सीरिया के धमाके में मरने वालों में 68 बच्चे

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सीरिया में कार्यकर्ताओं के मुताबिक अलेप्पो के पास शनिवार को हुए एक धमाके में मरने वालों की संख्या 126 हो गई है, इनमें कम से कम 68 बच्चे हैं.
अलेप्पो के पास हिंसाग्रस्त इलाकों से सरक्षित निकाले जा रहे लोगों से भरी बसों को निशाना बनाकर शनिवार को एक ज़बरदस्त धमाका किया गया था.
सरकार के नियंत्रण वाले इलाके से आ रही बसों के एक काफ़िले से विस्फ़ोटकों से भरी एक गाड़ी टकराई थी.
ब्रिटेन आधारित सीरियन ऑब्ज़र्वेट्री फ़ॉर ह्यूमन राइट्स ने कहा है कि 109 लोग इस धमाके में मारे गए हैं और कई लोग घायल हैं, इसमें सहायता कर्मी और विद्रोही लड़ाके भी शामिल हैं.
कई रिपोर्टों के मुताबिक इसमें कई बच्चे भी शामिल हैं.
ईस्टर रविवार के मौके ईसाई पर धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने इस धमाके की निंदा की है.
उन्होंने कहा कि ईश्वर सीरिया के लोगों को राहत पहुंचाने और उनके घाव भरने की कोशिश कर रहे लोगों के प्रयासों को एक ख़ास तरीके से बनाए रखे.

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ये धमाका तब हुआ था जब ये काफ़िला विद्रोहियों के नियंत्रण वाले एक इलाक़े में रुका हुआ था जो अलेप्पो शहर के बाहर है.
बसों में दो गाँवों के लोग थे जो किसी सुरक्षित जगह ले जाए जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे.
इन गाँवों पर सरकार का नियंत्रण है मगर इन्हें विद्रोहियों ने घेरा हुआ था जिससे वहाँ लोग फँसे हुए थे.

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सरकार और विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़ों से लोगों को एक समझौते के तहत बाहर निकाला जा रहा था. लेकिन हमले के बावजूद इसपर अमल जारी रहा और दोनों ही तरफ़ से बसें लोगों को लेकर सुरक्षित जगहों पर पहुँच गईं.
फंसे हैं हज़ारों लोग
समझौते के तहत विद्रोहियों और सरकार के नियंत्रण वाले दो-दो इलाकों से करीब 30 हज़ार लोगों को निकाला जाना था लेकिन समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक सरकार के कब्ज़े वाले इलाकों में अब भी पांच हज़ार और विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शहरों में 2,200 लोग फंसे हुए हैं.

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पिछले महीने, संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर पश्चिम सीरिया के फोआह और केफ़्राया शहरों के अलावा विद्रोहियों के कब्ज़े वाले मडिया और ज़बादानी शहरों की स्थिति को 'विनाशकारी' करार दिया था.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक रोज़ाना की हिंसा और अभाव के चक्र में 64 हज़ार से ज़्यादा लोग फंसे हुए हैं.
निराशा और भूख
विद्रोहियों के मुताबिक सीरियाई सरकार ने ईरान और कतर की मध्यस्थता से हुए समझौते का उल्लंघन किया है.
दिसंबर में फंसे हुए लोगों को निकालने की योजना नाकाम हो गई थी जब विद्रोहियों ने लोगों को ले जाने वाली बसों में आग लगा दी थी.
मडाया के नागरिक 24 साल के अहमद ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि वहां खाने के लिए कुछ नहीं है और पानी भी नहीं है.

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रिपोर्टों के मुताबिक इन चार शहरों में खाने की कमी की वजह से कई लोगों की मौत हो गई है.
फ़ोआह और केफ़्राया में शिया मुस्लिम लोग रहत हैं जिन्हें मार्च 2015 से विद्रोहियों और अल क़ायदा से जुड़े सुन्नी मुस्लिम जिहादियों ने घेर रखा है.
सुन्नी बहुल मडिया और ज़ाबादानी पर जून 2015 से सीरियाई सेना और लेबनान के शिया मुस्लिम हिजबुल्लाह मूवमेंट का कब्ज़ा है.
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