पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अमरीका में बिल पेश

    • Author, ब्रजेश उपाध्याय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन

अमरीकी कांग्रेस के निचले सदन में एक बिल पेश किया गया है जिसके तहत पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित करनेवाला देश घोषित करने की मांग की गई है.

साथ ही इस बिल को पेश करनेवाले प्रभावशाली सांसद टेड पो ने पाकिस्तान के साथ अमरीका के रिश्तों में एक "इंकलाबी बदलाव" की भी मांग की है. टेड पो कांग्रेस क प्रतिनिधि सभा में आतंकवाद पर बनी उपसमिति के अध्यक्ष हैं और इसके पहले भी वो पाकिस्तान की नीतियों की सख़्त आलोचना करते रहे हैं.

इस बिल के तहत राष्ट्रपति को 90 दिनों के अंदर जवाब देना होगा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को समर्थन देता है या नहीं. उसके 30 दिनों के बाद विदेश मंत्री को एक रिपोर्ट देनी होगी जिसमें उन्हें या तो पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित करनेवाला देश घोषित करना होगा या विस्तार से कारण बताना होगा कि उसे क्यों इस श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.

टेड पो ने बिल में लिखा है, "पाकिस्तान न सिर्फ़ एक ऐसा सहयोगी देश है जिसपर भरोसा नहीं किया जा सकता, बल्कि उसने बरसों से अमरीका के दुश्मनों का साथ दिया है और मदद की है."

उनका कहना था कि ओसामा बिन लादेन को पनाह देना हो या फिर हक्कानी नेटवर्क के साथ साठ-गांठ हो, आतंवाद के ख़िलाफ़ जंग में पाकिस्तान किसके साथ है उसके काफ़ी सबूत हैं और ये स्पष्ट है कि वो "अमरीका के साथ नहीं है."

बिल के अनुसार, "वक़्त आ गया है कि हम पाकिस्तान को इस धोखाधड़ी के लिए इनाम देने पर रोक लगाएं और उसे सरकारी तौर पर आतंकवाद को प्रायोजित करनेवाला देश घोषित करें."

ग़ौरतलब है कि टेड पो ने एक ऐसा ही बिल पिछले साल सितंबर में पेश किया था, लेकिन उसके पास होने के आसार बेहद कम थे क्योंकि ओबामा प्रशासन अपने आख़िरी दौर में था और उस पर बहस या किसी फ़ैसले का वक्त ही नहीं बचा था.

टेड पो ने इस बिल को पेश करने के साथ-साथ दी नेशनल इंटरेस्ट पत्रिका में पूर्व सहायक रक्षा मंत्री जेम्स क्लैड के साथ एक साझा लेख लिखा है जिसमें कहा गया है कि अमरीका को पाकिस्तान के साथ रिश्तों में बदलाव कि लिए भारत और पाकिस्तान के आपसी रिश्तों से अलग हटकर देखने की ज़रूरत है क्योंकि वो नीति पुरानी हो चुकी है.

उनकी सलाह है कि दक्षिण या दक्षिण पश्चिम एशिया में पैदा किसी नए संकट की वजह से अमरीका का ध्यान नहीं बंटना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और दूसरी ऐसी संस्थाओं का क़र्ज़ चुकाने में पिछड़ रहे पाकिस्तान की मदद के लिए दौड़ना नहीं चाहिए.

उन्होंने लिखा है, "चीन को वो भरपाई करने दें अगर पाकिस्तान अपना भविष्य उसी तरह से गिरवी रखना चाहता हो." इसके पहले वॉशिंगटन के कई जानेमाने थिंक टैंक्स और दक्षिण एशिया मामलों के जानकारों ने भी एक बेहद सख़्त रिपोर्ट कांग्रेस के सामने पेश की थी जिसमें इसी से मिलती-जुलती सलाह दी गई थी.

पाकिस्तान की दलील रही है कि दुनिया ये नहीं देख रही कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ कितनी क़ुर्बानियां दी हैं और हमेशा उसे "और करो" की मांग की जाती रही है. लेकिन मौजूदा कांग्रेस में पाकिस्तान पर लगाम कसने की मांग करने वाली आवाज़ें पहले से काफ़ी तीखी हैं और ये पाकिस्तानी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.

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