उत्तर कोरिया से रिहा हो कर लौटे छात्र की मौत

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बीते सप्ताह उत्तर कोरिया में 15 महीनों की कैद से रिहा हो कर अमरीका लौटे अमरीकी छात्र 22 वर्षीय आटो वार्मबियर की मौत हो गई है.
वार्मबियर के पिता ने उनकी मौत की पुष्टि की है.
आटो वार्मबियर के परिवार ने एक विज्ञप्ति में कहा कि उनके बेटे की मौत परिवार के सदस्यों के बीच दोपहर 2.20 को हुई.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने आटो की मौत पर शोक प्रकट किया है और कहा है कि उत्तर कोरिया एक क्रूर सत्ता है और वहां पर आटो को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
उन्होंने कहा, "किसी भी परिवार के लिए कम उम्र में अपने बच्चे को खोने से अधिक दुखदायी कुछ नहीं होता."
ओटो वार्मबियर कोमा में कैसे पहुंचे ये अभी पता नहीं चल पाया है.
कोमा की स्थिति में हुए थे रिहा

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उत्तर कोरिया ने वार्मबियर को कोमा की स्थिति में रिहा किया था. अमरीका पहुंचते ही उन्हें सिनसिनाटी में उनके घर के नज़दीक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें गंभीर दिमागी चोटें थीं.
उत्तर कोरिया के अनुसार कि आटो वार्मबियर की हालत के लिए बोट्युलिज़्म और नींद की गोली ज़िम्मेदार है.
हालांकि अमरीकी डॉक्टरों ने इस दलील को मानने से इंकार कर दिया था.
आटो के पिता का आरोप है कि उत्तर कोरिया में उनके बेटे पर जुल्म किए गए हैं जिसके चलते उनकी मौत हो गई.
'उत्तर कोरिया के ज़ुल्मों से गई जान'

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वार्मबियर परिवार ने विज्ञप्ति में कहा है, "जब जून की 13 तारिख को वार्मबियर घर लौटे तो वो बात करने, देख सकने या किसी के बात सुनने की हालत में नहीं थे. वो सहज नहीं दिख रहे थे और परेशान थे."
उनका कहना है, "घर लौटने के एक दिन बाद उनके चेहरे के भाव बदले और वो शांत थे. मुझे लगता है कि वो महसूस कर पा रहे थे कि वो घर लौट आए हैं."
इससे पहले बीते सप्ताह एक प्रेस वार्ता के दौरान आटो के पिता फ्रेड वार्मबियर ने कहा था कि उन्होंने 15 महीनों तक उनके बेटे के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.
उन्होंने कहा था, "सिर्फ़ एक हफ़्ते पहले उत्तर कोरिया की सरकार ने किया कि आटो वार्मबियर पूरे एक साल से कोमा में थे."
चोरी की सज़ा 15 साल सश्रम कारावास

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वर्जिनिया विश्वविद्यालय के छात्र वार्मबियर को बीते साल जनवरी में उत्तर कोरिया का दौरा करते समय एक होटल से प्रचार चिन्ह की चोरी करने की कोशिश के लिए गिरफ्तार किया गया था.
उन्हें 15 साल के कठिन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी.
उनके दिमाग़ में गंभीर चोटें आने के कारण उन्हें मेडिकल आधार पर उत्तर कोरिया से रिहा किया गया था.
बाद में सरकारी टीवी पर आटो ने कहा था कि एक चर्च समूह ने उनसे यात्रा की निशानी लाने को कहा था. उन्होंने यह भी कहा था कि यह उनकी ज़िंदगी की बड़ी भूल थी.
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