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पाकिस्तानी छात्र मशाल खान की मां- 'मेरा अल्लाह उनसे बदला लेगा'
- Author, इरम अब्बासी
- पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता, सवाबी
'मैं सोचती थी कि मेरा बेटा बड़ा होकर नाम कमाएगा. मेरा सहारा बनेगा लेकिन इतनी बेदर्दी से उसकी हत्या कर दी गई. किसी ने मशाल की हिफ़ाज़त नहीं की. उन्हें क्या सज़ा मिलेगी जिन्होंने मेरे बेटे पर झूठे इलज़ाम लगाए?'
यह कहना है मशाल खान की माँ सैयदा गुलज़ार बेगम का जिनसे मिलने मैं सवाबी के पास उनके गांव ज़ैदा गई. पाकिस्तानी छात्र मशाल पर ईशनिंदा के आरोप लगाए गए थे.
जब मशाल ने एफ़ए (बारहवीं कक्षा) में टॉप किया तो गांव के चौक पर लगी होर्डिंग को उनकी तस्वीरों से सजाया गया था लेकिन अब इस बोर्ड पर अब उसके चेहलुम (40वें) की तस्वीरें हैं.
घर में घुसते ही एक चारपाई पर 23 वर्षीय मशाल का बचा खुचा सामान दिखता है. इसे पुलिस ने कुछ दिन पहले ही लौटाया है.
यूनिवर्सिटी हॉस्टल
मशाल के कपड़े हैं, कुछ किताबें हैं और 270 रुपये हैं. लेकिन कैमरा, लैपटॉप, फोन जैसी कीमती चीजें यूनिवर्सिटी हॉस्टल से चोरी हो गई थीं.
मशाल की मां रह-रह कर उसके कपड़े और किताबें चूमतीं और कहतीं, 'अल्लाह ने मुझे होनहार बेटा दिया था लेकिन इन जालिमों ने मुझसे मेरे जिगर का टुकड़ा छीन लिया. मेरा अल्लाह उनसे बदला लेगा.'
हाल ही में मशाल खान की हत्या की जांच रिपोर्ट सामने आई है जिसमें कहा गया है कि मशाल खान पर मजहब की तौहीन करने का झूठा इलज़ाम लगाया गया था.
उनके कत्ल को कथित तौर पर सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया, जिसमें यूनिवर्सिटी के अफ़सर और पख्तून छात्र संघ के अध्यक्ष शामिल हैं.
मशाल खान छात्रों की समस्याओं और यूनिवर्सिटी में होने वाले कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए जाने जाते थे.
मजहब की तौहीन
13 अप्रैल को यूनिवर्सिटी में शोर मचा कि मशाल खान और उनके दो दोस्तों ने इस्लाम का अपमान किया है जिसके बाद छात्रों की एक भीड़ ने मशाल खान को घेर लिया और मार डाला. मशाल को तीन गोलियां भी मारी गईं थीं.
मशाल खान के पिता इकबाल खान कहते हैं, 'मशाल का शव खून से लथपथ था. उसके सिर पर पत्थर और गमले मारे गए थे. उसके हाथ पर चाकू के जख्म थे. हमने जल्दी-जल्दी रूई से उसके बदन को अंतिम संस्कार से पहले साफ किया ताकि उसकी माँ ये सब देख न सके क्योंकि उससे ये बर्दाश्त नहीं होता.'
उनका कहना था, 'गजब तो ये है कि मेरे इतने नेक बेटे पर मजहब की तौहीन का आरोप लगाया गया.'
इकबाल खान जेआईटी रिपोर्ट से संतुष्ट हैं, 'मैं चाहता हूं कि जो लोग अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं, उन्हें पकड़ा जाए. पुलिस ने अभिनेताओं को तो पकड़ लिया लेकिन जिन्होंने ये नाटक लिखा, वे अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं.'
ईशनिंदा कानून
इस घटना ने एक बार फिर ये सवाल उठाया है कि आखिर इन लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए जो निजी स्वार्थों के लिए ईशनिंदा कानून का ग़लत इस्तेमाल करते हैं?
इस संबंध में बीबीसी से बात करते हुए पीपीपी के सीनेटर फरहतउल्ला बाबर कहते हैं, 'रिपोर्ट के बाद ये साफ है कि मशाल खान ईशनिंदा का दोषी नहीं. ईशनिंदा कानून के नाम पर उसका कत्ल किया गया है. मैं समझता हूँ कि उसकी शहादत बेकार नहीं जाएगी और यही मौका है कि सरकार ईशनिंदा कानून के बेजा इस्तेमाल के खिलाफ कदम उठाए.'
उनका कहना था, "जब यह साबित हो जाए कि ईशनिंदा कानून का गलत इस्तेमाल हुआ है तो उसकी सजा भी वही होनी चाहिए जो ईशनिंदा के दोषी को मिलती है.'
ईशनिंदा कानून के गलत इस्तेमाल की निंदा तो सब करते हैं लेकिन ज़मीनी बदलाव के लिए कानून तो दूर की बात हुई, लोग बात करने से भी कतराने लगते हैं.
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