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पहली बार अमरीकी कांग्रेस पहुंचने वालीं ये दो मुस्लिम औरतें
अमरीका के मध्यावधि चुनाव में दो मुस्लिम महिलाओं ने पहली बार कांग्रेस में अपनी जगह बनाई है.
ये महिलाएं हैं डेमोक्रेटिक पार्टी की इल्हान उमर और राशिदा तालिब.
चुनाव जीतने के बाद इलहान उमर ने ट्विटर पर राशिदा को बधाई दी.
उन्होंने ट्वीट किया, ''मेरी बहन राशिदा, तुम्हें जीत की बधाई. मैं तुम्हारे साथ काम करने का इंतज़ार नहीं कर सकती. इंशाअल्लाह!''
इन दोनों मुस्लिम महिलाओं का अमरीकी संसद में जगह बनाना इसलिए भी अहम है, क्योंकि बीते कुछ वक्त में राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियां प्रवासियों और शरणार्थियों के हक़ में नहीं मानी जाती रही हैं.
इसकी झलक ट्रंप के मुस्लिम विरोधी बयानों में भी मिलती रही है. ऐसे में दो मुस्लिम महिलाओं का अमरीकी कांग्रेस में जगह बनाना काफ़ी महत्वपूर्ण है.
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए क़रीब 89 महिलाएं चुनी गई हैं. मौजूदा रिकॉर्ड 84 महिलाओं का था. अभी काफी सीटों पर नतीजे आने बाकी हैं.
आइए आपको बताते हैं इल्हान उमर और राशिदा की बारे में कुछ ख़ास बातें..
कौन हैं इल्हान उमर?
उमर इससे पहले मिनेसोटा की प्रतिनिधि सभा में चुनी जाने वाली पहली सोमालियाई अमरीकी मुस्लिम महिला का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुकी हैं.
उमर ने अगस्त में डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव कीथ एलिसन की जगह लेते हुए अपनी दावेदारी पक्की की थी.
उमर सभी के लिए मेडिकल सुविधाओं, आपराधिक न्यायिक मामलों में सुधार, न्यूनतम मज़दूरी के लिए किए कामों के लिए जानी जाती हैं.
मध्यावधि चुनाव में उमर ने रिपब्लिकन जेनिफर ज़ाइलिंस्की को शिकस्त देकर जीत हासिल की है.
टाइम मैगज़ीन के मुताबिक़, 12 साल की उम्र में बतौर शरणार्थी उमर अमरीका आई थीं. उमर ने एक इंटरव्यू में कहा था, ''मुझे बचपन से राजनीति में दिलचस्पी थी. मैं अपने दादा से काफ़ी प्रभावित थी. वो लोकतांत्रिक सरकारों के विचार को बेहद पसंद करते थे. मेरे लिए राजनीतिक सक्रियता जीत या हार तक नहीं है. मैं बदलाव पसंद करती हूं.''
अलजज़ीरा के मुताबिक़, उमर 14 बरस की उम्र में गृह युद्ध के वक़्त सोमालिया से अमरीका आईं थीं.
इल्हान की जीत की ख़बर के बाद उनके समर्थकों के बीच जश्न का माहौल है.
कौन हैं राशिदा तालिब?
राशिदा तालिब भी इल्हान उमर की तरह प्रवासी हैं. वो 42 साल की हैं.
राशिदा तालिब के पिता उन फ़लस्तीनियों में शामिल हैं, जो अमरीका आकर बसे थे.
तालिब ने मध्यावधि चुनाव के लिए अपनी दावेदारी तब पुख्ता कर ली थी, जब उन्होंने डेमोक्रेट ब्रेंडा जॉन्स को प्रारंभिक चुनावों में हरा दिया था.
तालिब ने पहली बार इतिहास साल 2008 में रचा था. जब उन्होंने मिशिगन लेजिसलेचर चुनाव जीता था. वो ऐसा करने वाली पहली मुस्लिम महिला थीं.
तालिब के अहम चुनावी मुद्दे न्यूनतम मज़दूरी को 15 डॉलर करना रहा है. वो समाजिक सुरक्षा और बेहतर मेडिकल सुविधाओं के हक़ में भी बातें करती रही हैं.
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