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#100Women: उन्हें अंग्रेज़ी आती तो शायद जेल न होती
सिएरा लियोन में पली-बढ़ीं 'मिरियम' (बदला हुआ नाम) कभी स्कूल नहीं गई थीं. जब वह वयस्क हुईं तो उन्होंने पढ़ने-लिखने को लेकर संघर्ष किया. एक मामले को लेकर जब उन्हें जेल जाना पड़ा तो वहां उनका पहली बार सामना क्लासरूम से हुआ. कुछ लोगों की मदद के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई की कहानी लिखी. पढ़ें, उन्हीं के शब्दों में.
'आपको अपने बचाव में क्या कहना है? आप गिल्टी हैं या नहीं?'
'क्या? मैं समझी नहीं.'
'क्या आप गिल्टी हैं? जवाब दीजिए.'
'यस सर.'
साल भर बाद मुझे सिएरा लियोन का फ्रीटाउन महिला सुधार केंद्र से छोड़ा गया. मैं वहां क्यों थी? क्योंकि मुझे यह मालूम नहीं था कि अंग्रेज़ी के 'गिल्टी' (दोषी) शब्द का क्या अर्थ होता है, वहां अनुवाद करने के लिए कोई नहीं था.
मैं पांच बच्चों की एक 35 वर्षीय मां हूं जिसे पड़ोस में एक चोरी के इल्ज़ाम में गिरफ़्तार किया गया था. जब हम सभी को कोर्ट ले जाया गया तब मैंने शिक्षा की कमी के कारण एक गलत दलील दी थी.
जब मैंने सज़ा शुरू की तो मैंने तय कर लिया था कि सप्ताह में दो बार महिला कैदियों के लिए चलाई जाने वाली साक्षरता क्लास का फायदा उठाएंगी.
मेरी तरह और दूसरी भी महिला कैदी थे जो अनपढ़ थीं और कभी भी स्कूल नहीं गई थीं.
कुछ महीने बाद मैंने काग़ज़ातों में अंगूठे का निशाना लगाना बंद कर दिया क्योंकि मैंने साइन करना सीख लिया था.
मुझे ये कक्षाएं बहुत पसंद थी क्योंकि मुझे दूसरी महिलाओं ने 'स्कूल गर्ल' नाम दिया था.
सुधार केंद्र से रिहाई के बाद मैं अपना बिज़नेस तैयार कर चुकी थी जो मेरे परिवार की मदद करता. क्योंकि मेरी नए कौशल की वजह से मैं स्थानीय महिलाओं की बाज़ार की चेयरपर्सन बन चुकी थी और मैं सभी आर्थिक रिकॉर्ड्स को रखने में सक्षम थी.
जब मैं बाज़ार में काम नहीं करती हूं तो मैंने जो सुधार केंद्र में पढ़ाई के तरीके सीखे हैं उनसे मैं अपने पड़ोस के बच्चों को पढ़ाती हूं.
मेरे एजुकेशन सर्टिफिकेट ने लोगों को यह साबित किया कि मैं पढ़ सकती हूं, लिख सकती हैं और हिसाब-किताब कर सकती हूं. यह मेरी सबसे अभिमानी उपलब्धियों में से एक है.
मुझे यह कहानी लिखते समय अब भी किसी सहायता की ज़रूरत है लेकिन मैं यह जानती हूं कि जो मैं आपको बता रही हूं वो काग़ज़ पर क्या लिखा है. इसने मुझे एक समझ दी जो पहले नहीं थी.
जेल में पढ़ाने वाली शिक्षिका की कहानी
आज़ा ज़िब्ला जेल में एक शिक्षिका के रूप में काम करती हैं. वह 'एजुकएड' और 'एडवॉकएड' चैरिटी संस्थाओं की सहायता से महिलाओं की शिक्षा में मदद करती हैं. बचपन में वह स्कूल की शिक्षा पूरी नहीं कर पाईं लेकिन चैरिटी ने उन्हें पढ़ाई वापस शुरू करने और उसे पूरी करने में मदद की.
पढ़िए, ज़िब्ला की कहानी.
सुधार केंद्रों में मेरी बहुत-सी ऐसी महिलाओं से मुलाकात हुई जिनके पास शिक्षा की कमी के कारण अन्याय की कहानियां थीं. महिलाओं को यह नहीं पता था कि उन्होंने किस काग़ज़ पर अंगूठा लगाया है और उनको मालूम नहीं होता था कि उनके केस की सुनवाई के दौरान किन शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है. कई महिलाओं को सज़ा इसलिए हुई कि उन्हें मालूम नहीं था कि उन्होंने किस वित्त समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
जेल में पढ़ाई की क्लास चलाने के दौरान मुझे यह जानने का मौका मिला कि वे लोग कितने खुशकिस्मत हैं जिन्हें शिक्षा मिली. उस वक्त मुझे बहुत से ऐसे गर्व करने वाले क्षण मिले जब मैंने महिलाओं को कलम चलाते, उन्हें लिस्ट में अपना नाम देखते, किताब पढ़ते और अपने बिज़नेस का हिसाब-किताब करते देखा.
साथ ही विशेष रूप से वे क्षण भी रोमांचक थे जब महिलाएं एक क्लास से दूसरी क्लास में जाने और सर्टिफिकेट-पुरस्कार पाने के लम्हे पर खुश होती थीं.
सुधार केंद्रों के अंदर और बाहर मेरा काम रहता था कि मैं महिलाओं के लिए कैसे प्रेरक बनूं ताकि वे अपनी क्षमता का पूरा एहसास कर सकें.
शिक्षा एक अद्भुत उपकरण है जो महिलाओं को अवसर देता है और उन्हें अपने जीवन को नियंत्रित करने में मदद करता है.
'एजुकएड' के ज़रिए शिक्षा तक मेरी पहुंच हो सकी और इसने मुझे परिवर्तन के लिए एक एजेंट होने की मेरी क्षमता को संभव बनाया. मैं और भी दूसरी नौजवान महिलाओं की मदद करना चाहती हूं ताकि सिएरा लियोन और दूसरी जगहों पर महिलाओं के लिए न्याय और बराबरी देख सकें.
दुर्भाग्य से इबोला बीमारी के बाद हालिया आर्थिक संकट के बाद मानवाधिकार संगठनों की फंडिंग में कमी आई है. इसके कारण पिछले दस सालों में ऐसी कक्षाओं को पहली बार स्थगित किया गया.
जेल में मौजूद महिला कैदी चाहती हैं कि कक्षाएं फिर से शुरू हों ताकि रिहाई के बाद उनका भविष्य सुनहरा बन सके.
100 महिलाएं क्या है?
बीबीसी हर साल पूरी दुनिया की प्रभावशाली और प्रेरणादायक महिलाओं की कहानियां दुनिया को बताता है. इस साल महिलाओं को शिक्षा, सार्वजनिक स्थानों पर शोषण और खेलों में लैंगिक भेदभाव की बंदिशें तोड़ने का मौका दिया जाएगा.
आपकी मदद से ये महिलाएं असल ज़िंदग़ी की समस्याओं के समाधान निकाल रही हैं और हम चाहते हैं कि आप अपने विचारों के साथ इनके इस सफ़र में शामिल हों.
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