बरज़ानी की इराक़ सरकार को चेतावनी, "कुर्द अपनी सीमाएं निर्धारित करने को तैयार हैं"

इराक़ी कुर्दिस्तान के राष्ट्रपति ने संकेत दिए हैं कि यदि इस महीने होने वाले जनमतसंग्रह के नतीजे इराक़ सरकार ने स्वीकार नहीं किए तो वो भविष्य के कुर्दिस्तान की सीमाएं तय कर लेंगे.
कुर्दिस्तान में आज़ादी को लेकर इसी महीने जनमतसंग्रह होना है.
मसूद बरज़ानी ने बीबीसी से कहा है कि यदि कुर्द अलग देश बनाने के लिए मतदान करते हैं तो वो केंद्रीय सरकार के साथ समझौता चाहते हैं.
वहीं, इराक़ के प्रधानमंत्री ने इस जनमतसंग्रह को असंवैधानिक क़रार दिया है.
बरज़ानी ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी समूह किरकुक के हालात को ताक़त के दम पर बदलने की कोशिश करेगा तो कुर्द उससे लोहा लेंगे.
तेल समृद्ध और तुर्क और अरब आबादी वाले किरकुक का नियंत्रण इस समय कुर्द पशमरगा बलों के हाथ में है.

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शिया मिलिशिया लड़ाकों का कहना है कि किरकुक को किसी स्वतंत्र कुर्दिस्तान का हिस्सा नहीं बनने देंगे.
कुर्द मध्य पूर्व का चौथा सबसे बड़ा नस्लीय समुदाय है, लेकिन उनका कभी भी कोई स्थायी राष्ट्र नहीं रहा है.
इराक़ में कुर्दों की आबादी 15-20 प्रतिशत तक है, लेकिन यहां अरब समुदाय के नेतृत्व वाली सरकारों में उनका दशकों तक शोषण होता रहा.
1991 के खाड़ी युद्ध के बाद कुर्दों ने स्वायत्ता हासिल की थी.
कुर्दिस्तान की प्रांतीय सरकार और राजनीतिक दलों ने तीन महीने पहले स्वतंत्रता के मुद्दे पर जनमतसंग्रह कराने का फ़ैसला लिया था.
25 सितंबर को इस जनमतसंग्रह के लिए मतदान होना है.
कुर्द अधिकारियों का कहना है कि यदि लोग स्वतंत्र राष्ट्र के लिए मतदान करते हैं तो इसका मतलब तुरंत आज़ादी नहीं होगा बल्कि केंद्र सरकार के साथ अलग होने की लंबी बातचीत शुरू होगी.

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बरज़ानी ने बीबीसी से कहा, "ये पहला क़दम है. ये इतिहास में पहली बार होगा जब कुर्द लोग अपना भविष्य स्वतंत्र होकर तय करेंगे."
उन्होंने कहा, "जनमतसंग्रह के बाद हम बग़दाद के साथ सीमाओं, तेल संपदा और पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत करेंगे."
उन्होंने कहा, "हम ये क़दम उठाएंगे लेकिन अगर वो इसे स्वीकार नहीं करते हैं तो फिर ये अलग बात होगी."
अमरीका और ब्रिटेन ने चेतावनी दी है कि जब इराक़ चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट से लड़ रहा है ऐसे समय में स्वतंत्रता एक बड़ा ख़तरा हो सकती है.
बरज़ानी ने इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हुए कहा, "इस क्षेत्र में कब हमारे पास स्थायित्व या सुरक्षा थी जिसे खोने का डर हमें हो? इराक़ कब इतना एकजुट था कि हमें उसकी एकता ख़त्म करने की चिंता हो. जो ऐसा कह रहे हैं वो सिर्फ़ हमें रोकने के बहाने खोज रहे हैं."












