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दो उम्र क़ैद की सज़ा पाने वाले कार्लोस द जैकल
उसने लंदन और फ्रांस में कई जगह हमले किए थे और एक वक़्त फ्रांस और कई देशों की पुलिस उसे जगह-जगह ढूंढ रही थी.
हालांकि कार्लोस द जैकल ख़ुद को क्रांतिकारी बताते थे.
लेकिन, कौन हैं कार्लोस द जैकल?
लातिन अमरीकी देश वेनेज़ुएला में जन्म लेने वाले कार्लोस का असली नाम इलिच रेमीरेज़ सांचेज़ है.
वे 1970 और 1980 के दशक में दुनिया के सबसे ख़तरनाक चरमपंथी समझे जाते थे.
उनके ख़ौफ़ का आलम यह था कि फ्रांस ने उन्हें 'आतंकवादी' घोषित कर दिया था और पुलिस पूरी सरगर्मी से उनकी तलाश करने में जुटी थी.
वे सिर्फ़ 24 साल की उम्र में 'पॉपुलर फ्रंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ पैलेस्टाइन' में शरीक हो गए और चरमपंथी क्रांतिकारी के रूप में प्रशिक्षण लेने लगे.
कुछ सालों बाद उन्होंने अपना सबसे पहला बड़ा हमला किया.
कार्लोस द जैकल ने मार्क्स एंड स्पेंसर्स के तत्कालीन अध्यक्ष जोजफ़ एडवर्ड सीफ़ पर कंपनी के लंदन स्टोर में हमला कर दिया.
उन्होंने सीफ़ के सिर में गोली मार दी. ख़ैर, सीफ़ किसी तरह बच गए. सीफ़ यहूदी थे और एक मशहूर शख़्सियत के रूप में जाने जाते थे.
कार्लोस को 1994 में सूडान में गिरफ़्तार कर फ्रांस ले जाया गया.
कार्लोस द जैकल को आजीवन कारावास की सज़ा दो बार दी गई, यानी नियम के मुताबिक़ उन्हें जीवन भर जेल में रहना है और वह भी एक नहीं, दो बार.
उन्हें ये सज़ाएं फ़लस्तीनी और कम्युनिस्ट क्रांति के नाम पर कई हत्याएं करने के आरोप में दी गई थीं.
कार्लोस सोमवार को पेरिस में तीन जज़ों की पीठ के सामने पश किए जाएंगे.
उन पर 1974 में फ्रांस की राजधानी स्थित एक शॉपिंग सेंटर पर ग्रेनेड हमला करने का आरोप है. उस हमले में दो लोग मारे गए थे और दूसरे 34 लोग घायल हो गए थे.
कार्लोस ने बेक़सूर होने का दावा किया है. उनकी वकील इसाबेल कोतां पेयर का कहना है कि इस मामले की सुनवाई पैसे और वक़्त की बर्बादी र्है.
ख़ुद को 'पेशेवर क्रांतिकारी' कहने वाले कार्लोस को पेरिस और मार्से में 1982 और 1983 में चार बम हमलों में दोषी पाया गया था.
इन हमलों में 11 लोग माए गए थे और 150 लोग ज़ख़्मी हो गए थे.
उन्हें पहली बार आज से 20 साल पहले दोषी पाया गया था. उसके बाद 2011 और 2013 में भी उन्हें दोषी साबित किया गया था.
यदि हत्या का आरोप साबित हो गया तो उन्हें तीसरी बार उम्र क़ैद की सज़ा हो सकती है.
पेरिस और फ़्रांस के दूसरे शहर टुलूज़ में 1982 में बम हमले में 28 लोग पांच लोग मारे गए थे और 28 लोग घायल हो गए थे.
इस मामले में भी कार्लोस द जैकल का नाम जुड़ा था.
इसके अलावा 1983 में मार्से और पेरिस के बीच ट्रेन में बम धमाका हुआ. इसमें तीन लोग मारे गए थे और 13 लोग घायल हो गए थे.
मर्सेल स्टेशन पर हुए बम विस्फोट में दो लोगों की जान चली गई थी.