उत्तर कोरिया लड़ा तो चीन साथ नहीं देगा?

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उत्तर कोरिया से महज़ आठ किलोमीटर दूर चीन के लायोनिंग प्रांत के डैंडोंग में चीन और उत्तर कोरिया के पूर्व नेताओं - माओत्से तुंग और किम-II सुंग की मूर्तियां दोनों देशों के बीच पुराने रिश्ते की गवाही देती हैं.
लेकिन हाल के दिनों में उत्तर कोरिया को लेकर चीन की भाषा में बदलाव आया है.
साल 2012 में में जब किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया की सत्ता संभाली और मिसाइल और परमाणु परिक्षण को जारी रखा तो कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ गया.
बीबीसी चीनी सेवा के अनुसार, तबसे उत्तर कोरिया को लेकर चीन की आधिकारिक स्थिति और उसकी आधिकारिक भाषा में लगातार बदलाव आया है.
हालांकि चीन और डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया अभी भी आधिकारिक सहयोगी हैं.

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कैसे बदलती गई भाषा
1. दोनों देशों के बीच 1961 में दोस्ताना सहयोग और एकदूसरे की मदद के समझौते को 1981 और 2001 में बढ़ाया गया, जो अब 2021 तक लागू रहेगा. समझौते के तहत उत्तर कोरिया पर बाहरी हमले की स्थिति में चीन उसकी सैन्य मदद करेगा.
लेकिन, बीजिंग की अब आधिकारिक स्थिति 'कोरिया प्रायद्वीप में परमाणु निःशस्त्रीकरण, स्थायित्व और शांति को बनाए रखते हुए परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को कूटनीति और बातचीत के जरिए हल' करना हो गया है.
इसीलिए उत्तर कोरिया जब भी परमाणु परीक्षण करता है, चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से एक बयान ज़रूर आता है.
2. इसी तरह के बयान में ये साफ़ दिख रहा है कि अब चीन अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ज़्यादा जोर दे रहा है.
चीन के सरकारी मीडिया ने नौ अक्टूबर 2006 को एक बयान जारी किया था जिसमें परमाणु हथियारों के परीक्षण पर अंततराष्ट्रीय समुदाय को उत्तर कोरिया की ओर से नज़रअंदाज़ किए जाने पर 'घोर आपत्ति' जताई गई थी.

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3. इसके अगले तीन बयानों (25 मई, 2009; 12 फ़रवरी, 2013 और छह जनवरी, 2016) में उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों के ख़िलाफ़ आपत्ति बढ़ती गई.
4. पिछले साल जब 9 सितम्बर 2016 को उत्तर कोरिया ने अपना पांचवां परमाणु परीक्षण किया तो चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग के अपने वादे को दुहराया और फिर से आपत्ति दर्ज कराई.
5. अभी हाल ही में जब उत्तर कोरिया ने छठां परमाणु परीक्षण किया तो चीन की स्थिति घोर आपत्ति से 'निर्णायक आपत्ति' में बदल गई.
साथ ही चीन ने बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग और उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ 'संयुक्त राष्ट्र सुक्षा परिषद के प्रतिबंधों को पूरी तरह और व्यापक रूप से लागू करने' की घोषणा की गई.

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6. जब पिछले अगस्त में जापान के ऊपर से उत्तर कोरिया ने मिसाइल परीक्षण किया तो चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में इसे 'उत्तर कोरियाई संकट' कहा गया.
7. अगस्त में ही चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक संपादकीय में इस बात का संकेत दिया कि अगर अमरीका ने उत्तर कोरिया पर पहले हमला करता है तो चीन बचाव करेगा लेकिन अगर उत्तर कोरिया ने हमला किया तो वो न्यूट्रल बना रहेगा.
उदाहरण के लिए अगर उत्तर कोरिया गुआम पर हमला बोलता है तो चीन आगे नहीं आएगा.
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