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दक्षिण चीन में मिसाइलें तैनात कर डरा रहा है चीन : अमरीका
अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्स मेटिस ने कहा है कि चीन दक्षिण चीन सागर में मिसाइलें तैनात करके पड़ोसी देशों को धमका रहा है.
सिंगापुर में मेटिस ने कहा कि चीन के क़दम उसके व्यापक लक्ष्यों को सवालों के घेरे में खड़ा करते हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि सिंगापुर में राष्ट्रपति ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच होने वाली बातचीत में दक्षिण कोरिया में अमरीकी सैनिकों की मौजूदगी का मुद्दा शामिल नहीं होगा.
उन्होंने ये भी कहा कि अमरीका कोरियाई प्रायद्वीप को पूर्ण रूप से परमाणु मुक्त करना चाहता है.
दक्षिण कोरिया के रक्षामंत्री सोंग यंग मू ने भी शांगरी-ला डॉयलाग सिक्योरिटी समिट ने भी कहा कि दक्षिण कोरिया में अमरीकी सैनिकों की मौजूदगी उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों से अलग मुद्दा है.
इस समय 28,500 अमरीकी सैनिक दक्षिण कोरिया में तैनात हैं.
सुरक्षा सम्मेलन में मेटिस ने कहा चीन ने दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में जहाज-रोधी मिसाइलें, सतह से आसमान में मार करने वाली मिसाइलें और इलेक्ट्रॉनिक जैमर तैनात कर रखे हैं.
जनरल मैटिस ने कहा, "चीन भले ही इसके ठीक उलट दावे करता है लेकिन इन हथियारों की तैनाती सीधे तौर पर सैन्य इस्तेमाल से जुड़ी है जिसका उद्देश्य धमकाना और डराना है."
रचनात्मक संबंध
जनरल मैटिस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन चीन के साथ रचनात्मक संबंध चाहता है लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो पूरी ताक़त के साथ प्रतिस्पर्धा भी करेगा.
उन्होंने कहा कि अमरीका इस क्षेत्र में चीन की भूमिका को स्वीकार करता है.
अहम समुद्री व्यापार मार्ग दक्षिण चीन सागर पर छह देश दावा ठोकते हैं.
चीन इस क्षेत्र में कृत्रिम द्वीप और सैन्य ठिकाने और नौसैनिक ठिकानों विकसित कर रहा है.
पिछले महीने ही चीन ने बताया था कि उसने अपने लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों को वूडी आइलैंड पर उतारा है.
अमरीका ने इसे क्षेत्र को अस्थिर करने वाला क़दम बताया था.
वूडी द्वीप जिसे चीन यांगशिंग कहता है पर वियतनाम और ताइवान दोनों दावा ठोकते हैं.
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