महिलाओं के लिए भारत सबसे ख़तरनाक देश: पोल

महिलाएं, यौन हिंसा, भारत

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भारत महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश है. ये बात मंगलवार को जारी ग्लोबल एक्सपोर्ट के एक पोल में बताई गई है. इस पोल के नतीज़ों से यह बात सामने आई है कि यौन हिंसा और महिलाओं को नौकरानी बनाने में भारत सबसे आगे है.

यह पोल थॉमसन-रॉयटर्स फ़ाउंडेशन की तरफ़ से महिला मुद्दों पर काम करने वालीं 550 महिला विशेषज्ञों के साथ किया गया है.

पोल में पाया गया कि भारत महिला सुरक्षा के मामले में युद्धग्रस्त अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया से भी पीछे है. महिलाओं के लिए सबसे ख़तरनाक देश भारत है और उसके बाद अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया है. इसके बाद सोमालिया और सऊदी अरब का नंबर है.

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भारत के राष्ट्रीय महिला आयोग ने सर्वे के दावों को ख़ारिज कर दिया है.

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि इस सर्वे में बहुत कम लोगों की हिस्सेदारी थी इसलिए यह भारत के हालात का सही आकलन नहीं कर सकता है.

उन्होंने कहा, "भारतीय महिलाएं बहुत जागरूक हैं. ये हो ही नहीं सकता कि महिलाओं के लिए सबसे ख़तरनाक देशों में हम पहले नंबर पर हों. जिन देशों में महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर बोलने तक का हक़ नहीं हैं, उन्हें भारत के बाद रखा गया है."

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक भारत के महिला और बाल विकास मंत्रालय ने पोल के नतीजों पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार किया है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रिपोर्ट शेयर करते हुए ट्वीट किया, "हमारे प्रधानमंत्री योग का वीडियो बनाने में व्यस्त हैं और दूसरी तरफ महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा और बलात्कार के मामलों में भारत की स्थिति अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया और सऊदी अरब से भी ज़्यादा ख़राब हो गई है. यह हमारे देश के लिए कितनी शर्म की बात है!"

ट्वीट

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पश्चिमी देशों में टॉप-10 में सिर्फ़ अमरीका रहा. महिलाओं के लिए ख़तरनाक देशों की लिस्ट में अमरीका 10वें नंबर पर रहा. पाकिस्तान इस लिस्ट में नौवें नंबर पर है.

साल 2011 में भी थॉमसन-रॉयटर्स फ़ाउंडेशन ने ऐसा ही पोल कराया था. उस पोल के नतीजों में अफ़गानिस्तान, कॉन्गो, पाकिस्तान, भारत और सोमालिया को महिलाओँ के लिए सबसे ख़तरनाक देश बताया गया था. लेकिन 2011 की लिस्ट में भारत पहले नंबर पर नहीं था.

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में महिलाओं के लिए हालात बदतर होना ये दिखाता है कि उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त कोशिशें नहीं की गई हैं.

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निर्भया गैंगरेप के बाद एकबार ऐसा लगा था कि भारत में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दे को देश में प्राथमिकता के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन पोल के नतीजों में इसका उलटा ही नज़र आता है.

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सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि 2007 और साल 2016 के बीच महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के मामलों में 83% की बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान हर चार घंटे में एक महिला बलात्कार का शिकार हो रही थी.

महिलाओं की तस्करी के मामलों में भारत, लीबिया और म्यांमार का नाम सबसे ऊपर आया.

बरसों से युद्ध की त्रासदी झेल रहे अफ़गानिस्तान, सोमालिया और सीरिया महिलाओं के लिए खराब स्वास्थ सेवाओं और युद्ध से सम्बन्धित हिंसा में सबसे ऊपर रहे.

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विशेषज्ञों का कहना है कि पांचवें नंबर पर रहे सऊदी अरब में हाल के दिनों में कुछ सुधार ज़रूर हुआ है, लेकिन ये नाकाफ़ी है.

वहीं, अमरीका का नाम पहले 10 देशों में आने के पीछे #MeToo मुहिम एक बड़ी वजह बताई जा रही है.

इस सर्वे के सवालों का जवाब देने वालों में सहायता कर्मी, स्वास्थ्य कर्मचारी, शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ, एनजीओ में काम करने वाले, पॉलिसी मेकर्स और सामाजिक मुद्दों के जानकार शामिल थे.

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