पोलैंड में ‘फ़ोर्ट ट्रंप’ देगा पुतिन को चुनौती?

पोलैंड में अमरीका सेना

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पूर्वी यूरोप में अमरिकी सैनिकों की मौजूदगी बढ़ सकती है. पौलैंड के राष्ट्रपति आंद्रदेज़ दुदा ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से पोलैंड में एक सैन्य अड्डा स्थापित करने का आग्रह किया है.

इसके साथ ही पोलैंड इस परियोजना में दो अरब डॉलर निवेश करने के लिए भी तैयार है.

वॉशिंगटन में अमरीकी राष्ट्रपति से मुलाक़ात के बाद इस परियोजना के बारे में दुदा ने कहा कि हमने पहले से ही इसके लिए एक नाम तय कर लिया है - 'फ़ोर्ट ट्रंप'.

अभी से साफ़ नहीं है कि वाकई ये अड्डा स्थापित होगा या नहीं लेकिन अगर ऐसा हुआ तो नेटो और रूस के बीच एक और रेस शुरू हो सकती है. नेटो यूरोपीय देशों और अमरीका का एक सैन्य संगठन है जो सोवियत संघ के ज़माने वजूद में है.

इसके अलावा पोलैंड के ऑफ़र में एक विरोधाभास भी है क्योंकि नेटो में उसकी भागीदारी पर आवाज़ उठती रही है.

हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इससे पहले नेटो की सामूहिक रक्षा की प्रक्रिया में भागीदारी को लेकर यूरोपीय देशों की आलोचना कर चुके हैं. ट्रंप ने नेटो को पोलैंड से मिलने वाले योगदान और वित्तीय भागीदारी पर सवाल उठाते रहे हैं.

वीडियो कैप्शन, अमरीका और नेटो के सदस्य देशों में तनातनी

लेकिन पोलैंड के राष्ट्रपति के पास अपने तर्क हैं, ''रूस के सैन्य विस्तार को देखते हुए पोलैंड में अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ाना ज़रूरी हो जाता है. इस इलाक़े में अमरीकी सैनिकों की तैनाती पूरी तरह से जायज़ है. मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि युद्ध को रोकने का इससे कारगर उपाय कोई दूसरा नहीं हो सकता है."

इस मामले पर अमरीकी रक्षा सचिव जेम्स मैटिस ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा, "यह सिर्फ़ एक सैन्य बेस नहीं होगा, ये एक ट्रेनिंग का मैदान भी होगा. बेस पर किस तरह की सेवाएं होंगी, कैसी आधारभूत संरचना होगी, इसके अलावा बहुत सी ऐसी बातें हैं जिस पर अभी पोलैंड से बात होनी है."

ऐसे में सबसे अहम सवाल ये है कि क्या ये क़दम रूस की बढ़ती ताक़त और पुतिन के इरादों को सीधी चुनौती देगा?

संयुक्त राज्य अमेरिका के यूरोपीय दल

इस समय क़रीब 33 हज़ार अमरीकी सैनिक जर्मनी में स्थायी तौर पर हैं लेकिन आने वाले समय में इनकी संख्या को 1500 और बढ़ जाएगी.

इसके अलावा पूर्वी यूरोप में, चार बटालियन तैनात किए गए हैं. सेना की इन टुकड़ियों में फेरबदल होती रहती है. हर महीने इनकी तैनाती बदल जाती है.

पोलैंड में अमरीका सेना

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यूरोप में डीएबीएस (डिप्लॉयबल एयर बेस सिस्टम) का यह पहला टेस्ट है. बहुत से अभ्यासों के दौरान ये पाया गया कि रूस के सीमावर्ती देशों में परिवहन का बुनियादी ढांचा अभी ऐसा नहीं है कि इसे युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार माना जाए.

पोलैंड कई बार पहले भी अमरीका से अपने क्षेत्र में अमरीकी सेना को मजबूत करने के लिए आग्रह कर चुका है. पोलैंड के इस आग्रह का यूरोप में और अमरीका में अलग-अलग अर्थ लगाया जाएगा.

यूरोप में तैनात अमरीकी सैनिक लेफ़्टिनेंट जनरल बेन होगेस ने एक ऑनलाइन वेबसाइट को विस्तार में दिए इंटरव्यू में इस तरह के अड्डे स्थापित करने के विरोध में अपना विस्तृत मत रखा था.

रिटायर्ड जनरल के अनुसार, अगर पूर्वी यूरोप में इस तरह का सैन्य बेस बन जाता है तो रूसी राजनेता ये दावा करने लगेंगे कि इससे उनके देश की सुरक्षा को ख़तरा है और फिर वो सेना के फैलाव की मांग भी करेंगे.

अगर ऐसा हुआ तो तनाव घटने के बजाय और बढ़ जाएगा.

पोलैंड ने अमरीका को जो प्रस्ताव दिया है वो बहुत पहले से मीडिया के पास है. होगेस की दलील है कि अगर यूरोप में इतने बड़े पैमाने पर, स्थायी रूप से सैनिकों की तैनाती की जाती है तो इससे अमरीकी सशस्त्र सेना बल को भी बढ़ाने की ज़रूरत पड़ेगी.

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उनके अनुसार, सैनिकों की इस तरह की अदला-बदली अपने आप में एक बड़ी चुनौती है और ये चुनौती उस वक़्त से है जब से सैनिकों को वहां नियुक्त किया गया है.

कौन ज़्यादा ताक़तवर है?

रूस के सैन्य विशेषज्ञ पावेल फ़ेलगेवहॉर के मुताबिक़, अमरीकी सैनिकों की बढ़ोत्तरी के लिए पोलैंड हर संभव कोशिश कर रहा है.

पावेल के अनुसार पश्चिम में चार या पांच बटालियन हैं. लेकिन रूसी जनरल सेना के प्रमुख इस महीने कह चुके हैं कि वहां उनके पास 126 हैं जो हर वक़्त युद्ध के लिए तैयार हैं.

रूसी विशेषज्ञ के अनुसार अमरीका पोलैंड के ऑफ़र को स्वीकार कर सकता है लेकिन बारे में अंतिम फ़ैसला तो डोनल्ड ट्रंप को ही लेना है.

गोल्ट्ज़ के मुताबिक, हालांकि पोलैंड से कोई ख़तरा नहीं है लेकिन ऐसा करके पोलैंड सिर्फ़ अपनी ओर ध्यान खींचना चाहता है.

उन्होंने आगे कहा कि पोलैंड की ओर फ़िलहाल कोई ख़तरा नहीं है लेकिन ये तो साफ़ की वो नेटो, अमरीका और यूरोप का ध्यान पर अपनी ओर खींच रहा है. गोल्टज़ का ये भी कहना है कि अगर वाकई अमरीकी सैनिक पोलैंड आते हैं तो उनके रख-रखाव के लिए दो अरब डॉलर से कहीं अधिक धन ख़र्च होगा.

वैसे भी नेटो और रूस में सत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए सैनिकों की संख्या ही एकमात्र पैमाना नहीं है.

गोल्ट्ज़ कहते हैं,"रूसी फ़ेडरेशन में 126 बैटेलियन तैनात हैं. नेटो ने हाल ही में ब्रसेल्स में कहा था कि उनके 30 बैटेलियन तीस दिन में तैनात करने की क्षमता है. तो दोनों के संख्या बल में फ़र्क साफ़ है. "

रूसी विशेषज्ञों का कहना है कि रूस कभी भी पोलैंड पर हमला नहीं करेगा. ऐसे में पोलैंड को किसी अमरीकी अड्डे की ज़रूरत नहीं है.

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