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ट्रंप के वकील ने कहा, सम्मेलन के लिए 'गिड़गिड़ाए' थे किम जोंग-उन
डोनल्ड ट्रंप के वकील रूडी जूलियानी ने कहा है कि जब अमरीकी राष्ट्रपति ने उत्तर कोरिया के साथ प्रस्तावित मुलाकात रद्द कर दी थी तो किम जोंग-उन इसे फिर से करवाने के लिए 'गिड़गिड़ाए' थे.
इसराइल में एक कॉन्फ्रेंस में जूलियानी ने कहा कि ट्रंप की सख़्ती के कारण ही उत्तर कोरिया अपना रुख़ बदलने पर मजबूर हुआ है.
ट्रंप ने मई में उत्तर कोरिया पर 'बहुत ज़्यादा क्रोध और नफ़रत' का आरोप लगाते हुए इस सम्मेलन से पीछे हटने का एलान किया था.
मगर सिंगापुर में 12 जून को प्रस्तावित इस द्विपक्षीय वार्ता की तैयारियां उत्तर कोरिया की मैत्रीपूर्ण प्रतिक्रिया के बाद पटरी पर लौट आई थीं.
क्या कहा जूलियानी ने
जूलियानी ने इसराइल में इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की.
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस बारे में सबसे पहले रिपोर्ट दी कि जूलियानी ने कहा, "किम जोंग-उन घुटनों के बल आ गए और वह इसके लिए 'गिड़गिड़ाए.' ठीक उसी स्थिति में, जिस स्थिति में आप उन्हें देखना चाहेंगे."
जूलियानी राष्ट्रपति ट्रंप के वकील हैं और वह अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के कथित हस्तक्षेप की जांच के मामले को देख रहे हैं.
उत्तर कोरिया की तरफ़ से जूलियानी की इस टिप्पणी पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
किम जोंग-उन के साथ सम्मेलन के संबंध में मंगलवार को डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि योजनाएं 'अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं.'
अब तक क्या-क्या हुआ:
- 10 मई: ट्रंप ने कहा कि वह 12 जून को सिंगापुर में किम से मिलेंगे
- 12 मई: उत्तर कोरिया ने एलान किया कि वह अपना परमाणु परीक्षण स्थल नष्ट करेगा
- 16 मई: अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकर जॉन बॉल्टन ने 'लीबियाई मॉडल' का जिक्र किया और नाराज़ उत्तर कोरिया ने सम्मेलन से पीछे हटने की धमकी दी
- 18 मई: ट्रंप ने बॉल्टन के बयान से दूरी बनाई और कहा कि परमाणु निशस्त्रीकरण के लिए अमरीका लीबिया जैसे मॉडल पर ज़ोर नहीं दे रहा है
- 22 मई: ट्रंप ने कहा कि अगर उत्तर कोरिया कुछ शर्तों पर राज़ी नहीं हुआ तो यह मीटिंग नहीं होगी
- 24 मई: ट्रंप ने सम्मेलन रद्द कर दिया और इसके लिए उत्तर कोरिया को ज़िम्मेदार बताया
- 1 जून: ट्रंप ने एलान किया कि उत्तर कोरिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि जरनल किम योंग-चोल से बातचीत के बाद सिंगापुर में प्रस्तावित सम्मेलन पटरी पर लौट आया है
दूसरा 'भड़काऊ' बयान
इससे पहले मई में इस सम्मेलन के होने की संभावनाएं उस समय लगभग ख़त्म सी हो गई थीं, जब अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने उत्तर कोरिया की परिस्थितियों की तुलना लीबिया के साथ की थी.
बॉल्टन ने कहा था कि प्योंगयांग का निशस्त्रीकरण 'लीबिया मॉडल' पर हो सकता है. इससे उत्तर कोरिया चिंतित हो उठा क्योंकि कर्नल गद्दाफी की पश्चिम समर्थित विद्रोहियों द्वारा हत्या के बाद ही लीबिया का परमाणु कार्यक्रम ख़त्म हो पाया था.
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री ने बॉल्टन के बयान पर नाराज़गी भरा बयान जारी किया था. बाद में ट्रंप ने अपने सलाहकार की टिप्पणी से दूरी बना ली थी.
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