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पालने वाले मुस्लिम परिवार से अलग होगी ईसाई बच्ची
मुस्लिम परिवार में पल-बढ़ रही पांच वर्षीय एक बच्ची के मामले में जज ने कहा है कि उसे अब अपनी नानी के साथ रहना चाहिए.
स्थानीय प्रशासन, द लंदन बॉरो ऑफ टावर हैमलेट्स ने मीडिया में छपी उस रिपोर्ट को ख़ारिज़ किया है, जिसमें कहा गया था कि बच्ची को पाल रहा मुस्लिम परिवार अंग्रेज़ी नहीं बोल सकता.
उन्होंने कहा है कि बच्ची को पाल रहा परिवार अंग्रेज़ीभाषी है और कई नस्ल के लोग उस परिवार में हैं.
टावर हैमलेट्स काउंसिल ने कहा कि वह शुरू से बच्ची को उसके किसी रिश्तेदार की देखभाल में रखना चाहते थे.
बच्ची के भविष्य को ले कर यह फैसला फैमिली कोर्ट की जज ख़ातून सपनारा ने मंगलवार को किया. इस संबंध में जल्द ही वो आदेश जारी कर सकती हैं.
बच्चों की पहचान उजागर न करने के संबंध में कानूनी रोक के बावजूद कई अख़बारों ने लिखा कि एक ईसाई बच्ची पर मुस्लिम पालक परिवार अपनी परंपराओं और मूल्यों को थोपने की कोशिश रहा है.
'रिपोर्ट में कई ग़लतियां'
टावर हेलमेट्स काउंसिल ने कहा कि रिपोर्ट में कई 'ग़लतियां' हैं, ख़ासकर वो दावा कि ये परिवार अंग्रेजी नहीं बोल सकता. बच्ची की पहचान छिपाने के मकसद से इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी गई.
एक बयान में काउंसिल ने कहा कि टावर हेलमेट्स काउंसिल बच्चों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है.
काउंसिल के मुताबिक, "किसी बच्चे को पालने वाले परिवारों का चुनाव कई आधारों पर किया जाता है. यह देखा जाता है कि उस परिवार की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि क्या है और बच्ची के परिवार और स्कूल से वह कितना नजदीक है. यह कोशिश की जाती है कि बच्ची अपने परिवार से जुड़ी रह सके."
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