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2022 के फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप से परेशान है क़तर?
- Author, उमर दराज़ नांगियाना
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, दोहा, क़तर
क़तर को वर्ष 2022 के विश्व कप की मेज़बानी मिली हुई है. लेकिन आयोजन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.
निर्माण कार्य में देरी, मज़दूरों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप और कई देशों के साथ उसके रिश्तों में आई खटास ने क़तर की परेशानी बढ़ाई है.
चार महीने पहले सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र जैसे क़तर के पड़ोसियों ने उसके साथ रिश्ते ख़त्म करने की घोषणा कर दी.
सऊदी अरब के साथ उसका एकमात्र ज़मीनी रास्ता था जो संयुक्त अरब अमीरात तक जाता था.
दो महीने का सामान बचा था
वर्ल्ड कप के लिए बनाए जा रहे आठ में से सात स्टेडियम के लिए निर्माण सामग्री क़तर इसी रास्ते से मंगवाता था. संकट के समय निर्माण कार्य कर रहीं ज़्यादातर कंपनियों के पास महज़ दो महीने का ही सामान बचा था जबकि संकट समाप्त होने की संभावनाएं नहीं दिख रही हैं.
यह भी चिंताएं थी कि संकट के लंबा खिंचने के कारण क़तर पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों की वफ़ादार कंपनियां सामान की कमी के कारण क़तर में अपना काम बंद कर देंगी.
क़तर सरकार को शायद इसका अंदाज़ा था. 2022 का विश्व कप आयोजित करवाने वाली क़तर की सुप्रीम कमेटी डिलीवरी एंड लीगेसी के प्रमुख हसन अल थवाडी कहते हैं- उन्होंने जल्द और प्रभावी क़दम उठाए.
बीबीसी से एक हालिया इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि संकट के कारण बिज़नेस करने के लिए वैकल्पिक रास्ते ढूँढ़ लिए गए थे, जहां से क़तर में निर्माण समाग्री आती रहे.
कराची के रास्ते आ रहा माल
हसन अल थवाडी कहते हैं, "हमने तुरंत चीन, मलेशिया, तुर्की और ओमान से ये निर्माण सामग्री मंगवानी शुरू कर दी है. सजावटी सामान जो हम पहले संयुक्त अरब अमीरात से लाते थे अब ओमान से आता है. इसी तरह स्टील या सरिया चीन और मलेशिया से मंगवाया जाता है."
क़तर के हम्दनामी बंदरगाह और पाकिस्तान में कराची के एक बंदरगाह के बीच रास्ता खोल दिया गया है जिससे ज़रूरत की निर्माण सामग्री क़तर मंगाई जाती है.
हसन कहते हैं, "ये क़दम बताते हैं कि क़तर इसको लेकर कितना गंभीर है और इस तरह क़तर में 2022 विश्व कप की तैयारियों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है."
हाल ही में आठ में से पहला स्टेडियम 'ख़लीफ़ा स्टेडियम' दोहा में तैयार होने के बाद खोल दिया गया था. हसन के मुताबिक़, बाक़ी दो स्टेडियम अगले महीने खोल दिए जाएंगे जबकि क़तर का साल 2020 तक तमाम स्टेडियम बनाने का इरादा है.
बीबीसी की टीम को अल खोर के इलाक़े के पास मौजूद एक निर्माणाधीन 'बैस स्टेडियम' का सीमित दौरा करवाया गया. 40 हज़ार दर्शकों की क्षमता वाले इस स्टेडियम में 2022 विश्व कप का सेमीफ़ाइनल मैच खेला जाएगा.
पूरा होने के क़रीब इस स्टेडियम पर काम जारी था जहां मज़दूर भारी उपकरणों की मदद से आख़िरी चरण के काम में व्यस्त दिखाई दिए. हसन के मुताबिक़, न तो किसी कंपनी ने किसी प्रोजेक्ट को छोड़ने का इरादा दिखाया और न ही उन्हें निर्माण सामग्री की कमी का सामना करना पड़ा.
क़तर को 2022 के विश्व कप के मैदानों और उनसे संबंधित सुविधाओं और अन्य परियोजनाओं के लिए साल में 30 हज़ार लोगों की ज़रूरत है, जो वह ज़्यादातर दक्षिण एशियाई देशों से पूरा करता है. इन देशों से लाखों की तादाद में आप्रवासी क़तर में मौजदू हैं.
मज़दूरों के साथ बुरे व्यवहार का आरोप
क़तर पर मज़दूरों के अधिकारों के उल्लंघन और उन्हें सुविधाएं न देने का आरोप लगता रहा है.
लेकिन हसन का दावा है कि क़तर में चंद सालों में क़ानून के साथ ज़मीनी हालात बदल चुके हैं, नियमों को कड़ाई से लागू करवाने के लिए इंस्पेक्टरों की तादाद बढ़ा दी गई है और बैंक के ज़रिए हर मज़दूर को तनख़्वाह की अदायगी के नियम लागू किए गए हैं.
प्रतिबंधित इलाकों में मीडिया या बाहरी पर्यवेक्षकों के लिए मज़दूरों के कैंपों तक जाना मुमकिन नहीं है. हालांकि, हसन का कहना है कि क़तर उन चंद देशों में से एक है, जहां ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को आने का अधिकार है और ये संगठन क़तर में रहकर यहां की सरकार की आलोचना कर चुके हैं.
वे कहते हैं कि यह एक ग़लतफ़हमी है कि क़तर में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को आने से रोका जाता है, पारदर्शिता के मामले में क़तर पर उंगली नहीं उठाई जा सकती है.
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