You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
तख़्तापलट के बाद पहली बार दिखे मुगाबे
ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे तख़्तापलट के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर नज़र आए.
मुगाबे ने राजधानी हरारे में हुए एक ग्रेजुएशन समारोह में हिस्सा लिया. 16 नवंबर को हुए तख़्तापलट के बाद सेना ने मुगाबे को उनके घर में नज़रबंद कर दिया था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ मुगाबे ने वहां भाषण दिया जिसके बाद छात्रों ने उनकी हौसलाअफ़्ज़ाई की.
मुगाबे ने वहां मौजूद लोगों के साथ राष्ट्रगान भी गाया.
ज़िम्बाब्वे में मौजूद बीबीसी संवाददाता एंड्रयू हार्डिंग के मुताबिक़ राष्ट्रपति हर साल इस समारोह में शामिल होते हैं लेकिन इस बार लोगों को उम्मीद नहीं थी कि वह आएंगे.
राष्ट्रपति मुगाबे की पत्नी ग्रेस और शिक्षा मंत्री जोनाथन मोयो ने समारोह में शिरकत नहीं की.
देश में चल रही उठापटक के पीछे मुगाबे का उत्तराधिकारी ढूंढने की कवायद है.
सेना का समर्थन नहीं जुटा सकीं ग्रेस मुगाबे
93 साल के मुगाबे चाहते थे कि उनके हटने के बाद सत्ता उनकी पत्नी ग्रेस को मिले जो उनसे 4 दशक छोटी हैं.
लेकिन सेना ऐसा नहीं चाहती थी.
सेना की पसंद पूर्व उपराष्ट्रपति इमरसन मनंगावा बताए जाते हैं.
मनंगावा को मुगाबे ने ग्रेस के उकसाने पर बर्ख़ास्त कर दिया था. जिसके बाद मनंगावा दक्षिण अफ़्रीका चले गए.
अभी क्या चल रहा है
बीबीसी वर्ल्ड सेवा की अफ़्रीका मामलों की संपादक मेरी हार्पर के मुताबिक़,
ग्रेजुएशन समारोह में मुगाबे की शिरक़त यह जताने के लिए है कि सब ठीक चल रहा है लेकिन असलियत इससे जुदा है. उनके इस क़दम से भविष्य को लेकर चल रही अनिश्चितता बढ़ गई है.
ऐसी ख़बरें हैं कि सेना मनंगावा के साथ संपर्क में है और उन्हें वापस लाने की तैयारी कर रही है.
राष्ट्रपति मुगाबे पर पद छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है लेकिन चार दशक से सत्ता में रहे मुगाबे इतनी आसानी से मैदान छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहे.
सेना ने शुक्रवार को कहा कि वह राष्ट्रपति मुगाबे के साथ बातचीत कर रही है और बातचीत के नतीजे से जल्द ही लोगों को वाक़िफ़ कराएगी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)