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#100Women: कार्टूनों से अरब समाज को हिलाने वाली महिलाएं
- Author, सेवरिन ड्यूडन और नाओमी शर्बल-बॉल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
कुछ अरब देशो में पासपोर्ट बनवाने, शादी करने या देश से बाहर जाने जैसे मामलों में किसी पुरुष रिश्तेदार से इजाज़त लेनी होती है. हालांकि "पुरुष अभिभावक" की बात क़ानून में शामिल नहीं की गई है, पर यह कई परिवारों के रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल है.
बीबीसी ने #100 Women श्रृंखला में उत्तर अफ़्रीका की तीन महिला कार्टूनिस्टों से बात की और उनसे कहा कि वे जरा बताएं कि उनके देश में परंपराएं किस तरह महिलाओं की ज़िंदगी को प्रभावित करती हैं.
पुरस्कार जीत चुकी मिस्र की कार्टूनिस्ट दोआ-अल-अदल ने कहा, "हमारे देश में पुरुष अभिभावक के प्रतीक को दिखाने वाली सबसे बड़ी चीज है दुल्हन. खाड़ी के देशों से धनी लोग मिस्र के ग़रीब ग्रामीण इलाक़ों से कम उम्र की युवा दुल्हन अस्थाई तौर पर ख़रीद लाते हैं."
अल अदल राजनीतिक कार्टून बनाती हैं, लड़कियों के ख़तना और उनके यौन उत्पीड़न जैसे मुद्दे उठाती रहती हैं. वे कई बार अदालतों के चक्कर काट चुकी हैं और उन पर ईश निंदा के आरोप लग चुके हैं.
युवा दुल्हन का मतलब है वे लड़कियां जो मिस्र में क़ानूनी तौर पर शादी करने की उम्र 18 साल की हो चुकी हों, पर उनके परिवार वाले उनकी शादी उनसे काफ़ी अधिक उम्र के विदेशियों से कर देते हैं.
कई मामलों में ये लोग इस शादी को कम समय की व्यवस्था मानते हैं और कुछ दिनों के बाद ही उस लड़की को छोड़ देते हैं.
अल अदल बताती हैं कि इस तरह के विवाह को रोकने के मक़सद से पेश किया गया क़ानून दरअसल इसे बढ़ावा ही देता है.
इसके मुताबिक़, यदि कोई विदेशी अपने से 25 साल से अधिक छोटी महिला से शादी करना चाहता है तो उसे उसके परिवार वालों को 6,000 डॉलर की रक़म देनी होगी.
खाड़ी के धनी लोगों को लिए यह छोटी रकम है, लेकिेन मिस्र में आर्थिक बदहाली से जूझ रहे ग़रीब परिवारों के लिए यह बड़ी बात है.
अल अदल कहती हैं, "दरअसल, इन समाजों के लोग अपनी बेटयों को बेच देते हैं. और सरकार उन्हें ऐसा करने से रोकने में नाकाम रही है."
ट्यूनीशिया की कार्टूनिस्ट नादिया खैरी ने बीबीसी से कहा, "मैंने जब कार्टून बनाना शुरू किया, मैं इसे बग़ैर किसी नाम से करती थी और लोगों को लगता था कि यह कोई पुरुष है."
वे आगे कहती हैं, "ये लोग यह सोच भी नहीं सकते थे कि कोई औरत चित्र बना सकती है, हास्य-विनोद से भरे स्केच बनाने की तो बात ही छोड़िए."
खैरी "विलिस-बिल्ली" के कार्टून के लिए मशहूर हैं. इस बिल्ली के दुस्साहसिक क्रिया कलाप क्रांति के बाद के ट्यूनीशिया के हालात पर टिप्पणी करते हैं.
उन्होंने ट्यूनीशियन टीवी पर एक विवादित शो के पुरुष होस्ट की टिप्पणी के बाद कार्टून बनाने का फ़ैसला किया. उस होस्ट को अक्टूबर में निलंबित कर दिया गया.
होस्ट ने शो के दौरान कहा था कि जो युवती तीन लोगों से बलात्कार की वजह से गर्भवती हो गई, उसे उनमें से किसी एक से शादी कर लेनी चाहिए.
खैरी कहती हैं कि क्रांति के बाद 2014 में बने क़ानून में स्त्री-पुरुष समानता के प्रावधान होने के बावजूद इस तरह की मानसिकता बरक़रार है.
वे कहती हैं, "किसी औरत का जिस्म उसके परिवार का है और उसके साथ यौन हिंसा होने पर भी परिवार की इज्जत बचाना सबसे महत्वपूर्ण है."
वे जोड़ती हैं, ट्यूनीशिया प्रशासन बलात्कार को उसी रूप में मंजूर नहीं करती है. इसे गंभीर अपराध नहीं माना जाता है.
रिहाम एलूर पहली महिला हैं, जिनके कार्टून मोरक्को के किसी अख़बार में छपे.
उनका जन्म दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को है और वे कहती हैं कि वे "जन्मजात नारीवादी" हैं.
बचपन का शौक बड़े होने पर पेश बन गया. संयुक्त राष्ट्र की संस्थान यूनेस्को ने उन्हें 15 साल पहले पुरस्कार दिया था.
उनके कार्टूनों का विषय है विदेश भ्रमण और किस तरह मोरक्को के मर्द क़ानूनों का सहारा लेकर अपनी पत्नी का विदेश भ्रमण रुकवाते हैं.
मोरक्को में 2004 और 2014 में हुए सुधारों के तहत पुरुष अभिभावक से जुड़े कई क़ानून ख़त्म कर दिए गए. लेकिन महिलाएं यदि विदेश दौरे पर अपने साथ बच्चे भी ले जाना चाहें तो उन्हें पति की अनुमति लेनी होती है.
एलूर कहती हैं, "पुरुष इसका इस्तेमाल महिलाओं की ज़िंदगी पर नियंत्रण करने के लिए कर सकते हैं."
रिहाम एलूर अपने अख़बार में काम करने वाली अकेली महिला कार्टूनिस्ट हैं.
उन्हें पक्का विश्वास है कि वे मोरक्को में महिलाओं के प्रति मौजूद नजरिए को बदलने में कामयाब ज़रूर होंगी.
वे कहती हैं, "मैं चाहती हूं कि मेरे कार्टून औरतों को अपने हक़ों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करें. मैं नहीं चाहती कि वे रोती रहें. मैं योद्धा हूं. सभी महिलाएं योद्धा हैं."