वुसत का ब्लॉगः पप्पू सत्ता के परचे में पास होगा या फेल!

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- Author, वुसतुल्लाह खान
- पदनाम, पाकिस्तान से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
आपके यहां इन दिनों जीएसटी को लेकर जितनी हाहाकार मची पड़ी है उससे दस गुना उधम हमारे पाकिस्तान में जेआईटी यानी ज्वाइंट इनवेस्टिगेशन टीम को लेकर मचा पड़ा है
जीएसटी तो मोदी सरकार ने लागू किया मगर पाकिस्तान में जेआईटी सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री और उनके परिवार पर लागू कर दी.
आपके यहां व्यापारी जीएसटी को अन्याय और मोदी सरकार न्याय जता रही है और हमारे यहां जेआईटी को शरीफ़ सरकार अन्याय और जनता न्याय समझ रही है.
पल्ले से रकम कोई भी नहीं ढीली करना चाहता. न भारत में जीएसटी का मारा व्यापारी और न पाकिस्तान में जेआईटी का मारा हुक्मरान व्यापारी परिवार.
सुप्रीम कोर्ट के पांच में से दो जजों ने कहा प्रधानमंत्री ने पनामा केस में अपने परिवार के बारे में मालूमात या तो छुपाई या फिर आधा सच बोला.
इसलिए पप्पू सत्ता के परचे में फेल है.

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पास या फेल
मगर तीन जजों ने कहा, हो सकता है पप्पू फेल हो लेकिन वायवा यानी ज़बानी इम्तिहान लेने में कोई हर्ज़ नहीं.
अगर वायवा क्लीयर कर लिया तो पप्पू पास वरना फेल.
और ये वायवा लेगी ज्वाइंट इनवेस्टिगेशन टीम जिसमें आईएसआई, मिलेट्री इंटेलिजेंस, स्टेट बैंक सिक्यूरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन, फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू और फेडरल इनवेस्टिगेशन एजेंसी एफआईए, इनका एक-एक एक्ज़ामनर बैठेगा.
पप्पू ने कहा मुझे कोई आपत्ति नहीं.
मैं सुप्रीम कोर्ट की बनाई जेआईटी को वायवा देने को तैयार हूं मगर मुझसे अगर आउट ऑफ सिलेबस सवालात पूछे गए तो उनका जवाब नहीं दूंगा.

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सवाल
लेकिन जेआईटी पर चूंकि सुप्रीम कोर्ट का हाथ है इसलिए पप्पू से हर तरह का सवाल पूछा गया.
जबकि पप्पू ने सिर्फ पांच सवालों के जवाब का रट्टा लगाया हुआ था.
और फिर फड्डा शुरू हो गया. और पप्पू ने जेआईटी पर अविश्वास जता दिया.
आज जेआईटी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को पेश करेगी और सुप्रीम कोर्ट वायवा में पप्पू की प्रोग्रेस का जायजा लेकर फ़ैसला करेगी कि पप्पू सत्ता के परचे में पास है या फेल.

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आपके यहां तो भले लालू जी हों कि स्वर्गवासी जयललिता, जेल की लॉन्ड्री में कपड़े धुल-धुला के दोबारा पहनने का इंतज़ाम है.
मगर हमारे यहां फाइव स्टार नेताओं को जेल भेजने का फ़ैशन बहुत पहले ही आउट ऑफ फ़ैशन हो गया.
आखिरी क़ैदी आसिफ अली ज़रदारी थे जो दो दस वर्ष जेल में रहे पर उन पर एक भी आरोप साबित न हो सका.
अब अगर नवाज़ शरीफ़ पर लगे आरोप सच साबित हो जाते हैं तो ज़्यादा से ज़्यादा ये होगा कि वो पांच वर्ष चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.
लेकिन इससे कोई ख़ास फर्क़ नहीं पड़ने वाला.

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बैटिंग लाइन
नवाज़ शरीफ परिवार की भी बैटिंग लाइन भी इंडियन क्रिकेट टीम की तरह सात बल्लेबाज़ों तक जाती है.
आपने अमिताभ बच्चन की फिल्म सरकार तो देखी होगी. हमारे सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने भी शायद देखी है.
तभी तो पनामा केस का फ़ैसला बालजाक की इस लाइन से शुरू होता है हर बड़ी पूंजी के पीछे जुर्म छुपा हुआ है.
और जब यही पूंजी राजनीति के साथ सात फेरे लेले तो लोकतंत्र कपड़े फाड़ के जंगल की ओर निकल पड़ता है.
मगर जंगल में भी लोकतंत्र को क्या मिलेगा? वहां भी तो जंगल का क़ानून है.
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