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ब्लॉग: 'हिंदू भी फ़र्स्ट क्लास पाकिस्तानी नागरिक बन गए हैं'
- Author, वुसतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, पाकिस्तान से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
कल पाकिस्तान में तीन बातें हुईं. फौज ने एलान किया कि उसने चीन से एक नया एयर डिफेंस सिस्टम हासिल किया है जो निचली और दरमियानी ऊंचाई पर उड़ने वाले दुश्मन के विमानों को बड़ी आसानी से निशाना बना सकता है.
इस सिस्टम के हासिल होने से दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने में पहले से ज़्यादा मदद मिलेगी.
दूसरी बात ये हुई कि कल पाकिस्तान में कई जगह हिंदुओं के साथ मुसलमानों ने भी होली का गुलाल एक दूसरे पर मला और हाथों में हाथ डालकर नाचे भी.
सोशल मीडिया पर भी होली की बधाई और रंग बिरंगी तस्वीरों ने बहार लगाई. प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने पिछली होली पर हिंदुओं के एक जलसे में शिरकत की थी. इस बार वो होली में तो शरीक नहीं हुए अलबत्ता बधाई का पैग़ाम ज़रूर जारी हुआ.
पिछले साल के मुक़ाबले में इस बार नेशनल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने होली को ज़्यादा कवरेज दी और ये कवरेज भारत के पांच राज्यों के चुनाव के नतीजों की ख़बर पर भी हावी रही.
इस बार पाकिस्तानी हिंदुओं की होली की ख़ुशी इसलिए भी बढ़ गई कि सीनेट के बाद अब नेशनल असेंबली ने भी हिंदू मैरिज एक्ट की मंजूरी दे दी है. इस क़ानून के बाद अब ज़बरदस्ती धर्म बदलवाकर शादी के मामलों में कमी आएगी क्योंकि पहले हिंदू बिरादरी के पास कोई ऐसा सरकारी पन्ना ही नहीं होता था जिससे कौन शादीशुदा है कौन नहीं.
एक हिंदू लीडर ने कहा कि मैरिज एक्ट के बाद हम भी फर्स्ट क्लास पाकिस्तानी नागरिक बन गए हैं.
साथ ही साथ सोशल मीडिया पर ये इलेक्ट्रॉनिक आंदोलन भी चल रहा है कि अगर कोई सच्चा मुसलमान है तो वो खुलकर एलान करे कि उसे अपने धर्म से कितनी मोहब्बत है. और ये मांग भी हो रही है कि जब तक इस्लाम की तौहीन करने वालों को कंट्रोल नहीं किया जाता तब तक फ़ेसबुक और ट्विटर ही बंद कर दिया जाए.
इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भी आदेश दिया है कि इस्लाम की तौहीन करने वाले सारे पेज ब्लॉक कर दिए जाएं. पाकिस्तान टेलिकम्युनिकेशन अथॉरिटी ने अदालत से कहा है कि इसमें थोड़ा वक्त लगेगा क्योंकि चार अरब से ज़्यादा वेबसाइटों और पेजों को छानना और इनमें से ज़हरीले पेज तलाशना और बंद करना ऐसा ही है जैसे भूसे में सुई तलाश करना. मगर अदालत का कहना है कि ये काम एक सप्ताह में पूरा करके रिपोर्ट दी जाए.
और कल ही पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण आवामी कवि हबीब जालिब की भी चौबीसवीं पुण्यतिथि थी. जब-जब भी देश में घुटन हद से ज़्यादा बढ़ने लगती है तब-तब जालिब बहुत याद आता है. आज भी आ रहा है.
कहां क़ातिल बदलते हैं, फक़त चेहरे बदलते हैं
अजब अपना सफ़र है, फ़ासले भी साथ चलते हैं
वो जिसकी रोशनी कच्चे घरों तक भी पहुंचती है
ना वो सूरज निकलता है न अपने दिन बदलते हैं.
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