छुरा भोंकने के आरोप पर अमरीका का तुर्की को जवाब

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लीरा की क़ीमतों में लगातार गिरावट के बाद व्हाइट हाउस ने कहा है कि वो तुर्की के आर्थिक हालात पर क़रीब से निगाह बनाए हुए है. हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इस बात से इनकार किया है कि तुर्की में आर्थिक संकट की वजह अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के फ़ैसले हैं.
अमरीका ने तुर्की से होने वाले एल्युमीनियम और स्टील उत्पादों के आयात पर शुल्क बढ़ा दिया है.
इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने अमरीका पर तुर्की की पीठ में छुरा भोंकने का आरोप लगाया था.
उन्होंने कहा, ''एक तरफ़ आप हमारे कूटनीतिक सहयोगी होने का दावा करते हैं, दूसरी तरफ़ आप हम पर हमला करने जा रहे हैं? यह अस्वीकार्य है. हम अफ़गानिस्तान, सोमालिया और नैटो में आपके साथ काम कर रहे हैं और अचानक एक सुबह आप हमारी पीठ में छुरा घोंप देते हैं. यह मंजूर नहीं होगा.''

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तुर्की की मुद्रा हुई कमजोर
व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट का कहना है कि तुर्की में अमरीकी एल्युमीनियम और स्टील सेक्टर बहुत छोटा है इसलिए वहां के आर्थिक संकट के लिए ट्रंप प्रशासन के फ़ैसले को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए.
बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता भी इससे इत्तेफ़ाक रखते हैं. उनका कहना है कि तुर्की अपने बाजारों पर काबू करने में बुरी तरह नाकाम रहा है.
हालांकि के तुर्की के केंद्रीय बैंक के कुछ फ़ैसलों से लीरा पर दबाव आंशिक रूप से कम हुआ है. वहीं, सरकार समर्थक कुछ कारोबारी उन लोगों को खरीदारी में छूट दे रहे हैं जिन्होंने लीरा को डॉलर, यूरो या सोने से बदला है.
पिछले हफ़्ते लीरा की गिरती क़ीमत से चिंतित अर्दोआन ने तुर्की के लोगों से लीरा के बदले विदेशी मुद्रा बदलने की भावुक अपील की थी.
तुर्की को जर्मनी का समर्थन
इस बीच जर्मनी भी तुर्की के समर्थन में उतर आया है. जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा कि तुर्की की अर्थव्यवस्था चरमराने से किसी को कोई फ़ायदा नहीं होगा.

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उन्होंने कहा, ''अगर यूरोपीय संघ के आस-पास स्थिर आर्थिक माहौल होता है तो हमें इसका फ़ायदा मिलता है इसलिए हम सबको ऐसा माहौल बनाने में मदद देनी चाहिए. जर्मनी तुर्की को आर्थिक रूप से समृद्ध देश के तौर पर देखना चाहेगा. इसमें हमारी भी भलाई है.''
अमरीका ने पिछले हफ़्ते तुर्की से आयातित स्टील और एल्युमिनियम उत्पादों पर लगने वाला कर बढ़ाकर दोगुना कर दिया था और इसके बाद तुर्की की मुद्रा लीरा में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई थी.
इसके बाद अर्दोआन ने कहा था कि अगर अमरीका अपने रुख़ में तब्दीली नहीं लाता है तो तुर्की अपने लिए नए दोस्त और सहयोगी तलाशेगा.

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अमरीका और तुर्की के बीछ बढ़ते तनाव की वजह एंड्र्यू ब्रुसन नाम के एक पादरी को भी बताया जा रहा है.
तुर्की ने उन्हें साल 2016 के नाकाम तख़्तापलट के साज़िशकर्ताओं से संपर्क होने के आरोप में उन्हें हिरासत में लिया था. अमरीका उनकी रिहाई की मांग कर रहा है.
हालांकि ब्रुसन अमरीका और तुर्की के बीच बढ़ते तनाव की इकलौती वजह नहीं हैं. इसके पीछे सीरिया के लिए तुर्की की नीतियां और रूस से बढ़ती नज़दीकियां भी शामिल हैं.
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