'हम ट्रंप से ओबामा जैसा ही भरोसा चाहते हैं'

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- Author, जसमीत सिंह
- पदनाम, अमरीका में सिख कोलिएशन के नेता
सिएटल में एक पगड़ीधारी सिख पर हमले के बाद अमरीका में सिख समुदाय डरा हुआ है. डरना तो स्वाभाविक है.
इसके साथ ही समुदाय में इस बात की भी चिंता है कि इस तरह की घटनाओं और प्रचार से किस तरह निपटा जाए.
अमरीका के दूसरे समुदायों के साथ पारस्परिक संबंध कैसे विकसित किया जा सकता है? बातचीत को आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है?
इस तरह की घटना से थोड़ी निराशा तो है. लेकिन वो इन चीजों से निपटने के बारे में सोच भी रहे हैं.
ये घटना केंट वॉशिंगटन नाम के एक छोटे से शहर में हुई. वहां शाम क़रीब आठ बजे एक सिख व्यक्ति अपनी कार पर कुछ काम कर रहा था.
इस दौरान एक व्यक्ति वहां पहुंचा और उन्हें गालियां देने लगा. इस पर सिख व्यक्ति ने उस व्यक्ति को समझाना चाहा. वह उन्हें अमरीका छोड़कर जाने के लिए कह रहा था.
इस बात पर विवाद बढ़ गया और दोनों हाथापाई करने लगे. इस दौरान गाली देने वाले व्यक्ति ने बंदूक निकाल कर सिख व्यक्ति के कंधे में गोली मार दी.
ट्रंप के बाद
मेरे पास ऐसा कोई आंकड़ा तो नहीं है जिसके आधार पर मैं कह सकूं कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद सिखों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं या कम हुई हैं.
लेकिन जिस तरह से कैंसस में श्रीनिवास की गोली मारकर हत्या की गई और शुक्रवार शाम एक सिख को गोली मारकर घायल किया गया - इन घटनाओं को देखकर लग रहा है कि भारतीयों पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं.

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दूसरी बात यह है कि इसके पहले जब इस तरह की घटनाएं होती थीं तो राष्ट्रपति या प्रशासन की ओर से बहुत साफ़-साफ़ संदेश आता था कि इस तरह की घटनाएं स्वीकार नहीं हैं.
ऐसी हर घटना की कड़ी निंदा की जाती थी, लेकिन अब वैसा नहीं देखा जा रहा है.
राष्ट्रपति के मुंह से हम यह सुनना चाहते हैं कि अमरीकी नागरिक के रूप में हर दक्षिण एशियाई हिंदू, मुसलमान या सिख की ज़िंदगी भी किसी दूसरे नागरिक की ही तरह महत्वपूर्ण है.
लेकिन ऐसी बात हमें सुनने को नहीं मिल रही है. इससे हम निराश हैं. यह हमारी समझ से परे है कि प्रशासन इन घटनाओं पर चुप्पी क्यों साधे हुए है.
श्रीनिवास की हत्या की प्रशासन कड़े शब्दों में निंदा क्यों नहीं कर रहा है.
(बीबीसी संवाददाता विभुराज से बातचीत पर आधारित)













