म्यांमार: 'सेना के अफ़सरों ने किया रोहिंग्या मुसलमानों का क़त्ल और बलात्कार'

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एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के लिए म्यांमार की सेना के आला अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए.
मानवाधिकारों पर काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने म्यांमार में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों के विद्रोह को दबाने की बर्बर कोशिश और मानवता के ख़िलाफ़ सेना के गुनाहों के सबूत जारी किए हैं.
एमनेस्टी का कहना है कि सेना के जवानों ने सुनियोजित अभियान के तहत रोहिंग्या समुदाय के गांवों को निशाना बनाया और बलात्कार किए, लोगों को प्रताड़ित किया और हत्याएं कीं.
म्यांमार सेना ने लगातार कहा है कि उन्होंने जो किया वो विद्रोहियों के हमले का जवाब था, लेकिन एमनेस्टी की इस रिपोर्ट के अनुसार सेना ने इसके लिए पहले से ही तैयारी की थी.
इस रिपोर्ट के संबंध में म्यांमार सेना की तरफ़ से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उन्होंने नस्लीय हिंसा और ताक़त के अत्यधिक इस्तेमाल से इनकार किया है.

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म्यांमार में क्या हुआ?
बीते साल अगस्त को अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी यानी एआरएसए ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में पुलिस ठिकानों पर हमले किए थे.
इसके बाद से म्यांमार की सेना ने ये कहते हुए रोहिंग्या समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया कि वो विद्रोहियों को निशाना बना रहे हैं. सेना की जवाबी कार्रवाई के कारण रखाइन प्रांत से हज़ारों रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन हुआ और कई गांवों को जला दिया गया.
अब तक सात लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमान अपना देश छोड़कर बांग्लादेश का रुख़ कर चुके हैं जहां वो शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं.
बीते साल दिसंबर में डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (एमएसएफ़) ने बांग्लादेश पहुंचे शरणार्थियों के साथ एक सर्वे किया था जिसमें पाया गया कि 25 अगस्त से 24 सितम्बर के बीच कुल मिलाकर कम से कम 9,000 रोहिंग्या लोगों की मौत हुई थी.

कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान?
म्यांमार की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है. म्यांमार में एक अनुमान के मुताबिक़ यहां 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं जो यहां की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है.
म्यांमार की सरकार इन्हें अवैध बांग्लादेशी प्रवासी मानाती है और इस कारण इन्हें नागरिकता देने से इनकार करती रही है. हालांकि ये म्यामांर में पीढ़ियों से रह रहे हैं, लेकिन यहां की अधिकतर आबादी इन्हें कम ही पसंद करती है.
क्या कहना है एमनेस्टी का?
'वी विल डिस्ट्रॉय एवरीथिंग' नाम की एमनेस्टी की रिपोर्ट में कहा गया है कि, "रोहिंग्या समुदाय के ख़िलाफ़ नस्लीय हिंसा के लिए सुनियोजित अभियान चलाया गया जिसमें म्यांमार की सेना ने क़ानून के दायरे से बाहर जाकर हज़ारों रोहिंग्या लोगों की हत्या की जिसमें बच्चे भी शामिल थे."
एमनेस्टी के अनुसार सेना पर यौन हिंसा और लोगों को घर छोड़ने पर मजबूर करने के साथ-साथ बाज़ार और खेत जलाने के भी आरोप हैं जिसके कारण पूरे के पूरे गांव को पलायन करना पड़ा.
इस रिपोर्ट के अनुसार, "अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ये मानवता के ख़िलाफ़ किए गए अपराध की क्षेणी में आते हैं क्योंकि बड़ पैमाने पर सुनियोजित तरीके से रोहिंग्या जनसंख्या के ख़िलाफ़ हमले किए गए."

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एनमेस्टी की लिस्ट में सेनाप्रमुख मिन ओंग लाइंग और रखाइन के पूर्वी कमान के पूर्व प्रमुख मांग मांग खो के नाम शामिल हैं. मांग मांग खो को इसी सप्ताह सेना से बर्ख़ास्त कर दिया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार इनके अलावा कई आला अधिकारियों और सैनिकों ने भी कुछ घटनाओं को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई थी.
एमनेस्टी की ये रिपोर्ट म्यांमार और बांग्लादेश में किए गए 400 साक्षात्कारों पर आधारित है. साथ ही इसके लिए सैटलाइट से मिली तस्वीरें, फोरेंसिक जांच से मिले सबूत और सेना के गोपनीय दस्तावेज़ों का भी अध्ययन किया गया है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल की पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.


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किन-किन पर लगे हैं आरोप?
एमनेस्टी ने इसमें 13 आला अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनके ख़िलाफ़ हेग के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में मुकदमा चलाया जाना चाहिए.
क्या ये माममा कोर्ट में जाएगा?
म्यांमार ने अब तक इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की संधि को मंज़ूर नहीं किया है और इसीलिए उसके लिए कोर्ट के साथ सहयोग करना बाध्यकारी नहीं है.

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इस मामले में मुकदमा बनाने से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच सदस्यों की मंज़ूरी आवश्यक है और चीन के रुख़ को लेकर मामला फंस सकता है. चीन ने हाल में इस संकट से निपटने के म्यांमार के तरीके के लिए वहां की सरकार का समर्थन किया था.
इस कारण इस बात की संभावना बेहद कम है कि सेना के आला अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुकदमा चले.
म्यांमार में सैन्य नेतृत्व के ख़त्म होने के कई सालों बाद संविधान बना था जिसके अनुसार देश की संसद में अब भी एक चौथाई सीटों पर सेना से जुड़े लोग हैं. अन्य देशों से अलग यहां सेना पर सरकार का नियंत्रण नहीं है.

मामले में म्यांमार का रुख़ क्या है?
एमनेस्टी की रिपोर्ट के बारे में अब तक म्यांमार ने कुछ नहीं कहा है, लेकिन बीते कुछ वक़्त की तरह उसका कहना है कि आंतक के ख़तरे के तहत सेना ने जवाबी कार्रवाई की थी जो सही है.
सेना का कहना है कि अगर कहीं कोई अपराध हुआ है तो उसके लिए जांच होगी, लेकिन ये आंतरिक जांच होगी.
नवंबर 2017 में हुई एक जांच में म्यांमार की सेना ने ख़ुद पर लगे सभी आरोपों से इनकार कर दिया था. हालांकि मामले से जुड़े कई सैनिकों और अधिकारियों को सेना से बर्ख़ास्त किया गया है और सज़ा सुनाई गई है.
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