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रूसी हैकिंग मामले में फंसे ट्रंप के पूर्व सहयोगी
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का चुनाव अभियान संभालने वाले पॉल मानफ़ोर्ट के ख़िलाफ़ राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दख़ल से जुड़े मामले की जांच होगी.
ख़बरों के मुताबिक़, पॉल और उनके सहयोगी रिक गेट्स पर 12 तरह के आरोप लगाए गए हैं, जिसमें षड्यंत्र रचने और पैसों की धोखाधड़ी से जुड़े मामले शामिल हैं.
पॉल और उनके सहयोगी गेट्स वाशिंगटन स्थित एफ़बीआई दफ़्तर पहुंचे थे.
इन दोनों के ख़िलाफ़ यूक्रेन के रूसी राजनेताओं से 2006 से 2015 के बीच संपर्क रखने के संबंध में पूछताछ हो रही है. आरोपों में ये कहा जा रहा है कि पॉल और गेट्स, यूक्रेन के नेता विक्टर यानुकोविच और उनकी पार्टी के अपंजीकृत एजेंट की भूमिका निभा रहे थे.
यानुकोविच को रूस समर्थित नीतियों के चलते 2014 में यूक्रेन के राष्ट्रपति के पद से अपदस्थ होना पड़ा था.
पॉल मानाफ़ोर्ट पर विदेशी एकाउंटों के ज़रिए 18 मिलियन डॉलर रकम को इधर से उधर करने का आरोप भी है. इन पैसों का इस्तेमाल संपत्ति ख़रीदने और अन्य सुविधाओं पर किया गया है. ख़ास बात ये है कि इसकी जानकारी अमरीकी अधिकारियों से छुपाई गई है.
पॉल मानाफ़ोर्ट के बारे में कहा जा रहा है कि वे विदेशी संपत्ति की बदौलत अमरीका में शाही ज़िंदगी जीते हैं.
विशेष वकील रॉबर्ट म्यूलर के नेतृत्व में ट्रंप के चुनाव अभियान के रूसी लिंक की जांच की जा रही है.
म्यूलर की टीम लंबे और गंभीर पूछताछ के लिए चर्चित है. ये टीम अब तक कई व्हाइट हाउस अधिकारियों से पूछताछ भी कर चुकी है.
मानाफ़ोर्ट 1976 में गेराल्ड फ़ोर्ड के समय से ही कई रिपब्लिकन राष्ट्रपति उम्मीदवारों के चुनाव अभियान से जुड़े रहे हैं.
आख़िर क्या है ये मामला?
अमरीका में राष्ट्रपति ट्रंप अपना कार्यकाल शुरू करने के बाद से ही अपनी टीम और रूसी अधिकारियों के बीच सांठगांठ के आरोपों से जूझ रहे हैं.
अमरीकी जांचकर्ता ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं रूसी साइबर हैकरों ने अमरीकी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित तो नहीं किया ताकि ट्रंप चुनाव जीत सकें.
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