नज़रिया : 'पाकिस्तान को ज़बान नहीं डंडे का ज़ोर दिखाए भारत'

सुषमा स्वराज

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    • Author, प्रोफ़ेसर मुक्तदर ख़ान
    • पदनाम, डेलावेयर विश्वविद्यालय, अमरीका, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का पूरा भाषण मैंने सुना. उसमें चीन के बारे में एक भी शब्द नहीं था.

सुषमा स्वराज के भाषण के तीन हिस्से थे. पहले हिस्से में उन्होंने बताया कि हम भारत को किस तरह से महान बना रहे हैं. हमने ये योजनाएं लागू की हैं.

दूसरा हिस्सा उनका पाकिस्तान के बारे में था. ये कि पाकिस्तान 'टेररिस्ट स्टेट' है. उन्होंने बिन लादेन वगैरह का भी ज़िक्र किया.

तीसरे हिस्से में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि 'मल्टीलेटरिज़्म (बहुपक्षीय दुनिया) ' में किस तरह सुधार किया जाए.

लेकिन, इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो सबसे बड़ा मुद्दा है वो चीन की भूमिका है. भारत को धीरे-धीरे से घेरने के लिए चीन पाकिस्तान में एक बंदरगाह बना रहा है. श्रीलंका में एक बंदरगाह पर अब उसका अधिकार है. दुनिया की अर्थव्यवस्था और कूटनीति में चीन की जो भूमिका है उस पर भारत ने कुछ नहीं कहा.

उधर, अमरीका अपनी विदेश नीति के जरिए हर मंच को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. वो भारत समेत हर देश पर टैरिफ (कर) लगा रहा है. एच1बी वीज़ा से अमरीका ने भारत के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है.

सुषमा स्वराज और सर्गेई लावरोव

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इमेज कैप्शन, भारतीय विदेश मंत्री के साथ रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव. दोनों नेताओं के बीच 13 सितंबर को मॉस्को में मुलाक़ात हुई थी.

नज़रिया बड़ा करे भारत

इस सब चीजों को छोड़कर भारतीय विदेश मंत्री सिर्फ़ पाकिस्तान और घरेलू चुनाव वाली बातें कर रहीं थीं. मुझे लगा कि भारतीय विदेश मंत्री ने दुनिया के सामने ये जाहिर करने का मौका गंवा दिया कि भारत एक बड़ी शक्ति बन गया है. दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था है. वो परमाणु ताक़त है. उसकी बहुत इज्ज़त है.

सबसे अहम ये है कि अमरीका का लोकतंत्र कमज़ोर हो रहा है लेकिन भारत में लोकतंत्र मज़बूत है. बहुधर्मवाद मज़बूत है. सिविल सोसायटी मज़बूत हैं. प्रेस की आज़ादी मज़बूत है.

अगर आतंकवाद के बारे में बात करनी ही थी तो सीरिया के बारे में बात करते. इराक़ के बारे में बात करते. ये बताया जाना चाहिए था कि वैश्विक आतंकवाद के ख़िलाफ़ भारत क्या भूमिका अदा कर सकता है.

मुझे लगता है कि भारत को अपना नज़रिया बड़ा और वैश्विक बनाना चाहिए. ये महसूस करना चाहिए कि विश्व स्तर पर भारत एक बहुत अहम देश बन गया है.

सुषमा स्वराज

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पाकिस्तान को इतना महत्व क्यों?

पाकिस्तान को लेकर भारत रक्षात्मक सोच रखता है, उससे दो बातें होती हैं. एक तो भारत का जो क़द है वो कमज़ोर और छोटा हो जाता है. दूसरा वो पाकिस्तान का क़द बढ़ा देता है.

अब आप कल्पना करें कि दुनिया का एक अहम देश अपने भाषण के एक तिहाई हिस्से में पाकिस्तान के बारे में बात कर रहा है.

भारत की भूमिका दक्षिण एशिया में क्या है? आसपास के जो छोटे छोटे देश हैं वहां भारत ने कई विकास की परियोजनाएं चलाई हैं.

मिसाल के तौर पर अमरीका और यूरोप में अफ़ग़ानिस्तान का मुद्दा काफी बड़ा है. भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में काफी बड़ी भूमिका अदा की है.

लेकिन लगता है कि भारत की सरकार को ख़ुद पता नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत क्या-क्या कर रहा है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी

कश्मीर का ज़िक्र पाकिस्तान की मजबूरी

पाकिस्तान अपने घर पर लोगों को खुश करने के लिए कश्मीर का मुद्दा उठाता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे कोई महत्व नहीं मिलता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि काफी ख़राब हो गई है. वो इस छवि को भी सुधारने की कोशिश करते हैं.

मेरी नज़र में ये है कि भारत को पाकिस्तान के साथ और सख्ती से पेश आना चाहिए. मैं सेना की इस्तेमाल की बात नहीं कर रहा हूं. भारत अगर पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाकर और ताल्लुक़ कम करते हुए उससे एक पराए देश की तरह बर्ताव करेगा तो पाकिस्तान कमज़ोर होगा.

भारत बयानबाज़ी तो ज़्यादा करता है लेकिन पाकिस्तान के ख़िलाफ कार्रवाई कमजोर रहती है. भारत को ज़बान का इस्तेमाल कम करना चाहिए और अपनी छड़ी मजबूत करनी चाहिए.

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