म्यांमार के फ़ौजी जनरल ने कहा, संकट के लिए रोहिंग्या ज़िम्मेदार

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म्यांमार के टॉप जनरल ने संकट के लिए रोहिंग्या लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया है. रोहिंग्या संकट की वजह से हज़ारों लोगों को सीमा पार कर बांग्लादेश जाना पड़ा है.
जनरल मिन ऑन्ग लैंग ने कहा कि 'रोहिंग्या कभी भी एक जातीय समूह नहीं रहे हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि ''चरमपंथी'' उत्तरी रखाइन प्रांत में अपना गढ़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
म्यांमार की सेना पर रखाइन प्रांत में आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप लगे हैं जिसकी वजह से रोहिंग्या पलायन कर रहे हैं.
हालांकि म्यांमार इन आरोपों से इनकार करता रहा है और उसका कहना है कि वो चरमपंथी हमलों का जवाब दे रहा है.
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि रोहिंग्या के ख़िलाफ़ किए जा रहे हमले जातीय सफ़ाए के रूप में तब्दील हो सकते हैं.
रखाइन प्रांत में रहनेवाले ज़्यादातर लोग मुस्लिम हैं जबकि म्यांमार की 90 फ़ीसदी आबादी बौद्ध है.

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इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची के पास रोहिंग्या लोगों पर सेना की आक्रामक कार्रवाई को रोकने का अब आख़िरी मौक़ा है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बीबीसी से कहा कि यदि अब भी वो कुछ नहीं करतीं तो "यह त्रासदी बहुत विकराल होगी."

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"त्रासदी बिल्कुल ही डरावनी होगी"
म्यांमार का कहना है कि वो पिछले महीने के चरमपंथी हमलों के जबाव दे रहा है. उसने इससे भी इंकार किया कि इस दौरान वो नागरिकों को लक्षित कर रहा है.
उत्तर रखाइन प्रांत में पुलिस पर हुए हमलों के बाद सेना ने अपना अभियान शुरू किया था.
बीबीसी के हार्ड टॉक कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस ने कहा कि आंग सान सू ची के पास सेना को रोकने का आख़िरी मौक़ा है जब वो मंगलवार को देश को संबोधित करेंगी.
उन्होंने कहा, "यदि अब वो स्थिति को बदलने की कोशिश नहीं करेंगी तो मुझे लगता है कि यह त्रासदी बिल्कुल ही डरावनी होगी और साथ ही बदकिस्मती से मुझे नहीं पता कि भविष्य में इसे कैसे बदला जा सकेगा."
"सेना अब भी मज़बूत स्थिति में"
महासचिव ने फ़िर कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को अपने घर वापस लौटने की अनुमति मिलनी चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि म्यांमार की सेना अब भी वहां मज़बूत स्थिति में है, रखाइन में जो वो कर रही है वैसा ही करने का दबाव डाल रही है.

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"रोहिंग्या पर ग़लत सूचनाएं दी जा रही"
म्यांमार (बर्मा) की जुंटा सरकार के दौर में नज़रबंद रखी गयीं नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित आंग सान सू ची की रखाइन के रोहिंग्या मसले पर अब आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.
सू ची न्यूयॉर्क में आगामी संयुक्त राष्ट्र आम सभा की बैठक में भाग नहीं लेंगी. उन्होंने दावा किया है कि इस मुद्दे को ग़लत सूचनाओं की वज़ह से तोड़ मोड़ कर पेश किया जा रहा है.
सू ची ने कहा कि इन फ़र्जी ख़बरों से चरमपंथियों के हितों को ही बढ़ावा मिल रहा है.
रोहिंग्या को किराये पर मकान नहीं
गुटेरेस की चेतावनी तब आयी जब बांग्लादेश ने कहा कि वो म्यामांर से आए केवल केवल 4 लाख रोहिंग्याओं को ही अपनी सीमाओं में स्वीकार करेगा.
बांग्लादेश की पुलिस ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को आवंटित इलाकों से कहीं और नहीं जाने की इजाज़त दी जाएगी, यहां तक कि परिवार या दोस्तों के साथ भी.
ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स और चालकों से कहा गया है कि वो शरणार्थियों को न चढ़ाएं तो वहीं मकान मालिकों से उन्हें किराया पर रखने से मना करने को कहा गया है.
कॉक्स बाज़ार के पास ही रहेंगे रोहिंग्या
बांग्लादेश ने कॉक्स बाज़ार के पास चार लाख रोहिंग्या शरणार्थियों के रहने की जगह बनाने की घोषणा की है.
विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश सरकार इस उम्मीद में कि रोहिंग्या को वापस म्यांमार या फ़िर किसी अन्य देश भेजा जा सके उन्हें आम जनता के बीच गुम होने से रोकना चाहती है.

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क्या है ताज़ा मामला?
25 अगस्त को रोहिंग्या चरमपंथियों ने म्यामांर के उत्तर रखाइन में पुलिस पोस्ट पर हमला कर 12 सुरक्षाकर्मियों को मार दिया था.
इस हमले के बाद सेना ने अपना क्रूर अभियान चलाया और तब से ही म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन जारी है. सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों को वहां से खदेड़ने के उद्देश्य से उनके गांव जला दिए और नागरिकों पर हमले किए.
बौद्ध बहुल इलाके रखाइन में रोहिंग्या अल्पसंख्यक हैं. म्यांमार में उनका लंबे समय से उत्पीड़न हो रहा है, जो ये कहते हैं कि रोहिंग्या अवैध अप्रवासी हैं.
बीबीसी को मिले प्रमाण
रखाइन छोड़कर गए लोगों में से कुछ ने इस महीने की शुरुआत में बीबीसी को वहां हो रही हत्या, बलात्कार और यहां तक की नरसंहार की जानकारी दी. बीबीसी के एक दल को भी रखाइन में जले हुए घरों के साक्ष्य मिले.
शुक्रवार को जारी एक नए ह्यूमन राइट्स वॉच रिपोर्ट में म्यांमार की सेना पर "जातीय हिंसा अभियान" और लक्ष्य कर गांवों में आगजनी के हमले करने के आरोप लगाए गए हैं.

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म्यांमार के अधिकारियों ने हिंसा के लिए रोहिंग्या के विद्रोहियों को दोषी ठहराया. वहीं सरकार के प्रवक्ता जॉ हैते निर्वासितों से रखाइन क्षेत्र में ही बनाए गए अस्थायी कैंपों में रहने का आग्रह किया है.
हालांकि, हैते ने कहा कि म्यांमार बांग्लादेश से आने वाले सभी लोगों को यहां आने की अनुमति नहीं देगा.
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