काबुल के सैन्य अस्पताल पर हमला, 30 मौंतें

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अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के सबसे बड़े सैनिक अस्पताल पर बंदूकधारियों ने हमला किया है. इस हमले में 30 लोग मारे गए हैं.
अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार हमलावरों ने सैन्य अस्पताल के मुख्य द्वार पर एक आत्मघाती हमले के बाद कुछ हमलावरों ने इमारत के अंदर प्रवेश किया और वहाँ के स्टाफ व मरीज़ो पर गोलियां चलानी शुरु कर दीं.
हमले के बाद कमांडो हेलीकॉप्टर से अस्पताल की छत पर उतरे और घंटों चले संघर्ष के दौरान चार चरमपंथी मारे गए.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमलावर डॉक्टरों के लिबास में थे. अधिकारियों का कहना है कि सभी मरीजों को निकाल लिया गया है.

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चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है. तालिबान ने इस घटना में अपनी किसी भूमिका से इनकार किया है.
अस्पताल के एक कर्मचारी ने बीबीसी से कहा कि उन्होंने सरदार दाऊद अस्पताल के मुख्य दरवाजे पर एक धमाका सुना.
इसके बाद वहां गोलीबारी शुरू हो गई.

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डॉक्टर का कोट पहने बंदूकधारी
अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने देखा कि एक बंदूकधारी अस्पताल में पहने जाने वाले कोट में था. उसने कोट के अंदर से बंदूक निकाली और गोलियां बरसानी शुरू कर दी.
चार सौ बिस्तरों वाला यह अस्पताल अमरीकी दूतावास के पास ही है.
अस्पताल से बच निकलने में कामयाब रहे डॉक्टर अब्दुल क़ादिर ने कहा, "सफ़ेद कोट पहने हुए एक बंदूकधारी ने मुझ पर गोलियां चलाईं, मैं सीढ़ियों से नीचे कूद गया. तब उसने मेरे एक दूसरे सहकर्मी पर गोलियां चलाईं."
'ख़ून का बदला लेंगे'

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राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने कहा कि "इस हमले ने तमाम मानवीय मूल्यों को कुचल दिया."
उन्होंने कहा, "सभी धर्मों में अस्पताल को महफ़ूज समझा जाता है और इस पर हमला पूरे अफ़ग़ानिस्तान पर हमला है."
अफ़ग़ानिस्तान के दूसरे नंबर के नेता अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है.
उन्होंने अपने ट्विटर एकाउंट पर "लोगों के ख़ून का बदला लने की कसमें खाई हैं."












