सेक्स धंधे से जुड़ी थीं किम जोंग-नम को 'मारने वाली' महिलाएँ?

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उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के सौतेले भाई किम जोंग-नम की हत्या का आरोप दो महिलाओं पर हैं. दोनों मलेशिया में मुक़दमे का सामना कर रही हैं.
13 फ़रवरी 2017 को मलेशिया के कुआलालंपुर एयरपोर्ट पर दो महिलाओं ने कथित तौर पर एक जानलेवा रसायन से हमला करके किम जोंग-नम की जान ले ली थी.
प्रशासन का कहना है कि महिलाओं ने वी एक्स (नर्व एजेंट) नाम का रसायन इस्तेमाल किया था, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने 'सामूहिक विनाश का हथियार' बताकर बैन किया हुआ है.
दोनों आरोपी- 25 साल की सीती आइसा इंडोनेशिया और 28 साल की ज़ान दी होंग वियतनाम की नागरिक हैं. मंगलवार को उन्हें कुआलालंपुर कोर्ट में पेश होना है.
वे पीछे से आकर चेहरे पर कुछ रगड़ देती हैं
हमले की सीसीटीवी फ़ुटेज में दो महिलाएं पीछे से किम जोंग-नाम की ओर बढ़ती हैं और उन पर हमला कर देती हैं. इसी दौरान नॉर्थ कोरियाई माने जा रहे कुछ लोग आस-पास ये सब देख रहे हैं, जिन्हें उनका 'हैंडलर' कहा जा रहा है. इन लोगों ने घटना के बाद अलग-अलग जगहों के लिए फ़्लाइट ली थी.
दक्षिण कोरियाई मीडिया ने बग़ैर सुबूतों के हत्या के लिए किग जोंग उन की ओर इशारा किया.
हालांकि जोंग उन पर शक़ करने की वजह भी है. 2011 में उत्तर कोरिया की सत्ता संभालने के बाद से जोंग ने कई अधिकारियों को मौत की सज़ा दी है जो उनकी कुर्सी के लिए ख़तरा दिखे हैं.

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दोनों महिलाओं पर यह अपराध अंजाम देने का आरोप है, लेकिन इसकी योजना बनाने का नहीं. उनका कहना है कि उन्हें लगा कि यह सब एक टीवी प्रैंक के लिए हो रहा है.
इस घटना से महीनों पहले दोनों महिलाएं कुआलालंपुर में 'अनैतिक' कहे जाने वाले कामों में शामिल थीं. मलेशियाई पुलिस के मुताबिक, ज़ान दी होंग एक 'मनोरंजन आउटलेट' पर काम करती थी. जबकि सीती मसाज पार्लर वाले छोटे से फ़्लेमिंगो होटल में काम करती थी.'

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सेक्स कारोबार में शामिल हो सकती हैं महिलाएं?
मलेशियाई मीडिया में जिस तरह की ख़बरें चली हैं, उसके मुताबिक दोनों महिलाएं सेक्स कारोबार में शामिल हो सकती हैं. हालांकि इसके सीधे सबूत नहीं मिले हैं.
बताया जा रहा है कि ज़ान दी होंग के फ़र्ज़ी नामों से कई फ़ेसबुक पेज थे. रिकॉर्ड्स के मुताबिक, दोनों महिलाएं मलेशिया से आस-पास की जगहों फिनोम पेन और दक्षिण कोरिया की जगहों पर आया-जाया करती थीं.

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यह अभी साफ़ नहीं है कि दोनों महिलाएं एक दूसरे को जानती थीं या नहीं. हालांकि पुलिस का दावा है कि उन्होंने चेहरे पर वो चीज़ मलने का कुछ शॉपिंग मॉल्स में कई बार अभ्यास किया था. पुलिस के मुताबिक यह नतीजों को जानते हुए किया गया एक सोचा-समझा हमला था.
बहुत साधारण घरों से हैं दोनों आरोपी
दोनों महिलाओं का अपने देहाती घरों से कुआलालंपुर तक के सफ़र की बिल्कुल साधारण कहानी है. इंडोनेशिया की सीती आइसा तांगरांग के सेरांग की रहने वाली हैं. यह चमक-दमक वाले जकार्ता शहर से दो घंटे की दूरी पर है. उनके मां-पिता किसान हैं और आलू और हल्दी की खेती करते हैं.
सीती की तीन छोटी बहनें हैं. जिस प्राइमरी स्कूल से सीती ने पढ़ाई की थी, वहां के टीचर उन्हें शांत और विनम्र लड़की बताते हैं. प्राइमरी स्कूल के बाद उनके मां-पिता आगे की पढ़ाई नहीं करा सके.

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यहां से सैकड़ों मील दूर वियतनाम में ज़ान दी होंग की ज़िंदग़ी भी कुछ अलग नहीं थी. हनोई से 90 किलोमीटर दूर निया बिन्ह नाम के गांव में एक धान के खेत के किनारे देहाती वियतनामी तरीक़े से बने एक छोटे से घर में उनका परिवार रहता है. यहां ज़्यादातर लोग किसान ही हैं.
हुोंग के पिता 1972 के वियतनाम युद्ध में घायल हो गए थे और अब स्थानीय बाज़ार में गार्ड की नौकरी करते हैं. उनकी मां की 2015 में मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली. उसके पिता ने बीबीसी से बात करते हुए बताया, 'वह मेरी ज़्यादा करीबी नहीं थी. उसने 18 की उम्र में घर छोड़ दिया था और उसके बाद हमारी उससे न के बराबर मुलाक़ात हुई.'

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तलाकशुदा हैं सीती आइसा
सीती आइसा ने बिज़नेसमैन गनावन हाशिम से शादी की और उनका एक बच्चा भी है. वह पश्चिमी जकार्ता के तम्बोरा के एक सघन इलाके में एक छोटे से घर में रहते हैं. लेकिन 2012 में उनका तलाक हो गया.
होंग जिस बार में काम करती थीं, वह 2014 में बंद हो गया. माना जाता है कि इसके बाद वह प्रोमोशन गर्ल और एस्कॉर्ट का काम करने लगीं. वियतनाम के सोशल मीडिया पर बिकिनी में उनकी तस्वीरें हैं, जिनमें वे कारों के साथ खड़ी हैं या स्विमिंग पूल में हैं.

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उनके बारे में कहा जा रहा है कि उनके विदेशी लोगों, ख़ास तौर से कोरियाई लड़कों से संबंध रहे. उनके बार मे अक़सर कोरियाई ग्राहक आया करते थे. वहीं सीती आइसा का कोरिया के लोगों से संबंध बताने वाला कोई शख़्स नहीं मिला.
इंडोनेशियाई शरणार्थी समूह मानते हैं कि सीती को प्रभावशाली ताक़तें फंसा रही हैं. माइग्रेंट केयर पर अनीस हिसायत का कहना है कि मलेशिया में जो इंडोनेशियाई शरणार्थी मौत की सज़ा के कगार पर खड़े हैं, उनमें से आधों को ड्रग सिंडिकेट ने फंसाया है. उन्हें अपराधी माना जाता है, पर वे पीड़ित हैं.
हालांकि मलेशियाई पुलिस के मुताबिक, महिलाएं जानती थीं कि वे क्या कर रही थीं और उन्हें घटना को अंजाम देने के बाद हाथ धोने के लिए कहा गया था.
(बीबीसी वियतनाम की न्या फाम, बीबीसी इंडोनेशिया की रेबेका हेंसके और मलेशिया से वून किंग चाइ की रिपोर्ट.)
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