You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पाकिस्तान हाफ़िज़ को करे गिरफ़्तार: अमरीका
अमरीकी सरकार ने पाकिस्तान में हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी से रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान से सईद को गिरफ़्तार करने की मांग की है.
पाकिस्तान में समीक्षा बोर्ड के फ़ैसले के आधार पर हाफ़िज़ सईद को क़रीब 10 महीने बाद नज़रबंदी से रिहा कर दिया गया है.
अमरीकी सरकार के विदेश विभाग की ओर से इस मुद्दे पर एक बयान जारी किया गया है.
बयान के अनुसार, "अमरीका पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को नज़रबंदी से रिहा किए जाने पर चिंतित है. लश्कर-ए-तैयबा अमरीकी नागरिकों समेत सैकड़ों बेगुनाह लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार आतंकवादी संगठन है. पाकिस्तान सरकार को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि वह गिरफ़्तार हों और उनके गुनाहाओं की सज़ा मिले."
अमरीकी विदेश मंत्रालय ने अपने मुंबई हमलों का भी जिक्र किया है.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, "सयुंक्त राष्ट्र ने साल 2006 के मुंबई हमले के बाद, जिसमें सात अमरीकी नागरिकों समेत 166 मासूम लोगों की मौत हुई थी, सयुंक्त राष्ट्र ने साल 2008 की दिसंबर में हाफ़िज़ सईद को व्यक्तिगत रूप से आतंकी नामित किया था."
साल 2012 से हाफ़िज़ सईद पर 10 लाख अमरीकी डॉलर का इनाम है. हाफ़िज़ के संगठन जमात-उद-दावा को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी समूहों की सूची में रखा है.
इस साल के जनवरी महीने से हाफ़िज़ सईद को नज़रबंद कर रखा गया था. पाकिस्तान की अदालत ने इस हफ़्ते नज़रबंदी से मुक्त करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने सरकार के इस दलील को ख़ारिज कर दिया का हाफ़िज सईद का रिहा होना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए ख़तरा है.
मुंबई में 2008 में हुए हमले में 160 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. हालांकि हाफ़िज़ ने मुंबई हमले में अपनी संलिप्तता से हमेशा इनकार किया है. इस मौलवी को पाकिस्तान के पूर्वोत्तर शहर लाहौर से गुरुवार शाम रिहा कर दिया गया.
नज़रबंदी से रिहा होने के बाद एक वीडियो संदेश में हाफ़िज़ सईद ने कहा, ''भारत हमेशा आतंकवाद का आरोप लगाता रहा है, लेकिन हाई कोर्ट के फ़ैसले से साबित हो गया है कि भारत दुष्प्रचार कर रहा है. इंशाअल्लाह हम कश्मीर का आज़ादी की कोशिश जारी रखेंगे और इसके लिए पाकिस्तानियों को एकजुट करेंगे.''
हाफ़िज़ सईद को नज़रबंद करने का फ़ैसला अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दबाव के रूप में देखा जा रहा था. हाफ़िज़ सईद ने 1990 के दशक में लश्कर-ए-तैयबा बनाया था.
जब लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबंध लगाया गया तो हाफ़िज़ ने जमात-उद-दावा नाम के संगठन को 2002 में खड़ा किया.
हाफ़िज़ सईद का कहना है कि जमात-उद-दावा एक इस्लामिक कल्याण संगठन है, लेकिन अमरीका का कहना है कि यह लश्कर का ही हिस्सा है.
2014 में हाफ़िज़ सईद ने बीबीसी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा था कि 'मुंबई हमले में उनका हाथ नहीं है और यह भारत का दुष्प्रचार है.'
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)