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जहां पादरी ही करने लगे बच्चों का यौन शोषण
ऑस्ट्रेलिया में एक जांच के दौरान पता चला है कि देश के सात प्रतिशत कैथोलिक पादरी बच्चों के यौन शोषण में लिप्त रहे हैं.
यह अध्ययन 1950 से 2010 के बीच किया गया है. वहीं एक दूसरी जांच के मुताबिक देश के क़रीब 40 फ़ीसदी चर्च पर बच्चों के यौन शोषण के आरोप हैं.
बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों पर नज़र रखने वाली रॉयल कमीशन के पास 1980 से 2015 के बीच करीब 4,500 लोगों ने यौन शोषण होने की शिकायत दर्ज कराई थी.
यह कमीशन ऑस्ट्रेलिया में धार्मिक और गैर धार्मिक जगहों पर होने वाले यौन शोषण की जांच करने की सबसे शीर्ष संस्था है.
सिडनी में कमीशन की मदद करने वाली वकील गेल फ़रनेस के मुताबिक यौन शोषण की पीड़ितों की कहानियां काफी अवसाद भरी हैं.
गेल बताती हैं, "बच्चों की उपेक्षा की गई, उन्हें सज़ा भी दी गई. आरोपों की जांच नहीं हुई. पादरी और धार्मिक गुरू आसानी से बच गए. इन चर्चों को उन पादरियों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया."
गेल के मुताबिक 1980 से 2015 के बीच ऑस्ट्रेलिया के 1000 कैथोलिक इंस्टीट्यूशनों में 4,444 बच्चों का यौन उत्पीड़न हुआ.
इन बच्चों की औसत आयु लड़कियों के लिए 10.5 साल रही है, वहीं लड़कों के लिए 11.5 साल. लेकिन चिंता की बात ये है कि प्रत्येक मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने में औसत 33 साल का वक्त लगा है.
ऑस्ट्रेलिया में रॉयल कमीशन की स्थापना 2013 में हुई थी. यह स्कूल, स्पोर्ट्स क्लब और धार्मिक संस्थाओं में होने वाले यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए बनाई गई थी.
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