हूथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर दागी मिसाइल

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यमन में हूथी विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक मिसाइल दागी है.

रियाद में एक रॉकेट इंटरसेरप्ट किया गया है. रियाद में चश्मदीदों का कहना है कि उन्होंने धमाके की आवाज़ सुनी थी. सोशल मीडिया पर आसमान में दिखते धुंए के कुछ वीडियो भी शेयर किए जा रहे हैं.

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हूथी आंदोलन के अल मसीरा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोहियों ने यमामा पैलेस में बुर्काना-2 मिसाइल दागी है. ऐसी खबरें हैं कि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है.

सऊदी अरब और अमरीका ईरान पर हूथी विद्रोहियों को मिसाइल मुहैया कराने का आरोप लगाते रहे हैं. हालांकि ईरान हूथी आंदोलन में किसी तरह के हथियार मुहैया कराने के आरोपों से इंकार करता है.

विद्रोहियों ने जिस यमामा पैलेस को निशाना बनाने का दावा किया है, वो सऊदी के शाह का ऑफिस और शाही कोर्ट है.

साल 2015 से यमन में गृहयुद्ध जारी है.

कहां हुआ हमला

कैसे शुरू हुई यमन की लड़ाई

यमन के संघर्ष की जड़ें साल 2011 में हुई अरब क्रांति में खोजी जा सकती हैं. इसी अरब क्रांति की लहर में तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह को सत्ता छोड़नी पड़ी और यमन की कमान उनके उपराष्ट्रपति अब्द रब्बू मंसूर हादी के हाथ में आ गई.

शुरू में ये माना गया कि सत्ता में बदलाव से यमन में राजनीतिक स्थिरता बढ़ेगी लेकिन हक़ीकत में ये नाकाम रहा. इसके साथ ही यमन में एक अजीब तरह का सत्ता संघर्ष शुरू हो गया जिसमें एक तरफ़ पूर्व राष्ट्रपति सालेह की फौज थी तो दूसरी तरफ़ मौजूदा राष्ट्रपति हादी की सेना, एक मोर्चा हूथी विद्रोहियों ने भी खोल रखा था.

यमन पर 30 साल तक हुकूमत करने वाले सालेह ने बाद में राष्ट्रपति हादी को यमन की राजधानी सना से खदेड़ने के लिए हूथी विद्रोहियों से हाथ मिला लिया. 2014 से सालेह की फौज और हूथी विद्रोहियों का सना पर नियंत्रण बना हुआ था लेकिन इस साल दिसंबर की शुरुआत में ही ये गठबंधन बिखर गया और इसका नतीज़ा हुआ सालेह की मौत.

हूथी विद्रोहियों ने सना में सालेह के घर बमबारी कर दी, उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति पर दगा करने का आरोप लगाया था

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हूथियों के पास कितनी ताक़त?

हूथी विद्रोही यमन के अल्पसंख्यक शिया ज़ैदी मुसलमानों का नुमाइंदगी करते हैं. साल 2000 के दौरान हूथी विद्रोहियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति सालेह की फौज के ख़िलाफ़ कई लड़ाइयां लड़ीं. लेकिन इनमें से ज़्यादातर संघर्ष उत्तरी यमन के पिछड़े सूबे सादा की सरहदों तक ही सीमित रहे.

लेकिन जब हूथियों को सत्ता से बाहर किए गए सालेह की फौज का साथ मिला तो सितंबर, 2014 में राजधानी सना पर उनका नियंत्रण स्थापित हो गया. यहां से वे यमन के दूसरे सबसे बड़े शहर आदेन की तरफ़ आगे बढ़ने लगे.

हूथी विद्रोहियों के बढ़ते असर की वजह से साल 2015 में सऊदी अरब ने राष्ट्रपति हादी की सरकार को ताकत देने के लिए सैनिक कार्रवाई शुरू कर दी. सऊदी अरब का मानना है कि हूथी विद्रोहियों को क्षेत्र के शिया बहुल देश ईरान से समर्थन मिलता है. ईरान से सऊदी अरब के रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं.

सऊदी गठबंधन ईरान पर हूथियों का साथ देने का आरोप लगाता है और उनका कहना है कि तेहरान ऐसा अरब जगत पर अपना असर बढ़ाने के लिए कर रहा है. इसमें यमन भी एक है और सऊदी अरब की लंबी सीमा यमन से लगती है.

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