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क्या बार्सिलोना जैसे हमले रोकना मुश्किल है?
- Author, गोर्डन कोरेरा
- पदनाम, बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता
बार्सिलोना यूरोप के उन शहरों में शुमार हो गया है जहां भीड़ पर कोई वाहन चढ़ाने की घटनाएं पहले हो चुकी हैं.
पिछले साल फ्रांस के नीस में 'बास्तिल डे' परेड में आतिशबाज़ी देखने पहुंचे लोगों को निशाना बनाया गया था.
पेरिस के अलावा ब्रिटेन में लंदन और स्टॉकहोम में भी इस तरह के हमले हो चुके हैं.
जर्मनी के बर्लिन में मशहूर क्रिसमस मार्केट पर भी हमला हो चुका है.
हाल ही में ब्रिटेन में फिन्सबरी पार्क में मुस्लिमों को निशाना बनाया गया.
एक हद के बाद बेबस
माना जा रहा है कि आम लोगों की भीड़ जैसे 'सॉफ्ट टार्गेट' को निशाना बनाने का हमले का ये सस्ता तरीका है.
ब्रिटेन में इस तरह के हमले के बाद सुरक्षा के इंतज़ाम कड़े करने की योजना है.
यहां तक कि किराए पर वैन देने के मानकों पर भी विचार हो रहा है.
लेकिन यूरोप में सुरक्षा विशेषज्ञ ये जानते हैं कि इस तरह के हमले की पहचान करना और रोकने में वो एक हद के बाद बेबस हो जाते हैं.
इसकी वजह ये है कि इस तरह के हमले में इस्तेमाल होने वाले हथियार आसानी से उपलब्ध है.
योजना, प्रशिक्षण के स्तर पर भी ज़्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती.
ख़ुफ़िया अधिकारी कुछ ही लोगों की पहचान कर सकते हैं, इसलिए आने वाले दिनों में इस तरह के हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.
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