उत्तर कोरिया इन शब्दों से देता है 'दुश्मन' को जवाब

किम जोंग इल और किम जोंग सुंग

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, किम जोंग इल और किम जोंग सुंग की तस्वीरें हर सरकारी इमारत और हर घर में नज़र आती है
    • Author, एलिस्टर कोलमैन और उपासना भट्ट
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

उत्तर कोरिया में जो कुछ हो रहा है उसके लिए यहां के सरकारी मीडिया की अपनी ही एक शब्दावली है, सॉनगन और ज्यूचे जैसे शब्द रोज़ाना मीडिया रिपोर्टों में सुनने-पढ़ने को मिल जाते हैं.

उत्तर कोरिया के नेतृत्व के महिमामंडन के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल होता है, लेकिन अमरीका, जापान और दक्षिण कोरिया को कोसने लिए कई 'तीन बार श्रापित' जैसे जुमले चलते हैं.

हाल ही में उत्तर कोरिया की वामपंथी वर्कर्स पार्टी का स्थापना दिवस मनाया गया, आइए देखते हैं कि वो सरकारी मीडिया में किस तरह की शब्दावली बार-बार इस्तेमाल की गई.

सॉनगन

उत्तर कोरिया में सॉनगन यानी 'सेना पहले' अहम नीति है, जिसकी शुरुआत वहां के नेता किम इल सुंग ने 1960 में की थी.

उनके बेटे और उत्तराधिकारी किम जोंग इल के वर्कर्स पार्टी के महासचिव बनने की 20वीं वर्षगांठ के मौक़े पर उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने किम जोंग इल की तारीफ़ों के पुल बांधे गए.

किम जोंग उन

इमेज स्रोत, EPA

सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने कहा, " सॉनगन (सेना पहले) की मार्गदर्शक शक्ति के तौर पर वर्कर्स पार्टी ऑफ़ कोरिया को मज़बूत करने में उनके उत्कृष्ट राजनीतिक कौशल का प्रदर्शन हुआ.''

उत्तर कोरिया में 25 अगस्त को सॉनगन दिवस का राष्ट्रीय अवकाश दिया जाता है.

इस नीति को किम जोंग इल के बेटे और मौजूदा नेता किम जोंग उन ने आगे बढ़ाया है, उन्हीं के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों और प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम में तेज़ी आई है.

ज्यूचे

ज्यूचे उत्तर कोरिया की 'आत्मनिर्भरता नीति' का नाम है, जिसकी शुरुआत किम इल सुंग ने की थी.

सात अक्टूबर को वर्कर्स पार्टी के अधिवेशन पर सरकारी मीडिया की रिपोर्टों में इसका जमकर उपयोग किया गया.

इसमें किम जोंग-उन के बयानों का भी ज़िक्र किया गया, जिसमें 'अर्थव्यवस्था के विकास के लिए दृढ़ कोशिशों' और देश को ज्यूचे आधारित बनाने की बात उन्होंने की थी.

प्योंगयांग में ज्यूचे टावर नाम का स्मारक भी मौजूद है.

उत्तर कोरिया में 1997 से ज्यूचे कैलेंडर भी चलन में है. इसकी शुरुआत 1912 से होती है, इसी साल किम जोंग सुंग का जन्म हुआ था. उदाहरण के तौर पर सरकारी मीडिया रिपोर्टों में वर्ष 2017 को ज्यूचे कैलेंडर के मुताबिक 106वां वर्ष बताया जाता है.

बायोंगजिन

ये किम जोंग उन की अहम नीति है, जिसमें परमाणु हथियारों और अर्थव्यवस्था का साथ-साथ विकास करने पर ज़ोर दिया गया है. इसकी घोषणा सबसे पहले साल 2013 में की गई थी.

मई 2016 में पार्टी के सम्मेलन में किम ने इस नीति को लेकर आगे बढ़ने की प्रतीज्ञा की थी.

केसीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक सात अक्तूबर को पार्टी के विस्तृत अधिवेशन में किम जोंग उन ने कहा था, ''लगातार चल रही स्थिति और सच्चाई'' ने साबित किया है कि पार्टी ''एकदम सही'' थी.

चोलिमा

चोलिमा

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, 'चोलिमा' घोड़ा तेज़ भागता है लेकिन 'मलिमा' से तेज़ नहीं

चोलिमा, पंख वाला एक काल्पनिक घोड़ा है, जो एक दिन में कम से कम 400 किलोमीटर दौड़ सकता है.

उत्तर कोरिया में चोलिमा मूवमेन्ट की शुरुआत 1950 में हुई थी.

1950-53 के कोरियाई युद्ध के बाद उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था के पुनर्निमाण के लिए 1950 के दशक में चोलिमा मूवमेंट की शुरुआत की गई थी.

उत्तर कोरिया में चोलिमा स्टील कॉम्पलेक्स देश का सबसे बड़ा संयंत्र है.

मलिमा

मलिमा भी एक काल्पनिक घोड़ा है, लेकिन ये एक ऐसा घोड़ा है जो बहुत तेज़ी से लंबी दूरी तक दौड़ सकता है, इसकी रफ़्तार चोलिमा घोड़े से दस गुना ज़्यादा है.

मीडिया में अक्सर 'मलिमा की रफ़्तार' का ज़िक्र, उत्तर कोरियाई लोगों को देश के आर्थिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए ज़्यादा मेहनत करने की प्रेरणा देने के लिए किया जाता है.

