कैंसस हमले से हिले हुए हैं अमरीका में भारतीय

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- Author, सलीम रिज़वी
- पदनाम, न्यूयॉर्क से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
अमरीका में डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद एक महीना ही गुज़रा है लेकिन अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों में हाल ही में हुए हिंसक हमलों के कारण दहशत का माहौल है.
कैंसस प्रांत के ओलेथ शहर में दो भारतीय इंजीनियरों पर हुए हमले से भारतीय मूल के लोग हिल गए हैं.
22 फ़रवरी को हुए हमलों में श्वेत अमरीकी हमलावर ने बंदूक से हमला करते हुए कथित तौर पर कहा था, "मेरे देश से बाहर निकल जाओ."
इस हमले के दौरान एक अन्य श्वेत अमरीकी ने अपनी जान पर खेल कर बंदूकधारी को दबोचने की कोशिश की थी जिसके कारण वह भी गंभीर रूप से घायल हुआ.
लेकिन इस मामले में कई लोग नए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की कथित नस्लभेदी टिप्पणियों और बयानों के कारण अमरीका में नस्लीय भेदभाव में आई तेज़ी को भी ज़िम्मेदार मानते हैं.
कैंसस में हमलों के बाद भारतीय मूल के आम लोगों में यह भय बढ़ गया है कि अब उनको भी नस्ल और रंग के आधार पर हिंसा का निशाना बनाया जा सकता है.

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भारत के आंध्र प्रदेश से क़रीब तीन दशक पहले आए राजेश्वर रेड्डी अब न्यू जर्सी में रहते हैं और एक तेलुगू संस्था नार्थ अमेरिकन तेलुगू एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं.
राजेश्वर रेड्डी कहते हैं, "डर तो है, लेकिन डरने की बात नहीं है, बस ज़रा संभल के रहें. मैं अपने समुदाय के लोगों को यही कह रहा हूँ कि अभी हालात खराब हैं, थोड़े दिन संभल के रहें, किसी से बहस न करें, कोई अगर कुछ कहता है तो उससे दूर हो जाएं. उम्मीद है कि कुछ समय गुज़रने के बाद सब शांत हो जाएगा."
लेकिन राजेश्वर रेड्डी कहते हैं कि ट्रंप के सत्ता में आने के बाद हालात ख़राब हुए हैं. वह राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को सलाह देते हैं कि उन्हें अपने बयानों में थोड़ी नर्मी लानी चाहिए और यह दिखाना चाहिए कि वह सभी अमरीकियों के राष्ट्रपति हैं.
अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की संख्या 20 लाख से अधिक बताई जाती है. बहुत से भारतीय मूल के लोग तकनीकी, फ़ाइनेंस, स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रोफ़ेशनल या पेशेवर डिग्रियों के साथ कई वर्षों से ऊँचे पदों पर भी मौजूद हैं.

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इसके अलावा व्यापार या बिज़नेस में भी बहुत से भारतीय मूल के लोगों ने वर्षों से अपनी पैठ बनाई है.
लेकिन कई जानकारों का यह मानना है कि 2016 के राष्ट्रपति पद के चुनाव मुहिम के समय से ही डोनल्ड ट्रंप द्वारा कथित नस्लीय भेदभाव को प्रेरित करने वाले कुछ बयानों के कारण अमरीका में नस्लीय भेदभाव पर आधारित हिंसा या हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है.
ख़ासकर कुछ श्वेत अमरीकी लोगों द्वारा गैर-श्वेत लोगों पर नस्लीय छींटाकशी या हिंसक हमले करने के मामले बढ़े हैं.

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न्यूयॉर्क के जैक्सन हाईट्स इलाक़े में दक्षिण एशियाई मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं.
भारतीय मूल की अमरीकी महिला सोनिया जैक्सन हाईट्स इलाक़े में ही एक गारमेंट स्टोर चलाती हैं. वह कहती हैं कि भारतीय मूल के लोग दहशत और अनिश्चित्ता के माहौल में जी रहे हैं.
सोनिया कहती हैं,"सभी लोगों में दहशत है, चाहे वह हिन्दू हों, सिख, ईसाई या मुस्लिम हों, किसी को भी पता नहीं है कि क्या होने वाला है. लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिए. क्योंकि हम सब अमरीकन हैं. अमरीकी होने के बावजूद लोगों में दहशत फैल गई है."
इसी इलाक़े में एक ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले मोहिंदर वर्मा भी पिछले 25 साल से अधिक समय से अमरीका में रह रहे हैं.
मोहिंदर वर्मा कहते हैं कि कैंसस जैसे हिंसक हमलों को रोकने के लिए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को और सख़्ती से इसे रोकना चाहिए.

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मोहिंदर वर्मा कहते हैं,"कैंसस हमलों के बाद से लोगों को यही डर है कि उनकी हिफ़ाज़त कौन करेगा. हम लोग 12 हज़ार मील दूर से आकर अमरीका में मेहनत करते हैं, तो सबको सुरक्षा मिलनी चाहिए. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को चाहिए कि वह इस तरह के हमलों को रोकने के लिए और कड़े क़दम उठाएं."
मोहिंदर वर्मा कहते हैं कि कैंसस जैसे हमले सिर्फ़ भारतीय मूल के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि सभी के लिए दुख की बात है.
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 28 फ़रवरी को अमरीकी संसद में अपने पहले भाषण के शुरुआत में ही नस्लीय भेदभाव और उससे प्रेरित हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कैंसस में भारतीय मूल के लोगों पर किए गए हमले का भी ज़िक्र किया.
लेकिन भारतीय मूल के बहुत से लोगों का मानना है कि अमरीका में नस्लीय भेदभाव में तेज़ी ट्रंप के बयानों और उनकी कुछ नीतियों के कारण ही आई है.

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न्यू जर्सी में रहने वाले भारतीय मूल के अमरीकी और न्यूजर्सी राज्य के पूर्व असेंबली सदस्य उपेंद्र चिवुकुला का मानना है कि भारतीय मूल के लोगों को बढ़चढ़ कर अमरीकी समाज में सक्रिय होना पड़ेगा और हिंसा के ख़तरे के मौजूदा दौर से निपटने के लिए होशियार रहना होगा.

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उपेंद्र चिवुकुला कहते हैं, "समुदाए के लोगों को स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सक्रीयता बढ़ानी होगी, खुलकर हर स्तर पर अपने मुद्दों को सामने रखना होगा. इसके अलावा मुख्यधारा में दूसरे अमरीकियों के साथ मिलने जुलने के दौरान ज़रा सावधानी बरतें, किसी झगड़े से बचें, रात बिरात सार्वजनिक जगहों पर जाएं तो सावधान रहें. अपने पास एक से अधिक सरकारी पहचान पत्र रखें तो बेहतर होगा."

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चिवुकुला कहते हैं कि समुदाय के लोगों को डरने की ज़रूरत नहीं है लेकिन पूरे आत्मविश्वास के साथ अन्य अमरीकी की तरह ही अपना जीवन बिताएं क्यूंकि उन्हें भी हर अमरीकी की तरह देश में बराबरी के साथ रहने का अधिकार है.
अमरीका में नस्लीय भेदभाव और हिंसक हमलों पर नज़र रखने वाली एक अमरीकी संस्था सदर्न पॉवर्टी लॉ सेंटर के मुताबिक़ अमरीका में ट्रंप के राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद से अमरीका में नस्लीय और धर्म के आधार पर भेदभाव से प्रेरित हमलों में इज़ाफ़ा हुआ है.
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