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मध्यावधि चुनावः बेहद कड़े मुक़ाबले में ट्रंप की साख़ दांव पर
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के लिए बेहद अहम माने जाने वाले मध्यावधि चुनावों में वोट डालने के लिए अमरीकी बड़ी तादाद में बाहर निकले हैं.
कांग्रेस की सभी 435 सीटों, सीनेट की 100 में से 35 सीटों और 50 में से 36 राज्यों के गवर्नर चुनने के लिए हो रहे इन चुनावों को राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल पर जनमत संग्रह भी माना जा रहा है.
ट्रंप सीधे तौर पर इन चुनावों में नहीं खड़े हैं लेकिन इन चुनावों का सबसे प्रमुख चेहरा वही हैंऔर यही वजह है कि अमरीका के हालिया इतिहास में ये सबसे अहम मध्यावधि चुनाव हो गए हैं.
चुनावों को लेकर लोगों में भी भारी उत्साह है. मतदान केंद्रों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी हैं.
एक मतदाता ने बताया, "मैंने कभी वोट डालने के लिए इतना इंतेज़ार नहीं किया. सिर्फ़ बैलट पेपर स्कैन करने की लाइन में ही आधा घंटा इंतेज़ार करना पड़ रहा है. मुझे याद नहीं कि मतदान के दौरान मुझे कभी लाइन में खड़ा होना पड़ा हो."
इन चुनावों का प्रचार अभियान भी बेहद तीखा रहा है. उम्मीदवारों ने एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए बड़े-बड़े विज्ञापन तक लगवाएं हैं.
सिर्फ़ उम्मीदवारों की क़िस्मत ही नहीं राष्ट्रपति ट्रंप की साख़ भी दांव पर लगी है.
लेकिन सबसे कड़ा मुक़ाबला अमरीकी संसद की प्रतिनिधि सभा यानी कांग्रेस में हैं जहां डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी से कमान हथियाना चाहती है.
कांग्रेस में डेमोक्रेट पार्टी की नेता नेंसी पलोसी का मानना है कि उन्हें अपनी पार्टी की जीत पर कोई शक़ नहीं है.
पलोसी ने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि हम ही जीतेंगे. सवाल अब बस जीत के अंतर का है. जब लोग मुझसे पूछते हैं कि ये लहर है या सूनामी तो मैं कहती हूं कि ये सब पानी की बूंदें हैं. "
ये चुनाव तय करेंगे कि क्या डेमोक्रेट पार्टी संसद के दोनों सदनों या एक सदन में अपना नियंत्रण स्थापित कर पाती है. और अगर ऐसा हुआ तो फिर राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ बहुत हद तक बंध जाएंगे
रिपब्लिकन पार्टी के रणनीतिकार रॉन बोनजीन ने बीबीसी से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने समर्थकों को मतदान स्थल तक लाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "वो रिपब्लिकन समर्थकों में उत्साह भरने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वो उन्हें मतदान स्थल तक लाना चाहते हैं. वो अपने सभी वादे पूरे कर रहे हैं और अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी चल रही है, लोग इन कामों से ख़ुश हैं, लेकिन लोग मतदान स्थल तक तब पहुंचते हैं जब वो किसी चीज़ को लेकर ग़ुस्से में हैं. और वो प्रवासी मुद्दे को लेकर ग़ुस्से में हैं-अवैध प्रवासियों को लेकर."
राष्ट्रपति ट्रंप ने ख़ुद कहा है कि ये चुनाव उनके कार्यकाल पर जनता का जनमत हैं. और अगर जनता ने राष्ट्रपति की पार्टी के ख़िलाफ़ जनमत दे दिया तो ये ट्रंप की न सिर्फ़ राजनीतिक हार होगी बल्कि एक बड़ी नैतिक हार भी होगी.
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