किमलसुंगवाद और किमजोंगइलवाद

ये शब्द पूर्व नेताओं किम जोंग सुंग और किम जोंग इल की याद में रचे गए और उनकी सॉनगन और ज्यूचे नीतियों के संदर्भ में इस्तेमाल होते हैं.

सरकारी मीडिया का कहना है कि इन्हीं नीतियों के आधार पर देश का रुख़ तय होता है और अमरीका की धमकियों के बावजूद उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के विकास के पीछे यही नीतियां काम कर रही हैं.

पिछले मार्च में रोडोंग सिनमुन में छपे एक लेख में कहा गया, " ज्यूचे के दायरे में कोरियाई-समाजवाद विजय के पथ पर आगे बढ़ रहा है, जिसे कोई दुश्मन चुनौती देने की हिम्मत नहीं कर सकता. ये महान किमइलसुंगवाद और किमजोंगइलवाद की वैधता और उपयोगिता का साफ़ सबूत है.''

टावर ऑफ ज्यूचे

इमेज स्रोत, Getty Images

दोनों ही नेताओं के नाम पर उत्तर कोरिया में फूलों भी हैं. उत्तर कोरिया के संस्थापक की याद में किमइलसुंगिया नाम का फूलों का बगीचा भी है, जबकि किमजोंगिलिया नाम का एक फूल है.

ख़ास अभियान

उत्तर कोरिया का प्रशासन समय-समय पर ऐसे अभियान चलाता है जिनका मकसद लोगों को एक तय समय सीमा में अधिकतम उत्पादन के लिए प्रेरित करना होता है.

साल 2016 में उत्तर कोरिया ने कथित 70 और 200 दिवसीय अभियान चलाए थे, सत्ताधारियों की कोशिश थी कि वो दिखा सकें कि परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का कोई असर नहीं हुआ है.

सूखे या बाढ़ के समय में उत्तर कोरियाई मीडिया में इस तरह के अभियान का ज़िक्र कई बार मिलता है, ये दिखाने के लिए कि देश इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से उबरने में सक्षम है.

आर्डुअस मार्च

1990 के दशक में उत्तर कोरिया में भयंकर अकाल के कारण क़रीब तीस लाख लोगों की मौत हो गई थी. 'आर्डुअस मार्च' यानी कर्मठता मार्च, इसका इस्तेमाल इसी समय सामने आया था.

इस साल सरकारी मीडिया में बार-बार इसे सुना गया ताकि लोगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लेकर शुरू होने वाली आर्थिक मुसीबतों के लिए तैयार किया जा सके.

माउन्ट बैकडु

सत्तारूढ़ किम परिवार को देश में 'माउन्ट बैकडु ब्लडलाइन (वंश)' कहा जाता है.

1948 में उत्तर कोरिया की स्थापना के बाद से सिर्फ़ किम परिवार के (किम इल सुंग, किम जोंग इल और किम जोंग उन) पास ही सत्ता रही है.

'माउन्ट बैकडु ब्लडलाइन' का इस्तेमाल लोगों के बीच उत्तर कारियाई नेतृत्व के लिए वफ़ादारी को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है. किम वंश के तीन शासकों समेत किम जोंग सुक (किम इल सुंग की पहली पत्नी और किम जोंग इल की मां) 'माउन्ट बैकडु के महान लोगों' के तौर पर माने जाते हैं.

माउन्ट बैकडु, चीन और उत्तर कोरिया की सीमा पर स्थित कोरियाई प्रायद्वीप की सबसे ऊंची पर्वतीय चोटी है. पौराणिक गाथाओं में इसे कोरियाई लोगों का जन्मस्थान बताया जाता है और इसे किम इन सुंग की कोरियाई क्रांति के पवित्र उद्गम के तौर पर बताया जाता है.

उत्तर कोरियाई प्रोपेगैंडा के मुताबिक किम जोंग इल का जन्म इस पर्वत पर समजियोन में हुआ था, हालांकि ये प्रचलित रहा है कि उनका जन्म रूस में हुआ था.

'तीन बार श्रापित'

किम जोंग उन

इमेज स्रोत, KCNA

उत्तर कोरिया के मीडिया में 'तीन बार श्रापित' का इस्तेमाल भी बहुत होता है, इसका अर्थ है कि कोई गंभीर (अधिकतर विचारधारा से जुड़ा) अपराध करने वाले व्यक्ति को मिली सज़ा उसकी तीन पीढ़ियों को भुगतनी पड़ेगी.

सरकार के विरोधियों के लिए इसका इस्तेमाल बार-बार किया जाता है.

उत्तर कोरिया की पूर्व राष्ट्रपति पार्क ग्वेन हे के बारे में उत्तर कोरिया के मीडिया में कई बार कहा गया कि 'वो दक्षिण कोरिया को आज़ादी का कब्रिस्तान बनाकर अपने (तीन बार श्रापित) अपराधों की सज़ा भगुत रही हैं.'

हालांकि उत्तर कोरिया में पार्क ग्वेन हे के पिता पार्क चुंग ही को भी 'तीन बार श्रापित' कहा गया था.

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भी केसीएनए के निशाने पर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र में उनके भाषण को 'पागल गुंडे का तीन बार श्रापित कुतर्क' बताया गया था.

(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)