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ईशनिंदा में युवक की हत्या से सकते में पीएम नवाज़
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने इस्लाम के ख़िलाफ़ ईशनिंदा के आरोप में एक यूनिवर्सिटी स्टूडेंट की हत्या को दुखद और हैरान करने वाला बताया है.
उन्होंने कहा कि सरकार इस चीज़ को बर्दाश्त नहीं करेगी कि लोग अपने हाथों में क़ानून ले लें. पत्रकारिता के इस छात्र को उसके साथी छात्रों ने कैंपस में ही बेरहमी से मार दिया. अधिकारियों का कहना है कि इस हत्या में आठ लोगों पर हत्या और आतंकवाद का मामला तय किया गया है.
पाकिस्तान में ईशनिंदा एक संवेदनशील मामला है. यह पाकिस्तान में दहशत फैलाने वाला मुद्दा है. आलोचकों का कहना है कि ईशनिंदा के कुछ मामलों में पाकिस्तान में सज़ा-ए-मौत का प्रावधान है. दावा है कि अक्सर इसका इस्तेमाल पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को सताने के लिए किया जाता है.
जिस स्टूडेंट की हत्या की गई उसकी पहचान मशाल ख़ान के रूप में हुई है. मशाल पर इस्लाम की निंदा करने वाली पोस्ट सोशल मीडिया पर डालने का आरोप था. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के उत्तरी शहर मर्दान में अब्दुल वाली ख़ान यूनिवर्सिटी के होस्टल में मशाल को निर्वस्त्र कर मार दिया गया.
ऑनलाइन पोस्ट किए गए ग्राफ़िक वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि दर्जनों लोग मशाल पर इमारत के बाहर पैरों के साथ कई चीज़ों से प्रहार कर रहे हैं. मारने वाली चीज़ों में लकड़ी का तख़्ता भी है. वीडियो में अर्द्धनग्न शरीर ज़मीन पर तड़पता दिख रहा है.
पीएम नवाज़ शरीफ़ ने सोशल मीडिया पर ईशनिंदा वाली टिप्पणियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया था. अब उन्होंने इस हत्या की निंदा की है. गुरुवार को हुई हत्या में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का यह पहला बयान आया है.
उन्होंने कहा, ''इस जुर्म की निंदा करने के लिए सभी देशवासियों को एक साथ आना चाहिए. हमें सहिष्णुता और समाज में क़ानून के राज को प्रोत्साहित करना चाहिए. इस अपराध को अंजाम देने वालों को पता होना चाहिए कि सरकार इस चीज़ को बर्दाश्त नहीं करेगी कि लोग क़ानून अपने हाथ में ले लें.''
पुलिस ने उन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है जिसमें कहा जा रहा है कि अधिकारियों ने मशाल ख़ान को बचाने की कोशिश नहीं की. पुलिस का कहना है कि उसके पहुंचने से पहले ही मशाल ख़ान को मार दिया गया था. पुलिस ने इस मामले में 12 लोगों को गिरफ़्तार किया है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस हत्या के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन किया है. इन्होंने शनिवार को इस हत्या की कड़ी निंदा की है. पाकिस्तान में यूएन ने इस वाकये को लेकर प्रशासन से कड़ा क़दम उठाने का आग्रह किया है और इसे अंजाम देने वालों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने की अपील की है.
चश्मदीदों ने मीडिया से कहा कि मशाल ख़ान को दूसरे स्टूडेंट उदार और धर्मनिरपेक्ष विचार के कारण पसंद नहीं करते थे. जिस दिन मशाल की हत्या हूई उस दिन क्लास में गर्मागर्म बहस हुई थी.
शुक्रवार को जब मशाल ख़ान की अंत्येष्टि हुई तो स्थानीय मस्जिद के इमाम ने इससे जुड़े अनुष्ठानों को पूरा करने से इनकार कर दिया था.
मशाल के पिता इक़बाल ख़ान का कहना है कि ईशनिंदा के आरोप में सच्चाई नहीं है. उन्होंने रॉयटर्स से कहा, ''पहले उन्होंने मेरे बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी और अब वे इस आरोप के ज़रिए मेरे जख़्म पर नमक छिड़क रहे हैं.''
हाल की एक थिंक टैंक की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में 1990 से अब तक ईशनिंदा के मामले में 65 लोगों की हत्या की जा चुकी है.