डोनल्ड ट्रंप को धमका कर किम जोंग उन ने दिखाई समझदारी!

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उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री ने कहा है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की तरफ़ से उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन पर निजी हमले के बाद प्रशांत क्षेत्र में एक परमाणु परीक्षण करने पर विचार किया जा रहा है. विश्लेषक अंकित पांडा इस अप्रत्याशित बयान के मायने बता रहे हैं. प्रशांत में इस ख़तरे के असली मायने आख़िर क्या हैं?
इस ख़तरे की आशंका तब और बढ़ गई जब ट्रंप के हमले के बाद उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन ने ट्रंप पर व्यक्तिगत हमला बोला. किम जोंग-उन की तरफ़ से इस तरह का बयान पहली बार आया है.
विदेश मंत्री रि योंग-हो के नेतृत्व में उत्तर कोरियाई प्रतिनिधिमंडल के न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद किम जोंग-उन का यह बयान आया है. उत्तर कोरिया का यह प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र के जनरल असेंबली में शरीक होने पहुंचा है.
यह बयान पूरी तरह से मंगलवार को आमसभा में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दिए गए भाषण का जवाब है. ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया को पूरी तरह से नष्ट करने की चेतावनी दी है.
ट्रंप ने कहा कि अमरीका अपनी और अपने सहयोगियों की रक्षा में उत्तर कोरिया को नष्ट करने पर मजबूर होगा. दोनों देशों के बीच अब सीधी जुबानी जंग शुरू हो गई है.

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गुआम पर हमले की 'धमकी'
अगस्त महीने में हमलोगों ने देखा था कि किम जोंग-उन की एक तस्वीर मानचित्र के साथ आई थी जिसमें में वह इलाक़ों को चिह्नित करते दिखे थे. तब उत्तर कोरिया ने अमरीकी क्षेत्र गुआम में बैलिस्टिक मिसाइल दागने की बात कही थी.
उत्तर कोरिया ने कहा था कि वो गुआम पर हमला तक कर सकता है. दूसरी तरफ़ ट्रंप ने भी उत्तर कोरिया को बर्बाद करने की धमकी दी थी. दोनों देश एक-दूसरे को लगातार धमकी दे रहे हैं. हालांकि उत्तर कोरिया की मीडिया एक प्रोपेगैंडा टूल का काम करती है. अक्सर यह होता है कि मीडिया के बयान और वहां की सरकार की योजना में फ़र्क़ होता है.

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किम और ट्रंप के बीच जुबानी जंग ताबड़तोड़ जारी है. ट्रंप ने किम को 'रॉकेट मैन' कहा तो किम ने बदले में ट्रंप को मानसिक रूप से विक्षिप्त, बूढ़ा और डरा हुआ कुत्ता कहा. दूसरी बात बहुत महत्वपूर्ण है कि किम जोंग-उन ने अपने बयान में अमरीका की 'शत्रुतापूर्ण नीति' के संदर्भ का ज़िक्र नहीं किया.
दूसरी तरफ़ अमरीका की इस नीति के कारण उत्तर कोरिया का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर है. अमरीका अपने पूर्वी एशियाई सहयोगियों की ज़मीन पर सैन्य ताक़त की मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है. जापान और दक्षिण कोरिया में अमरीका सैन्य मौजूदगी को और पुख्ता कर रहा है. अमरीका की कोशिश है वो उत्तर कोरिया के ख़तरे से जापान और दक्षिण कोरिया को पूरी तरह से महफ़ूज़ कर ले.
किम जोंग-उन ने ट्रंप के उत्तर कोरिया को नष्ट करने की धमकी की उपेक्षा करना ठीक समझा और ट्रंप पर निजी हमले को हथियार बनाया.

