उर्दू प्रेस रिव्यूः मोदी और नेतन्याहू की जोशीली झप्पी पाकिस्तान के लिए ख़तरे की घंटी क्यों?

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भारत-पाक नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर फ़ायरिंग की ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्खियों में रहीं.
इसके अलावा इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के भारत दौरे से जुड़ी ख़बरों को भी अख़बारों में जगह मिली.
सबसे पहले बात भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर पिछले कुछ दिनों से हो रही गोलेबारी की.

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सीमा पर गोलीबारी
अख़बार 'दुनिया' ने सुर्ख़ी लगाई है, "सियालकोट वर्किंग बाउंड्री (अंतरराष्ट्रीय सीमा) पर तीसरे दिन भी फ़ायरिंग, गोलाबारी, चार नागरिकों की मौत."
अख़बार लिखता है कि सियालकोट सीमा पर भारतीय हमला लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा. विरोध के बावजूद दुश्मन बाज़ नहीं आया, फ़ायरिंग और गोलाबारी से चार नागरिक मारे गए हैं और 22 लोग घायल हुए हैं.
अख़बार के अनुसार भारतीय गोलाबारी के कारण कई पशु भी मारे गए हैं, सीमा से सटे स्कूल बंद कर दिए गए हैं और पास के 140 गांवों को ख़ाली करने के आदेश दे दिए गए हैं.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के हवाले से अख़बार लिखता है कि भारत ने साल 2018 के 19 दिनों में अब तक एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 125 से ज़्यादा बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है.
रोज़नामा 'ख़बरें' ने सुर्ख़ी लगाई है, "भारत-इसराइल की संयुक्त योजना पर काम शुरू, भारतीय सेना की लगातार 48 घंटों तक फ़ायरिंग."
अख़बार लिखता है कि भारत जंगी जुनून से ग्रस्त है और एलओसी पर नागरिकों को निशाना बना रहा है.
अख़बार के मुताबिक़ ताज़ा गोलाबारी में तीन और नागरिकों की मौत हो गई है और 11 घायल हुए हैं.
अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' के मुताबिक़ भारत की तरफ़ से होने वाली फ़ायरिंग में चार नागरिक मारे गए हैं और 10 नागरिक घायल हुए हैं.
अख़बार 'जंग' का कहना है कि भारतीय उपउच्चायुक्त को पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने तलब किया और युद्धविराम के उल्लंघन पर अपनी नाराज़गी दर्ज कराई.
अख़बार लिखता है कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने भी भारतीय गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया, जिसके बाद भारतीय तोपें शांत हो गईं.

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इसराइली पीएम का भारत दौरा
इसके अलावा इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की छह दिनों की भारत यात्रा से जुड़ी ख़बरें भी लगभग सारे अख़बारों में छाई रहीं.
अख़बार 'जंग' के संपादकीय पेज पर एक लेख भी छपा है. महमूद शाम के लिखे कॉलम का शीर्षक है, "भारत और इसराइल में फ़ासले घट रहे हैं."
महमूद शाम लिखते हैं कि दिल्ली हवाई अड्डे पर मोदी और नेतन्याहू की बग़लगीरी दक्षिण एशिया में सत्ता का संतुलन ज़रूर बिगाड़ देगी.
वो आगे लिखते हैं कि भारत और इसराइल दोनों ही अमरीका के लाडले हैं. उनके अनुसार भारत और इसराइल में जो बातें कॉमन हैं वे हैं दोनों को अमरीका की सरपरस्ती, अपने पड़ोसियों से दुश्मनी और सबसे अहम है दोनों देशों की मुस्लिम दुश्मनी.
महमूद शाम के अनुसार रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने वाले मोदी ने कई पापड़ बेले हैं. उनके अनुसार भारत और इसराइल के राजनयिक संबंध भले ही सिर्फ़ 25 सालों से हों लेकिन भारत और चीन के बीच 1962 में हुए युद्ध के बाद से ही भारत और इसराइल के बीच अनौपचारिक संबंध स्थापित हो गए थे.

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स्तंभकार का दावा है कि 1971 की भारत-पाक जंग में भी इसराइल ने भारत का साथ दिया था. महमूद शाम बताते हैं कि मोदी और नेतन्याहू की जोशीली झप्पी पाकिस्तान के लिए ख़तरे की घंटी क्यों है.
वो आगे लिखते हैं कि दिल्ली हवाई अड्डे पर यहूद-ओ-हुनूद (यहूदी और हिंदू) की ये गर्मजोशी इस बात पर ज़ोर देती है कि पाकिस्तान अपने राष्ट्रीय हित का चयन ठीक तरह से करे. जनता और संसद को विश्वास में लेकर ही किसी भी देश से संबंध क़ायम किया जाए.
पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और कलाकार मन्नू भाई की मौत हो गई है. पाकिस्तान के सभी अख़बारों ने उनकी मौत को पहले पन्ने पर जगह दी है. लगभग सभी अख़बारों ने एक ही सुर्ख़ी लगाई है, ''सबके भाई, मन्नू भाई नहीं रहे''.
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