चीन को टक्कर देने भारत के क़रीब आया अमरीका?

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अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन है कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रिश्तों को और ज़्यादा मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.
वाशिंगटन में एक थिंक टैंक को संबोधित करते हुए टिलरसन ने ये भी कहा, ''अमरीका और भारत ग्लोब के दोनों छोर पर स्थिरता के दो आधार हैं.
- अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने को लेकर नज़रिया एकदम स्पष्ट है.
- ट्रंप और मोदी दोनों देशों के बीच ऐसी महत्वाकांक्षी साझेदारी स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे न सिर्फ़ दुनिया के इन दो महान लोकतंत्रों का फ़ायदा होगा. बल्कि शांति और स्थिरता के लिए काम कर रहे अन्य स्वतंत्र राष्ट्रों को भी फ़ायदा होगा.
- जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमरीका यात्रा ने हमारी रणनीतिक साझेदारी के इस नए क्षेत्र के कई अवसरों को रेखांकित किया था.''

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भारत से अमरीकी दोस्ती का चीन कनेक्शन
अमरीकी विदेश मंत्री ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के संकेत ऐसे समय में दिए हैं, जब चीन में सत्ताधारी वामपंथी पार्टी का अहम सम्मेलन चल रहा है.
राष्ट्रपति ट्रंप अगले महीने अपनी पहली चीन यात्रा पर होंगे. ऐसे में इस यात्रा से पहले टिलरसन ने चीन के मुद्दे पर कहा, ''अमरीका ने एशिया में चीन के ढांचागत निवेश का विकल्प तलाशने पर चर्चा भी शुरू कर दी है.''
टिलरसन ने आगे कहा, ''एशिया में चीन के नकारात्मक असर को देखते हुए अमरीका भारत को अहम सहयोगी के रूप में देख रहा है.''

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मोदी के अमरीकी दौरे का असर?
इसी साल जून में अमरीकी संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, ''मुझे संबोधन का मौका देकर आपने भारतीय लोकतंत्र और उसके 125 करोड़ लोगों का सम्मान किया है. भारत और अमरीका के बीच रिश्ता प्रभुत्व के बजाए सहभागिता का होगा. ''
एशिया और विश्व में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने में क्या अमरीका के भारत के क़रीब आने की ये रणनीति कारगर हो पाएगी ये भविष्य में ही पता चल सकेगा.
अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन अगले सप्ताह भारत और पाकिस्तान के दौरे पर आएंगे.
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