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बीबीसी विशेष: क्या ख़ुद को पाकिस्तान के लिए बोझ मानते हैं हाफ़िज़ सईद?
बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद ने राजनीति में शामिल होने की अपनी योजना पर बात की है.
चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफ़िज़ सईद को भारत मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड मानता है.
बीबीसी संवाददाता शुमाइला जाफ़री से बातचीत में उन्होंने पाकिस्तान में अपनी छवि, आरोपों और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी अपनी राय ज़ाहिर की.
सियासत के सवाल पर
हाफ़िज़ सईद ने हाल ही में सियासत में आने का ऐलान किया था. उन्होंने मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) नाम से पार्टी बनाई, लेकिन पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने उसे चुनाव लड़ने से रोक दिया था.
सियासत में आने की वजह पूछने पर वह कहते हैं, "मैं समझता हूं कि इस समय पाकिस्तान को एकजुट करने और पाकिस्तान के लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है और इसी बुनियाद पर हम राजनीति में आ रहे हैं."
क्या उनके जैसा विवादित व्यक्ति पाकिस्तान को एकजुट कर सकता है, पूछे जाने पर उन्होंने कहा,"लोग मुझे समझते हैं और पहचानते हैं कि मैं कौन हूं."
क्या वह मुस्लिम लीग के प्लेटफॉर्म से ही सियासत में आएंगे, पूछने पर उन्होंने कहा, "इंशाअल्लाह ज़रूर आएंगे जी".
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर दबाव बनाता रहा है कि वह हाफ़िज़ सईद पर कार्रवाई करे. वहीं हाफ़िज़ सईद पर भी पाकिस्तान में भारत विरोधी भाषणों के आरोप लगते रहे हैं.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में पूछने पर उन्होंने ख़ासी तल्ख़ भाषा में आरोप लगाए, "मोदी के बारे में मेरी राय ये है और मैं सिर्फ़ तथ्यों के आधार पर बात करता हूं, ख़्याली बातें नहीं करता. नरेंद्र मोदी ढाका गए और वहां खड़े होकर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दो टुकड़े करने में मेरा किरदार है, मैंने ख़ून बहाया था."
उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि दुनिया मुझे भी कटघरे में खड़ा करे और मोदी को भी खड़ा करे और फ़ैसला करे कि दहशतग़र्द कौन है."
हाफ़िज़ के आरोपों पर प्रतिक्रिया लेने के लिए हमने भारतीय विदेश मंत्रालय से संपर्क किया, लेकिन फिलहाल उनका कोई जवाब नहीं आया है.
संस्था पर प्रतिबंध पर
लश्कर-ए-तैयबा के बाद हाल ही में पाकिस्तान ने सईद की संस्था जमात-उद-दावा पर भी प्रतिबंध लगा दिए हैं.
तो क्या पाकिस्तान ने उनके 'एक करोड़ डॉलर का इनामी आतंकवादी' होने की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को स्वीकार कर लिया है?
इस सवाल पर हाफ़िज़ सईद ने कहा, "अमरीका भारत का समर्थक हो गया और उन्होंने हम पर (जमात-उद-दावा) भी प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए और पाकिस्तानी सरकार पर दबाव डालना शुरू कर दिया. ये एक तथ्य है कि उनके मुक़ाबले में पाकिस्तान एक कमज़ोर देश है. हमारे देश में आर्थिक परेशानियां हैं और इस वजह से होने वाली परेशानियों के कारण पाकिस्तान इस समय हम पर प्रतिबंध लगा रहा है."
आरोप और अदालत
हाफ़िज़ का कहना है कि वे जब भी अदालत में गए, अदालत ने उनके तर्क स्वीकार किए और कहा है कि उन पर कोई भी आरोप साबित नहीं हो रहा है.
बीबीसी संवाददाता ने उन्हें पंजाब (पाकिस्तान) के क़ानून मंत्री का वह बयान याद दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन लोगों का इस्तेमाल देश 'एसेट' के तौर पर करता है उन पर अदालतों में आरोप सिद्ध होने की उम्मीद नहीं की जा सकती.
इस पर हाफ़िज़ सईद ने कहा कि ऐसे फ़ैसले लेने का हक़ सिर्फ़ अदालत के पास है और राजनेता ये फ़ैसले नहीं ले सकते.
उन्होंने कहा, "हमारे हक़ में लगातार फ़ैसले आ रहे हैं. अगर देश के क़ानून मंत्री या रक्षा मंत्री कोई बात कहते हैं तो इनकी बात में कितनी सच्चाई है? ये लोग (नेता) राजनीति में भी एक दूसरे से लड़ने के आदी हैं."
'क्या रक्षा मंत्री आपसे डरते हैं?'
हाफ़िज़ से पूछा गया कि पाकिस्तान के ज़िम्मेदार लोग भी आपके हक़ में आए अदालती फ़ैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो आपके तर्कों से दुनिया कैसे संतुष्ट हो पाएगी.
इस पर हाफ़िज़ ने कहा कि दो दिन पहले ही रक्षा मंत्री ने बीबीसी से बात करते हुए उनके ख़िलाफ़ बेहद सख़्त बयान दिया और वही अब उन्हें सफ़ाई भी पेश कर रहे हैं.
जब उनसे पूछा गया कि क्या रक्षा मंत्री आपसे डरते हैं इसलिए सफ़ाई दे रहे हैं, तो हाफ़िज़ ने हंसते हुए कहा,"मैं नहीं जानता. नहीं, वो डरते नहीं हैं. अलहमदुलिल्लाह, मैं या मेरी पार्टी ने कभी कोई ऐसी चीज़ पेश नहीं की है कि जिसकी वजह से कोई हमसे डरे. समस्या ये है कि पाकिस्तान एक कमज़ोर देश है. पाकिस्तान के सामने आर्थिक परेशानियां हैं और सरकार को हमेशा (दूसरे देशों से) आर्थिक सहायता की ज़रूरत होती है."
'क्या पाकिस्तान के लिए बोझ हैं सईद?'
बीते कुछ वर्षों में हाफ़िज़ सईद की वजह से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव का सामना करना पड़ा है.
क्या पाकिस्तानी प्रशासन अंतत: उन्हें बोझ मानने लगा है, इस पर उन्होंने कहा, "ख़्वाज़ा आसिफ़ ने अमरीका में दिए एक बयान में मुझे 'बोझ' कहा था. मैंने इस पर उन्हें क़ानूनी नोटिस भेज दिया था. उस नोटिस पर उन्होंने मुझे जवाब दिया और माफ़ी मांगी की उनका बयान सही नहीं था."
हालांकि सईद इसे पाकिस्तानी प्रशासन का 'दोगला रवैया' मानने से इनकार करते हैं. वह कहते हैं, "असल में पाकिस्तान दबाव का शिकार है, उसके पास कोई नीति नहीं है. इस बात की क्या दलील है कि मैं 'सैन्य एस्टेबलिशमेंट' की पैदाइश हूं?"
उनकी वजह से पाकिस्तान को होने वाली राजनयिक मुश्किलों के सवाल पर हाफ़िज़ कहते हैं, "मेरी राय में, अब हालात बदल रहे हैं. पाकिस्तान अब अपने पैरों पर खड़ा हो रहा है. पाकिस्तान ने अमरीका को साफ़ कह दिया है कि हमें आपकी मदद की ज़रूरत नहीं है."
हाफ़िज़ सईद ने कहा, "हमारे ख़िलाफ़ जो भी कार्रवाई की जाती है, चाहे वो ये क्रैकडाउन हो या कुछ और, हम उसके ख़िलाफ़ अदालत जाएंगे."