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#100Women: भारतीय संसद में कितनी महिलाएं पहुंचती हैं?
- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बीबीसी की विशेष सीरीज़ #100Women के लिए मैंने भारत की पहली लोकसभा से अब तक चुनी गई महिला सांसदों के बारे में जानकारी जुटाई.
ये आंकड़े चौंकाने वाले थे. सोलह लोकसभा चुनाव होने के बाद भी देश की राजनीति में महिलाएं हाशिए पर ही दिखती हैं.
पढ़ें- संसदीय चुनावों में 16 में से 8 बार महिला सांसद चुनने वाले यूपी के मोहनलालगंज में क्या ख़ास है?
लोकसभा की 543 में से 269 यानी क़रीब आधी सीटों पर आज तक एक भी महिला सांसद नहीं चुनी गई है.
गुजरात का गांधीनगर, हरियाणा का गुरुग्राम, कर्नाटक का मैसूर, मध्य प्रदेश का उज्जैन, तेलंगाना का हैदराबाद और बिहार का नालंदा इसमें शामिल हैं.
उत्तर-पूर्व के राज्य जहां समाज में औरतों का दर्जा बेहतर माना जाता है, वहां भी राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व न के बराबर है.
अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम और त्रिपुरा राज्य से एक भी महिला सांसद नहीं चुनी गई है.
महाराष्ट्र के पुणे, राजस्थान के अजमेर, तमिलनाडु के कन्याकुमारी, उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर और केरल के तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में एक ही बार महिला सांसद चुनी गईं हैं.
ऐसी 130 सीटें हैं जहां से महिला सांसद सिर्फ़ एक ही बार चुनी गईं हैं, यानी किसी भी लोकसभा चुनाव क्षेत्र से महिला सांसदों का बार-बार चुना जाना कम ही देखा गया है.
1952 में पहली लोकसभा से 2014 में 16वीं लोकसभा तक के आंकड़ों को देखें तो सिर्फ़ 15 सीटें ऐसी हैं जहां महिला सांसद पांच बार से ज़्यादा बार चुनी गईं.
इनमें भी ज़्यादातर या तो किसी राजनीतिक पार्टी का गढ़ रही हैं या फिर उनमें वर्चस्व वाली औरत चुनी गईं, जैसे मध्य प्रदेश के इंदौर से सुमित्रा महाजन या फिर पश्चिम बंगाल के पंसकुरा से वामपंथी नेता गीता मुखर्जी.
आरक्षण का रास्ता हो या पार्टियों में मंथन, लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या उनकी आबादी के अनुपात के क़रीब आने में भी अभी बहुत व़क्त लगेगा.
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