वो लोग जिन्हें ईशनिंदा का आरोप लगाकर मार दिया गया

पाकिस्तान में 23 वर्षीय छात्र मशाल ख़ान की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या होने की घटना सामने आई है. मशाल खान पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था. लेकिन पाकिस्तान में कथित धर्मरक्षकों की भीड़ द्वारा लोगों को मारे जाने का मामला नया नहीं हैं. मानवाधिकार वकील राशिद रहमान, उदारवादी नेता सलमान तासीर, पाक पंजाब के ईसाई दंपति और अहमदिया समुदाय आक्रोशित भीड़ के हमलों के शिकार हुए हैं.

मानवाधिकार वकील राशिद रहमान

राशिद रहमान एक जानेमाने मानवाधिकार वकील थे. रहमान उन चुनिंदा वकीलों में शामिल थे जो ईशनिंदा का आरोप झेल रहे लोगों का केस लड़ते थे. 8 मई, 2014 को दो बंदूकधारियों ने राशिद रहमान के ही ऑफ़िस में उनकी हत्या कर दी.

हत्या के बाद मुल्तान शहर के अदालत परिसर में वकीलों के चैंबरों के पास पर्चे बांटे गए जिनमें लिखा था "ईशनिंदा करने वालों की रक्षा करने वाले राशिद का अंत हुआ."

अहमदिया समुदाय पर भीड़ का हमला

साल 2014 की जुलाई में अहमदियों के घरों पर भीड़ ने आग लगा दी. झगड़ा क्रिकेट के मैदान से शुरू हुआ, लेकिन एक अहमदिया युवा पर ईशनिंदा का आरोप लगा. इसके बाद उग्र भीड़ ने क़रीब एक दर्जन अहमदियों के घरों में आग लगा दी जिसमें झुलस कर एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई.

सारा (असली नाम बदल दिया गया है) इसी मकान में आग से बच जाने वाली वह महिला हैं जिनके नवजात बच्चे, दो भतीजियों और मां के जीवन का फ़ैसला किसी अदालत ने नहीं बल्कि एक भीड़ ने इसी गली में किया.

सारा उस भयंकर रात के बारे में कहती हैं, "जब लोग हमारे घर जला रहे थे तब सभी औरतें और बच्चे एक कमरे में बंद थे. मेरी मां की धुएं की वजह से दम घुटने से मौत हो गई और मैं ख़ुद भी एक हफ़्ते तक ज़िंदगी और मौत के बीच झूलती रही."

सारा कहती हैं कि उन्हें आज भी सांस की गंभीर बीमारी है, लेकिन उनके मन से वह पल नहीं भुलाए जाते जब उनका परिवार आग की तीव्रता और धुएं से बिलबिला रहा था और बाहर जमा भीड़ ठहाके लगा रही थी और मकान के अंदर से सामान लूटा जा रहा था.

उन्होंने सिसकियाँ लेते हुए बताया, "मेरी मां ने मुझसे आख़िरी बार पानी मांगा और मेरे पास उन्हें देने के लिए पानी नहीं था. मेरी भतीजी ने सांस न ले पाने पर मेरे घुटने को ज़ोर से दबोचा और फिर धीरे-धीरे मौत के आगोश में चली गई."

ईसाई दंपति को ज़िंदा जलाया

पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में रहने वाले ईसाई दंपति शमा और शहजाद मसीह को कुरान जलाने का आरोप लगाकर जिंदा जला दिया गया. पांच महीने की गर्भवती पंजाब के गांव कोट राधा किशन में अपने तीन बच्चों के साथ रहती थीं. साल 2014 के नवंबर महीने में शमा अपने गुजरे हुए ससुर के सामान को जला रही थीं.

लेकिन गांव में अफ़वाह फैल गई कि ईसाई दंपति पवित्र कुरान के पन्नों को जला रहे थे. इसके बाद नजदीकी गांवों से मौलवियों ने मस्जिद के लाउड स्पीकर से एलान किया कि ईशनिंदा करने वालों के साथ वही सुलूक होना चाहिए जो उन्होंने कुरान के साथ किया.

इसके बाद सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटने में समय नहीं लगा. इस भीड़ ने शमा और शहजाद मसीह को पहले बार-बार पीटा. इसके बाद ईंट के भट्टे में झोंक कर दोनों की हत्या कर दी गई.

ईशनिंदा कानून बदलना चाहते थे तासीर

पाकिस्तान के उदारवादी नेताओं में गिने जाने वाले सलमान तासीर की हत्या को उनके ही सिक्योरिटी गार्ड ने अंजाम दिया. 4 जनवरी, 2011 को तासीर की हत्या करने वाला मुमताज क़ादरी एक मौलवी के दिए प्रवचन से प्रेरित हुआ था. इस प्रवचन में ईशनिंदा कानून में सुधार की बात करने वाले सलमान तासीर जैसे लोगों को 'वजीबुल कत्ल' यानी हत्या किए जाने लायक बताया गया था. पाकिस्तान में 21 अप्रैल को तीन लड़कियों को कथित रूप से एक शख्स को ईशनिंदा का आरोप लगाकर गिरफ्तार किया गया है.

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