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अब व्यक्तिगत लड़ाई हो रही
इसका मतलब यह है कि किम शायद ट्रंप को अलग स्वभाव के रूप में देख रहे हैं. मतलब ट्रंप की धमकी उत्तर कोरिया की गरिमा का अपमान है पर वहां की नीति से कोई ताल्लुक नहीं है. मंगलवार को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान में यह बात अंतर्निहित थी कि किम नासमझ हैं.
ट्रंप ने किम को लेकर कहा था कि रॉकेटमैन ख़ुदकुशी के मिशन पर है. ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली में किम पर व्यक्तिगत हमला किया था. ट्रंप ने किम जोंग उन को अप्रत्याशित रूप से ज़िदी नासमझ बताया था जिसने अपने पूर्ववर्तियों से कभी सबक नहीं लिया.
यह विचारणीय है कि युद्ध प्रेम के बावजूद अपने बयान में किम जोंग-उन ने अमरीकी नागरिकों और अमरीका को धमकी नहीं दी. यहां केवल व्यक्तिगत स्तर पर हमला हो रहा है.
किम ने इस बात को नोटिस किया होगा कि ट्रंप ने एक संप्रभु राष्ट्र को नष्ट करने की खुली धमकी दी है. सामान्य तरीक़े से सोचने वाला शख़्स भी यहां विवेक और संयम को तवज्जो देगा. ऐसे में इसका असर साफ़ दिखा. किम जोंग-उन ने स्पष्ट रूप से देखा कि ट्रंप में सोच और समझ की क्षमता नॉ़र्मल नहीं है. तो क्या किम ने इस आधार पर ही ट्रंप को अस्थिर और अज्ञानी क़रार दिया? किम ट्रंप की धमकी से काफ़ी ग़ुस्से में थे और उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति को पागल क़रार दिया.
ट्रंप के धमकी को लेकर किम जोंग-उन को एक बहाना मिल गया कि उनके देश के लिए परमाणु शक्ति संपन्न होना कितना ज़रूरी है. आने वाले वक़्त में किम जोंग-उन इस उकसावे को कई रूपों में ले सकते हैं. किम जोंग-उन जापान के ऊपर से मिसाइल पहले ही उड़ा चुके हैं.
प्रशांत क्षेत्र में है ख़तरा?
प्रशांत क्षेत्र के ख़तरे पर उत्तर कोरिया पर नज़र रखने वालों ने इसकी आशंका जताई थी, लेकिन इस साल तक ऐसा होना संभव नहीं लगता है.
उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण कर सकता है, जैसा उसने तीन सितंबर से पहले जापान के ऊपर से बैलिस्टिक मिसाइल दागकर किया था. ऐसा वह प्रशांत महासागर में भी करके अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकता है.
अमरीका और जापान की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली की अपर्याप्ता को देखते हुए ऐसा कहना मुश्किल है कि इस प्रकार के परीक्षण को रोका जा सकता है.

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मोंटेरे के मिडलबरी सेंटर ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के आर्म्स कंट्रोल विशेषज्ञ जेफ्री लुइस बताते हैं कि क्यों उत्तर कोरिया की धमकी मायने रखती है. 1960 के दशक में अमरीकी पर्यवेक्षकों को चीन की परमाणु क्षमता को लेकर शक था. यह शक तब तक रहा जब तक चीन ने एक परमाणु हथियार को बैलिस्टिक मिसाइल पर लैस नहीं कर दिया.
इसके बाद ही चीन को एक गंभीर परमाणु क्षमता वाले राष्ट्र के रूप में स्वीकार किया गया था. खुला परमाणु परीक्षण आख़िरी बार धरती पर 16 अक्टूबर 1980 को चीन द्वारा किया गया था. यही करने की अब उत्तर कोरिया धमकी दे रहा है.
इस प्रकार के परीक्षण बेहद ख़तरनाक हैं क्योंकि इसके मार्ग में मौजूद पायलट्स से लेकर नाविक तक प्रभावित होंगे. साथ ही उत्तर कोरिया बाकी देशों की तरह कभी भी बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के दौरान अंतराराष्ट्रीय चेतावनी नहीं जारी करता है.
(अंकित पांडा उत्तर कोरियाई विशेषज्ञ हैं और 'द डिप्लोमैट' के सीनियर एडिटर हैं.)
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