यूएन महासभा में पाकिस्तान पर जमकर बरसीं सुषमा स्वराज

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भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र को संबोधित किया. अपने संबोधन की शुरुआत सुषमा स्वराज ने इंडोनेशिया में आए भूकंप में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देकर की.
सुषमा स्वराज पाकिस्तान पर जमकर बरसीं.
उन्होंने कहा, "भारत आतंकवाद का दंश दशकों से झेल रहा है. हमें पड़ोसी देश से ही आतंकवाद का सामना करना पड़ रहा है. पाकिस्तान न केवल आतंकवाद को बढ़ा रहा है बल्कि वो इसे करके नकारता भी है. वो ओसामा बिन लादेन को छुपाए रहा. सारा सच आ जाने के बाद भी उसके चेहरे पर न झेंप न सिकन. 9/11 का मास्टरमाइंड तो मारा गया, लेकिन 26/11 का मांस्टरमाइंड हाफ़िज सईद पाकिस्तान में चुनाव लड़ रहा है. भारत ने पाकिस्तान से कई बार बात करने की कोशिश की. मैंने ख़ुद इस्लामाबाद जाकर बातचीत की शुरुआत की लेकिन तत्काल ही पठानकोट में हमारे एयरबेस पर हमला कर दिया."

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विदेश मंत्री ने कहा, ''पाकिस्तान ने नए प्रधानमंत्री ने न्यूयॉर्क में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात की बात कही, लेकिन इसके ठीक बाद उन्होंने हमारे सुरक्षा बलों का सिर कलम कर दिया.''
भारतीय विदेश मंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा, ''हम उस बुराई से कैसे लड़ेंगे जिसकी संयुक्त राष्ट्र अब तक परिभाषा तय नहीं कर पाया है. पाकिस्तान आतंकियों को स्वतंत्रता सेनानी कहता है. जो हम पर हमला करता है पाकिस्तान में उसको बहादुर कहकर सम्मानित किया जाता है. संयुक्त राष्ट्र पहले आतंकवाद को पारिभाषित करे.''
सुषमा स्वराज ने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र की गरिमा और उपयोगिता वक़्त के साथ कम हो रही है. संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता है. आज सुरक्षा परिषद दूसरे विश्व युद्ध के पांच विजेताओं तक ही सीमित है. मेरी अपील है कि सुरक्षा परिषद में सुधार किया जाए. इसमें सुधार तत्काल किया जाना चाहिए.''
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सुषमा स्वराज ने भारत का पक्ष रखते हुए यूएन महासभा में कहा, ''भारत वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत में भरोसा करता है. हम पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं. संयुक्त राष्ट्र को भी परिवार की तर्ज पर चलाया जाना चाहिए. परिवार सुलह से चलता है कलह से नहीं. परिवार प्रेम से चलता है व्यापार से नहीं. परिवार मोह से चलता है लाभ से नहीं. भारत नहीं चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र के मंच से केवल कुछ देशों के हितों के लिए ही निर्णय लिए जाए. इस मंच को हमें वैसा बनाना चाहिए जो अविकसित देशों की पीड़ा को समझे.''
सुषमा स्वराज ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, ''जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती हैं. इससे सबसे ज़्यादा अविकसित और विकासशील देश जूझ रहे हैं. विकसित देशों को इस मामले में अविकसित और विकासशील देशों को मदद करनी चाहिए. भारत पर्यावरण को लेकर प्रतिबद्ध है.''
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उन्होंने कहा, ''वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र ने टिकाऊ विकास के लिए लक्ष्य रखा था. भारत 2030 के संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास के एजेंडे को लेकर प्रतिबद्ध है. भारत में वित्तीय समावेशी योजना के तहत जन धन योजना चलाई जा रही है. हम ग़रीबों को उनके बैंक खाते में सीधी मदद डाल रहे हैं.''
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सुषमा ने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की है जिसके तहत 50 करोड़ लोगों को बीमारी की अवस्था में 5 लाख रुपए तक की राशि दी जाएगी. इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई है. मुद्रा योजना के तहत 14 करोड़ 9 लाख लोगों को क़र्ज़ दिया गया है. पिछली बार मैंने इसी मंच से उज्ज्वला योजना का ज़िक्र किया था और आज भी यह योजना जारी है.''
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, ''2022 में भारत के आज़ाद हुए 75 साल हो जाएंगे. 2022 तक हमने स्वस्थ्य भारत, स्वच्छ भारत और संपन्न भारत का संकल्प लिया है.
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