चीन की इकॉनमी को लेकर बिगड़ा मूडी का मूड

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दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की रफ्तार आने वाले सालों में सुस्त पड़ सकती है.
इस आशंका से अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडी ने चीन की रेटिंग कम कर के एवन से एएथ्री कर दी है.
साल 1989 के बाद ये पहला मौका है जब मूडी ने चीन की रेटिंग कम की है.
इस पर चीन के वित्त मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मूडी ने देश की आर्थिक चुनौतियों का बढ़ा चढ़ाकर आकलन किया है और आर्थिक सुधार की उसकी कोशिशों को कम करके आंका है.
चीन पर इसका असर
मूडी के इस कदम के बाद चीन सरकार के लिए कर्ज लेने के लागत बढ़ सकती है. इतना ही नहीं रेटिंग एजेंसी ने चीन की अर्थव्यवस्था को स्थिर श्रेणी से नकारात्मक श्रेणी में रखा है.
मूडी ने कहा है, "रेटिंग में कमी करने से पता चलता है कि चीन की आर्थिक ताकत से आने वाले सालों में लोगों की उम्मीदें कम होंगी. अर्थव्यवस्था पर कर्ज बढ़ेगा और ग्रोथ की संभावना कम होगी."
बीबीसी की एशिया बिज़नेस कॉरेसपोंडेंट करिश्मा वासवानी का का कहना है, यह पहली बार नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने चीन के बढ़ते कर्ज के स्तर पर चिंता जताई है.
वे कहती हैं, क्या आप ये मानते हैं कि चीन के पास अनंत काल तक कर्ज पर चलने की क्षमता है या फिर वो अपने कर्ज कम कर सकता है और ऐसा करते हुए क्या वह अपने जबर्दस्त आर्थिक विकास को बरकरार रख पाएगा. मूडी ने बेशक इन सवालों के जवाब में ना कहने वालों का साथ दिया है.
ये नहीं भूलना चाहिए कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए भी ये अहम समय है. साल के आखिर में उन्हें राजनीतिक कांग्रेस का भी सामना करना है जहां ताकतवर अर्थव्यवस्था का ही उन्हें सहारा मिलेगा.
दुनिया पर इसका असर
ठीक इसी तरह, अगर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की सेहत पर कोई असर पड़ता है तो जाहिर है, बाकी दुनिया भी इससे अछूती नहीं रहेगी.
सामान और सेवा खरीदने के मामले में चीन दुनिया में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है.
तेल और दूसरी चीजों की खरीदारी के मामले में भी इसका अहम रोल है.
और अगर इसली माली हालत पर कोई असर पड़ता है तो ऐसी चीजों की कीमत गिरने का यह भी एक कारण होगा.
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