जी-7 शिखर बैठक में अलग-थलग पड़े ट्रंप

European Council President Donald Tusk, Canadian Prime Minister Justin Trudeau, German Chancellor Angela Merkel, US President Donald Trump, Italian Prime Minister Paolo Gentiloni, French President Emmanuel Macron, Japanese Prime Minister Shinzo Abe, Britain's Prime Minister Theresa May and European Commission President Jean-Claude Juncker pose for a family photo at the Greek Theatre during the G7 Summit in Taormina, Sicily,

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इमेज कैप्शन, सिसली में जी-सात देशों की शिखर बैठक में जुटे नेता

दुनिया के सात अमीर देशों के संगठन जी-7 के नेताओं के बीच जलवायु परिवर्तन पर एक साझा बयान जारी करने को लेकर सहमति नहीं हो पाई है.

समूह के सात में से छह देशों ने पेरिस संधि का पालन करने को लेकर अपना संकल्प दोहराया, मगर अमरीका ने इससे इनकार कर दिया.

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो इस बारे में अगले सप्ताह फ़ैसला करेंगे.

अपने पहले विदेश दौरे पर निकले अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पहली बार जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुँचे थे.

सम्मेलन इटली के सिसली शहर में हुआ.

Donald Trump waves as he stands in Sicily next to his wife Melania

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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति बनने के बाद पत्नी मेलानिया ट्रंप के साथ अपने पहले विदेश दौरे पर डोनल्ड ट्रंप

अलग पड़े ट्रंप

जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर एक साझा घोषणापत्र जारी करने की कोशिश की जा रही थी, जिसमें सभी देश 2015 में पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर हुई संधि को लागू करने को लेकर अपनी वचनबद्धता दोहराएँ.

मगर इसपर सहमति नहीं बन पाई. जी-7 के छह देश तो तैयार थे, मगर अमरीका अलग पड़ गया.

मतभेद इतने गहरे थे कि राष्ट्रपति ट्रंप बिना संवाददाता सम्मेलन किए निकल गए और बाद में ट्विटर पर लिखा कि वे पेरिस संधि के बारे में अगले सप्ताह फ़ैसला करेंगे.

ट्रंप ने एक वक़्त में ग्लोबल वार्मिंग के मुद्दे को 'धोखा' बताते हुए इस संकट को ही रफ़ा-दफ़ा कर दिया था.

वो पेरिस संधि से अलग हटने की भी धमकी दे चुके हैं.

President Trump after a photo opportunity at the summit.

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बहुत मुश्किल रही चर्चा

जर्मन चांसलर एंगेला मैरकल ने अमरीका के रूख़ की वजह से सिसली सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर हुई बहस पर निराशा प्रकट की.

उन्होंने कहा,"जलवायु पर हुई पूरी चर्चा बहुत मुश्किल थी, बहुत असंतोषजनक. हमारे सामने ऐसी स्थिति थी, छह सदस्य - और अगर आप ईयू को गिन लें, तो सात सदस्य एक ओर थे, और दूसरी तरफ़ एक. अभी तक इस बात का कोई संकेत नहीं है कि अमरीका पेरिस संधि को मानेगा कि नहीं."

सम्मेलन की समाप्ति पर फ़्रांस के नए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि छह सदस्य राष्ट्रपति ट्रंप को राज़ी करवा लेंगे, मगर वो नहीं चाहते थे कि इस मुद्दे को लेकर गुट ही टूट जाए.

एंगेला मैरकल और डोनल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, जर्मन चांसलर एंगेला मैरकल और डोनल्ड ट्रंप

उन्होंने कहा, "मैं इस - छह एक तरफ़, और एक दूसरी तरफ़ - की बहस में नहीं पड़ना चाहता क्योंकि तब हम लोकतांत्रिक और बड़ी आर्थिक शक्तियों के टूटने की बात करने लगेंगे, जो मुझे नहीं लगता कि हमारे हित में होगा. मतभेद होते रहते हैं, इस बार वो जलवायु को लेकर हुए, और मुझे लगता है कि हम इसे दूर करने की कोशिश करते रहेंगे."

वैसे शिखर सम्मेलन के लिए सिसली पहुँचे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने बीबीसी से कहा कि ट्रंप का फ़ैसला जो भी हो, पेरिस संधि बरक़रार रहेगी.

गुटेरेश ने कहा, "अगर कोई देश अलग हो जाए, तो भी संधि नहीं ख़त्म हो जाती. हमें नहीं पता कि अमरीका साथ रहेगा कि नहीं, मगर हम चाहेंगे कि अमरीका भी इस मुद्दे पर साथ हो क्योंकि ये सबके लिए ज़रूरी मुद्दा है. लेकिन अगर एक देश अलग हो जाता है, तो बाक़ी देशों के लिए ये और भी ज़रूरी हो जाता है कि वो एकजुट हों और ये सुनिश्चित करें कि पेरिस संधि पर प्रगति हो."

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश

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इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि अगर कोई देश अलग हो जाए, तो भी संधि नहीं ख़त्म हो जाती

दरार के संकेत

हालाँकि सिसली में मौजूद बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स का कहना है कि जलवायु संकट के मुद्दे पर जी-7 में दरार साफ़ दिखाई दे रही है.

एक ओर है जी-6, यानी कनाडा, जापान, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली और दूसरी तरफ़ जी-1, यानी अमरीका.

संवाददाता के अनुसार सम्मेलन के अंत में इटली के प्रधानमंत्री सहमति नहीं हो पाने पर अपनी निराशा नहीं छिपा पा रहे थे.

क्योंकि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर - जी-वन अकेला ही अलग जा रहा है.

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