ईरान पर प्रतिबंधों में ढील के पक्ष में नहीं अमरीका

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अमरीका ने यूरोपीय संघ की उच्च स्तरीय अपील को ख़ारिज कर दिया है जिसमें उसने ईरान के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंधों से यूरोपीय कंपनियों को अलग रखने की मांग की थी.

यूरोपीय देशों को लिखे गए एक पत्र में अमरीकी गृह मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि अमरीका अपील इसलिए ख़ारिज कर रहा है क्योंकि वो ईरान पर ज़्यादा से ज़्यादा दवाब डालना चाहता है.

पत्र में यह छूट अमरीका को फ़ायदा पहुंचाने की शर्त पर ही दी जाने की बात कही गई है.

यूरोपीय संघ को इस बात का डर है कि वॉशिंगटन के लगाए नए प्रतिबंधों से अरबों डॉलर का व्यापार ख़तरे में पड़ सकता है.

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अमरीका का नीति में बदलाव से इंकार

अमरीकी वित्त मंत्री स्टीव मनुशिन ने एनबीसी न्यूज से कहा, "हम ईरान पर अभूतपूर्व वित्तीय दवाब डालना चाहते हैं."

यूरोपीय देशों को भेजे गए पत्र में स्टीव मनुशिन ने भी हस्ताक्षर किए हैं. पत्र में कहा गया है कि अमरीका "विशेष परिस्थियों को छोड़कर अपनी नीति में अपवाद नहीं रखना चाहता है."

अमरीका का कहना है कि वो इस स्थिति में नहीं है कि वो अपनी नीति में बदलाव करे.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मई के महीने में ईरान से परमाणु समझौता तोड़ दिया था. इसके बाद उन्होंने ईरान पर सख़्त प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी.

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व्यापार

तीन साल पहले 2015 में परमाणु समझौता होने के बाद कुछ यूरोपीय कंपनियों ने ईरान से अपने व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे.

साल 2017 में यूरोपीय संघ ने ईरान को कुल 10.8 बिलियन यूरो की वस्तु और सेवाएं निर्यात की थीं, जबकि आयात क़रीब 10.1 बिलियन यूरो का था.

अब यूरोपीय कंपनियां इस बात से चिंतित हैं कि अगर वो ईरान से व्यापार जारी रखेंगी तो अमरीका से होने वाला उनका व्यापार प्रभावित होगा.

इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें कहा गया था कि कंपनियां ईरान से अपने व्यापार जारी रख सकेंगी.

छह अगस्त को पहला प्रतिबंध लागू होगा, इससे पहले यूरोपीय संघ को इसमें बदलाव करने होंगे.

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