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चीन ने दक्षिण चीन सागर में फिर तैनात की मिसाइलें
चीन ने पिछले हफ़्ते विवादित दक्षिण चीन सागर में तैनात अपनी जो मिसाइलें हटा ली थीं उन्हें एक बार फिर से वहीं तैनात कर दी हैं.
मिसाइलों की फिर से तैनाती की बात सैटलाइट इमेज के ज़रिए सामने आई है.
इसराइल में मौजूद सरकार और सेनाओं को सैटलाइट इमेज देने वाली एजेंसी इमेजसैट इंटरनेशनल (आईएसआई) ने कहा है कि ये तस्वीरें शुक्रवार को ली गई थीं. एजेंसी ने तस्वीरों के आधार पर कहा है कि चीनी मिसाइलें वूडी द्वीप पर उसी जगह पर फिर से तैनात कर दी गई हैं जहां से वो सप्ताह भर पहले हटाई गई थीं.
विवादित दक्षिण चीन सागर को लेकर अमरीका और चीन पहले ही आमने-सामने हैं. ऐसे में चीन के इस क़दम को दोनों देशों में बढ़ते तनाव के तौर पर देखा जा रहा है.
इमेजसैट इंटरनेशनल दो इसराइली सैटलाइट ईआरओएस बी और सी से मिले डेटा का विश्लेषण करती है.
ये मिसाइलें ज़मीन से हवा में मार करने वाली हैं. एक सप्ताह पहले इन्हें वूडी द्वीप में ही तैनात किया गया था. चीन में इस द्वीप को योंगशिंग द्वीप कहा जाता है.
आईएसआई ने तीन जून को कई सैटलाइट तस्वीरें जारी की थीं और इन्हीं तस्वीरों के आधार पर मिसाइल तैनाती की बात कही जा रही थी.
सुरक्षा संबंधी ख़ुफ़िया ख़बरों पर नज़र रखने वाली संस्था इंटेलीप्लस के अनुसार ये मिसाइल HQ-9 हैं जिन्हें शायद कुछ वक्त के लिए गराज में रख दिया गया होगा.
सिंगापुर में क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन में अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने दक्षिण चीन सागर में चीनी सैन्य मौजूदगी को लेकर कहा था कि दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर पड़ोसी देशों को डरा रहा है.
इसके उत्तर में चीन के लेफ़्टिनेंट जनरल ही ली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि चीन को पूरा हक़ है कि वो अपने इलाक़े में कहीं भी फौज और हथियार तैनात कर सकता है.
पिछले हफ़्ते अमरीका ने परमाणु हथियारों से लैस दो लड़ाकू विमान विवादित द्वीप के ऊपर से उड़ाए थे, जिसके बाद तनाव कम करने के लिए चीन ने अपनी मिसाइलें वहां से हटा ली थीं.
द सिडनी हेराल्ड में इस तरह की ख़बरें आई थीं कि अमरीका ताइवान जलडमरू मध्य में भी युद्धपोत भेजने पर विचार कर रहा है और इसके साथ ही दक्षिण चीन सागर में गश्ती के लिए नेवी का इस्तेमाल कर सकता है.
अमरीका ये भी कोशिश कर रहा है कि वो अपने सहयोगी फ़्रांस और ब्रिटेन के साथ दक्षिण चीन सागर में एकजुटता का प्रदर्शन करे. यहां तक कि इस इलाक़े में सैन्य मौजूदगी को लेकर भी बात हो रही है ताकि चीन से मुक़ाबला किया जा सके.
आईएसआई का कहना है कि चीन ने अस्थायी तौर पर मिसाइलें हटाई थीं.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी एक ख़बर के अनुसार चीन के विशेषज्ञों का ये मानना है कि मिसाइलें तनाव को कम करने के लिए अस्थायी तौर पर हटाई गई थीं.
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