ख़ुद की चार बीवियां, बहुविवाह का विरोध

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"हमने उन मर्दों का हश्र देखा है, उनकी औक़ात नहीं है लेकिन चार-चार शादियां कर रखी हैं. वे 20 बच्चे पैदा कर लेते हैं. बच्चों को पढ़ा लिखा नहीं पाते हैं और सड़कों पर छोड़ देते हैं. ये बच्चे बदमाश या आतंकवादी बन जाते हैं."
ये कहना है नाइजीरिया के सबसे बड़े शहर कानो के अमीर मुहम्मद सनसुई का. ये बात दीगर है कि ख़ुद सनसुई चार बीवियों के शौहर हैं.
उन्होंने ये बातें उस देश में कही हैं, जहां एक से ज़्यादा शादियां करना आम है.
'एक बीवी ही काफ़ी'

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उत्तरी नाइजीरिया के शहरों और कस्बों में बच्चों को ट्रैफिक सिग्नल पर गाड़ियां घेरकर भीख मांगते देखा जा सकता है.
सनसुई के मुताबिक़, "ये बच्चे इस्लामी गुट बोको हराम के काम आते हैं."
उन्होंने प्रस्ताव पेश किया है कि क़ानून बना कर बहुविवाह पर रोक लगा देनी चाहिए.
वे कहते हैं, "एक बीवी ही काफ़ी है."
बहुविवाह की दिक़्क़तें

सिविल मैरिज में किसी की एक ही बीवी हो सकती है. लेकिन इसमें प्रथा के मुताबिक़ शादी करने की भी व्यवस्था है.
नाइजीरिया में मोहम्मद बेलो अबू बक़र नामक शख़्स की 86 पत्नियां और 170 बच्चे थे. उनकी मौत कुछ दिन पहले ही हुई है.
वैसे इस्लाम में एक समय में चार बीवियां रखने की इजाज़त किसी पुरुष को नहीं है. यह कहा गया है कि कोई आदमी दूसरी शादी तभी करे जब वह सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार कर सकता हो.
'द पज़ल ऑफ़ मोनोगैमस मैरिज'

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ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ने साल 2012 में एक किताब छापी, जिसका नाम है, 'द पज़ल ऑफ़ मोनोगैमस मैरिज'. इसमें कहा गया है कि जिन समाजों में बहुविवाह की प्रथा है, वहां युद्ध, बलात्कार और डकैती का जोखिम ज़्यादा है.
सनसुई ने इस्लामी विद्वत परिषद को अपना प्रस्ताव दे दिया है. वो इसे मंजूर करती है तो कानो प्रांत की संसद को भेज देगी.
यदि कानो की संसद इस पर मुहर लगा देगी तो यह उन सभी राज्यों में लागू हो जाएगा, जहां शरिया क़ानून है.
शरिया क़ानून में घरेलू हिंसा पर भी रोक है और महिलाओं को शारीरिक चोट लगने पर मुआवजा देने की व्यवस्था है.
कानो को आधुनिक बनाने की मुहिम

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पारिवारिक क़ानून के वकील इक न्वाबुफ़ो का मानना है कि सनसुई शरिया क़ानून को अधिक सख़्त बनाना चाहते हैं. वे इसे धर्म और संस्कृति के लिए अधिक महत्वपूर्ण बनाना चाहते हैं.
सनसुई साल 2014 में कानो का अमीर बनने के बाद से ही उस प्रांत को अधिक आधुनिक बनाने की मुहिम में जुटे हैं.
एक बार शिक्षकों की बैठक में उन्होंने कहा था कि मस्जिदों को स्कूल में तब्दील कर देना चाहिए. उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था को ही 'नाकाम' क़रार दिया था और अब वे पुरानी पंरपरा को बदलने की कोशिश कर रहे हैं.












