क्यों सुर्ख़ियां बटोर रहे हैं बीजेपी नेता नितिन गडकरी: पाक उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तान में फ़ौजी अदालत का मामला, अमरीका-तालिबान की बातचीत और सीपेक का मुद्दा सुर्ख़ियों में रहा.
सबसे पहले बात फ़ौजी अदालत की. पाकिस्तान में इन दिनों इस बात पर बहस हो रही है कि फ़ौजी अदालतों को एक और एक्सटेंशन दिया जाए या नहीं.
दिसंबर 2014 में पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए चरमपंथी हमले के बाद जनवरी 2015 में फ़ौजी अदालत बनाए गए थे. स्कूल पर हुए हमले में 132 स्कूली बच्चों समेत 140 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

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पाकिस्तानी संसद ने संविधान में संशोधन कर फ़ौजी अदालत बनाने का फ़ैसला किया था. उस समय इसका कार्यकाल दो साल था. फिर 2017 में इसे दो और साल के लिए बढ़ा दिया गया. अब मार्च 2019 में इसका कार्यकाल समाप्त होने वाला है. और इसी बात को लेकर बहस जारी है कि इसके कार्यकाल में और बढ़ोत्तरी की जाए या नहीं.
इमरान ख़ान की सरकार इसके कार्यकाल को बढ़ाने के लिए तैयार है लेकिन उनकी परेशानी ये है कि इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत है जो उनके पास नहीं है.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी इसके ख़िलाफ़ है. अख़बार के अनुसार पार्टी प्रमुख बिलावल भुट्टो की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसका फ़ैसला किया गया. अख़बार के अनुसार पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ गिलानी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान में दहशतगर्दी कम हो गई है इसलिए अब फ़ौजी अदालतों की कोई ज़रूरत नहीं है. गिलानी ने कहा कि पीपीपी फ़ौजी अदालतों को एक और एक्सटेंशन देने का विरोध करेगी.
अख़बार जंग के अनुसार इस मुद्दे पर पीपीपी में पूर्ण सहमति है लेकिन प्रमुख विपक्षी दल मुस्लिम लीग (नवाज़ ) में इसको लेकर राय बंटी हुई है. अख़बार के अनुसार मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता राना सनाउल्लाह ने कहा कि उनकी पार्टी पूरी कोशिश करेगी कि इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष एक मत हो जाए.
उधर पाकिस्तानी सेना ने सैन्य अदालतों के पक्ष में बयान दिया है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने इसकी पैरवी करते हुए कहा, "फ़ौजी अदालतें सेना की ख़्वाहिश नहीं बल्कि उस समय एक राष्ट्रीय ज़रूरत थीं. अगर संसद ने इसके पक्ष में फ़ैसला किया तो फ़ौजी अदालतें काम जारी रखेंगी."
सेना के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले चार सालों में सैन्य अदालतों के सामने कुल 717 मुक़दमे आए जिनमें से 646 मामलों का निपटारा कर दिया गया. इस दौरान 345 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई. प्रवक्ता के अनुसार सैन्य अदालतों ने चरमपंथियों और उनके समर्थकों के दिल में सरकार का डर पैदा कर दिया है.
अब बात अफ़ग़ान-तालिबान और अमरीका की.
अफ़ग़ान-तालिबान और अमरीका के बीच दूसरे दौर की बातचीत पाकिस्तान में होगी.
अख़बार जंग के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाल करने के लिए अमरीका के विशेष दूत ज़िल्मे ख़लीलज़ाद ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी से मुलाक़ात की.

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इस दौरान ख़लीलज़ाद ने कहा कि तालिबान न तो काबुल की सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं और न ही वो सीज़फ़ायर के लिए तैयार हैं. इस स्थिति में पाकिस्तान ने तालिबान को इस्लामाबाद आने की दावत दी जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है.
अख़बार जंग के अनुसार सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और क़तर भी इस बातचीत में शामिल होंगे.
लेकिन बातचीत के लिए अभी तारीख़ तय नहीं की जा सकी है.
पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने कहा है कि भारत अगर चाहे तो सीपेक (चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) में शामिल हो सकता है. अख़बार जंग के अनुसार इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त् मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने के लिए कई क़दम उठाए हैं.
उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान ने सीपेक में तीसरे देश को शामिल होने की दावत देने पर सहमति जता दी है. उन्होंने कहा कि सीपेक के कारण ये क्षेत्र 21वीं सदी में वैश्विक व्यापार का केंद्र बन जाएगा.
उधर इमरान ख़ान ने सीपेक के काम को तेज़ी से बढ़ाने के लिए सीपेक व्यापार सलाहकार परिषद बनाने का फ़ैसला किया है. अख़बार जंग के अनुसार इमरान ख़ान की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसका फ़ैसला लिया गया. पाकिस्तान के बड़े व्यापारिक समूह के प्रमुख इस परिषद के सदस्य होंगे.

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भारतीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी का एक बयान भी वहां के अख़बारों में प्रमुखता से छपा है.
अख़बार जंग के अनुसार नितिन गडकरी ने दावा किया है कि मोदी सरकार ने पाकिस्तान जाने वाला पानी रोक कर भारत के पांच राज्यों को फ़ायदा पहुंचाया है. अख़बार लिखता है कि गडकरी के अनुसार सतलज, ब्यास, और रावी नदी भारत को दिए गए थे लेकिन इन नदियों का पानी पाकिस्तान भी जा रहा था जिसे अब रोक दिया गया है. गडकरी के अनुसार भारत के पांच राज्य पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली को इसका लाभ हुआ है.
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