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क्या दक्षिण कोरिया से उत्तर कोरिया में चिट्ठी भेजी जा सकती है?
उत्तर कोरिया की राजधानी सियोल में शहरी वास्तुकला पर चल रही एक प्रदर्शनी में एक थीम 'लेटर्स टू द मेयर्स' रखी गई है.
दो सितंबर से शुरू हुई ये प्रदर्शनी पांच नवंबर तक चलेगी.
इस प्रदर्शनी में दुनिया भर के 50 शहरों को जगह दी गई है और दुनिया भर के आर्किटेक्ट 'उन शहरों के मेयरों के नाम चिट्ठी' लिखेंगे.
सियोल की स्थानीय सरकार इस प्रदर्शनी की आयोजक है और 50 शहरों की फ़ेहरिस्त में दक्षिण कोरिया के पड़ोसी देश उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग का नाम भी है.
चिट्ठी भेजना मुश्किल है...
प्रदर्शनी में एक सवाल उठा कि क्या दक्षिण कोरिया से उत्तर कोरिया को चिट्ठी भेजना मुश्किल है.
सैद्धांतिक तौर पर ये नामुमकिन है. दक्षिण कोरिया की सरकार ने उत्तर कोरियाई लोगों और उससे जुड़े संगठनों से किसी तरह का संपर्क रखने पर पाबंदी लगाई हुई है.
लेकिन इसके कुछ अपवाद भी हैं.
साल 2001 में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया की सरकार के बीच एक समझौता हुआ जिसके तहत दोनों देशों के बिछड़े हुए परिवारों को एक दूसरे को खत लिखने की इजाज़त दी गई थी.
बंटवारे के बाद
दोनों मुल्कों के बंटवारे के बाद बिछड़ गए दक्षिण कोरिया के 300 परिवारों को उत्तर कोरिया से उनके संबंधी चिट्ठियां भेज सकते हैं.
इसके लिए उनके नाम-पते की पुष्टि किए जाने की शर्त रखी गई है.
लेकिन 2013 आते-आते दोनों देशों के बीच संबंध इस कदर तल्ख हुए कि खतोकिताबत का ये सिलसिला बंद कर दिया गया.
फ़िलहाल दक्षिण कोरिया के वही संस्थान उत्तर कोरिया से पत्र-व्यवहार कर सकते हैं जिन्होंने सरकार से इसके लिए मंज़ूरी ले रखी है.
चीन के रास्ते
कुछ मामलों में चीन के रास्ते कुछ दक्षिण कोरियाई परिवारों को चिट्ठियां भेजी जा सकती हैं.
एक सरकारी अधिकारी ने बताया, "हालांकि उत्तर कोरिया में फ़ैक्स या चिट्ठी भेजना मुमकिन है, लेकिन सियोल से प्योंगयांग किसी तरह का सीधा संपर्क करने पर पूरी तरह से रोक है."
जुलाई में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इ ने दोनों कोरियाई देशों के बीच फिर से संवाद शुरू करने की मंशा ज़ाहिर की थी.
उन्होंने पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण का उदाहरण भी दिया था.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद
उन्होंने दोनों देशों के बिछड़े परिवारों के बीच पत्राचार से लेकर टेलीफ़ोन कॉल और एक-दूसरे से मिलने-जुलने का मौका देने की बात कही थी.
उत्तर कोरिया के जिन देशों से कूटनीतिक रिश्ते हैं, जैसे चीन के ज़रिए उत्तर कोरिया चिट्ठियां भेजी जा सकती हैं.
कुछ मामलों में उत्तर कोरिया जाने वाले सैलानी वहां से अपने देश चिट्ठी भेज सकते हैं.
हालांकि 2013 में उत्तर कोरिया पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद ऐसे खतों का अपने मंजिल तक पहुंचना नामुमकिन हो गया है.
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