You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
भारत में मॉब लिंचिंग को इस तरह देख रहा है विदेशी मीडिया
- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली
उन्मादी भीड़ के जान लेने की एक घटना पर चर्चा शांत नहीं होती कि कोई दूसरी हत्या की ख़बर अख़बारों पर छा जाती है.
लगातार हुईं मॉब लिंचिंग की ये घटनाएँ अब सिर्फ़ भारतीय मीडिया में ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया में भी जगह बना रही हैं.
हाल ही में अलवर में हुई रक़बर की हत्या संसद में बहस का हिस्सा बनी.
आरोप है कि अलवर ज़िले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में शुक्रवार रात कथित गोरक्षकों ने रकबर की बुरी तरह पिटाई की थी, जिसके बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
ये बात भी सामने आई है कि रक़बर को अस्पताल ले जाने में पुलिस ने कोताही बरती. पुलिस कोई तीन घंटे बाद रक़बर को पास के सरकारी अस्पताल ले गई, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
इस घटना का और ऐसी ही अन्य घटनाओं का शोर विदेशी मीडिया तक भी पहुँचने लगा है.
अलग-अलग देशों के अख़बारों और वेबसाइट पर इन्हें प्रमुखता से छापा जा रहा है.
'अल जज़ीरा' ने 'भारत: गाय के चलते हुई हत्या के कारण गाँव में मातम' शीर्षक के साथ अलवर की घटना को प्रकाशित किया है.
इसमें घटनाक्रम का ज़िक्र करते हुए बताया गया है कि तथाकथित गोरक्षकों ने शनिवार को पश्चिमी राजस्थान के लालावंडी गाँव में 28 साल के एक मुस्लिम शख़्स की हत्या कर दी.
उनके घरवालों ने तब तक रक़बर के शव को दफ़नाने से इनकार कर दिया जब तक कि सरकार की तरफ से उचित कार्रवाई का आश्वासन नहीं मिल जाता.
ख़बर में ये भी लिखा गया है कि उत्तर भारत में गोरक्षक गाय को बचाने के लिए अक्सर घूमते रहते हैं जिसके कारण भारत में मुस्लिमों पर कई हमले हुए हैं. ये मुस्लिम विरोधी हिंसक अपराधों का पहला मामला नहीं है.
इसी ख़बर को मलेशिया की न्यूज़ वेबसाइट 'द सन डेली' ने 'गाय ले जा रहे भारतीय मुस्लिम की भीड़ के हमले में हत्या' शीर्षक के साथ प्रकाशित किया है.
विदेशी मीडिया ने इस घटना में पुलिस की लापरवाही को भी ख़बर बनाया है.
'द गार्जियन' ने इससे जुड़ी ख़बर को शीर्षक दिया है, 'भीड़ के हमले में घायल शख़्स की मदद से पहले भारतीय पुलिस ने चाय पी'.
इसमें बताया गया है कि उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी गई है जो पीड़ित को अस्पताल ले जाने से पहले चाय पीने लगे थे.
रक़बर की गोरक्षकों के हमले में बुरी तरह घायल होने से मौत हो गई थी. भारत में गाय की रक्षा के लिए गौरक्षकों का दल अक्सर हाइवे पर घूमता रहता है.
इसी ख़बर को 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' ने भी जगह दी है. उन्होंने लिखा है कि पीड़ित को अस्पताल ले जाने की बजाय चाय पीने पर भारतीय पुलिस के ख़िलाफ़ जाँच.
विदेशी मीडिया में सिर्फ़ अलवर की घटना नहीं, बल्कि पहले की मॉब लिचिंग की घटनाओं को भी कवर किया जाता रहा है.
यहाँ तक कि 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के अलीमुद्दीन अंसारी की हत्या के अभियुक्तों को माला पहनाने की ख़बर भी दी है.
आरोप है कि अलीमुद्दीन अंसारी को भीड़ ने गो-तस्करी के शक़ में पीट-पीटकर मार दिया था.
इस ख़बर का शीर्षक दिया गया है, 'नफ़रत के नशे में भारतीय नेता ने जान लेने वाली भीड़ का सम्मान किया'.
इसमें जयंत सिन्हा के राजनीति में आने से पहले से लेकर अब तक के बदलावों को बताया गया है.
जैसे कि जयंत सिन्हा हार्वर्ड से ग्रेजुएट हैं. उन्होंने मैकिन्ज़ी के साथ काम किया है. वे भारत में पले-बढ़े हैं लेकिन अमरीका में काम किया है. उन्होंने बॉस्टन इलाक़े में पैसा और सफलता पाई है. उनके अमरीकी दोस्त उन्हें उदार और प्रगतिशील नेता बताते हैं.
लेकिन फिर वो भारत आए. उन्होंने कोट-पैंट की जगह कुर्ता पहनना शुरू कर दिया और एक हिंदू दक्षिणपंथी संगठन से जुड़ गए.
अभी इसी महीने उन्होंने मॉब लिंचिंग के अभियुक्तों को माला पहनाकर सम्मानित किया.
इसके अलावा 'द सन' में असम में भीड़ के पीटने से हुई दो युवकों की हत्या को भी जगह दी गई है.
इसके लिए उन्होंने शीर्षक दिया है 'व्हाट्सऐप मैसेज में ग़लत अफ़वाह के कारण दो युवकों की हत्या'.
इसमें असम के कार्बी-आंग्लोंग ज़िले की उस घटना का ज़िक्र किया गया है जिसमें दो युवकों अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास को बच्चा चोरी के शक़ में पीट-पीट कर मार दिया गया था. जबकि दोनों युवक इलाक़े में घूमने के लिए आए थे.
लेकिन, एक ग़लत अफ़वाह के कारण उनकी जान ले ली गई.
वहीं कई न्यूज़ वेबसाइट्स ने लिंचिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए व्हाट्सऐप के नए नियमों से जुड़ी ख़बर भी दी है.
ये भी पढ़ें:
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)